00:00अपना लच खोजिए, भेड में चनला आसान है, पर रह अपनी चुना कठिन है, हर सपना हो सकता है सच आपका, बस लच को पहचानना जरूरी है, अंधेरों से मत घबराई, पीपक बन सुद को जलाई, जो ठान लिया मन ने एक बार उस मंजिल तक चरूर पहुंचाई, खार �
00:30तमय की आंधी हाला के चोट, रोक नहीं सकती उडान आपकी, बस नजर टिक की रहें लच पर, यहीं पहचान है इनसान आपकी, जो आज खुद से वादा करिए, सपनों को सच में ढालिए, दुनिया बतलने से पहले मित्र, अपना लच खोजिए
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