00:00अपना लच खोजिए, भेड में चनला आसान है, पर रह अपनी चुना कठिन है, हर सपना हो सकता है सच
00:09आपका, बस लच को पहचानना जरूरी है, अंधेरों से मत घबराई, पीपक बन सुद को जलाई, जो ठान लिया मन
00:18ने एक बार उस मंजिल तक चरूर पहुंचाई, खार �
00:22नहीं है, अंत कहानी का, या तो बत एक तीख है, जो गिर कर भी उठक खड़ा हो, वही सच्चा
00:28विसिस्ट है, समय की आंधी हाला के चोट, रोक नहीं सकती उडान आपकी, बस नजर टिक की रहें लच पर,
00:37यहीं पहचान है इनसान आपकी, जो आज खुद से वादा करिए, स
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