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  • 7 minutes ago
Hindi Kavita

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Transcript
00:00एक बात जिन्दगी की मुझे रास नहीं आती, खुसिया ज़्यादा देर मेरे पास नहीं आती, जब से गुजरने लगी हूँ
00:09तेरी याद में रात तनहा, मुझे खुद की याद कुछ खास नहीं आती।
00:15गुजरा करीब से एक हवा का जोखा दे गया, उसकी खुस्बू के बगर जेसे सांस नहीं आती, पास और पास
00:25जब से आया है वो मेरे, दूरियों को मुझे से कुछ खास आस नहीं आती।
00:31ये काइनात भी बेखबर नहीं हमारे रिस्ते से, चांद के बिंग चांदनी को नींद रास नहीं।
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