00:02क्या आपका बाद करहें नाव आयुप में साफ कर गया किस बार बंगाल में चनाव
00:09है रहें इंसा रहें थंकी रहें त्रलोभण रहें चापा रहें तर्भूथ एवंसोर्स जामिंग रहें तो होका रहेंगे
00:17लेकिन इस पर विपक्षी दलों का विरोट शुरू हो गया
00:42पश्चिन बंगाल चुनाव से पहले फिर सियासी रेंड भूमी बन चुका है
00:46लेकिन इस बार लड़ाई सिर्फ पार्टियों के बीच नहीं है
00:49बल्कि एक सम्वेधानिक संस्था और सत्ता धारी दल के बीच खुल कर सामने आ गई है
00:54सवाल बड़ा है क्या चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्था किसी राजमितिक पार्टी को अल्टीमेटम दे सकती है
01:01या फिर ये लोकतंत्र के संतुलन में एक नई दरार है
01:05पश्चिम बंगाल चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग का त्रंडमुल कॉंग्रस को दिया गया सीधा अल्टीमेटम सियासत की आग को
01:12और भढ़का चुका है
01:13एक तरफ चुनाव आयोग है जो कह रहा है कि इस बार चुनाव भय मुक्त हिंसा मुक्त और पुरी तरह
01:19निश्पक्ष होंगे
01:20और दूसरी तरफ ममताब आयोग और उनकी पार्टी जो इस पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर रही है
01:26और यहीं से कहानी शुरू होती है तकराव की, भरोसे की और उस लुक्तंत्र की जुसकी निव ही निश्पक्ष चुनाव
01:33पट की है
01:34आज हम अलग-अलग चैप्टर्स में जानेंगे कि चुनाव आयोग और ममताब आनर्जी के बीच तकराव क्यों बढ़ा है
01:52नमस्कार मेरा नाम है रिचा पराशर और आप देख रहे हैं वन इंडिया का ये खास प्रोग्राम आज का एक्स्प्लेइनर
02:03सबसे पहले बात करते हैं इस ताजा घटना क्रम की
02:06पश्चिम बंगाल में चुनाव हमेशा सिर्फ वोटिंग नहीं होते ये ताकत नियंत्रन और नेरेटिव की लड़ाई होते हैं
02:13और इस बार कहानी और भी ज्यादा पेचीदा हो गई है
02:16चुनाव आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि इस बार बंगाल में चुनाव हूंगे
02:20भय मुक्त हिंसा मुक्त धम की मुक्त
02:22सुनने में ये सामान ये बयान सा लग रहा है
02:25लेकिन जब इसे सीधे तौर पर त्रिन्वूल कॉंग्रेस के लिए संदेश की तरह देखा गया
02:30तो राजुनितिक हलकों में हलचल तेज हो गई
02:32मम्ताब अनरजी की पार्टी से अल्टिमेटर मान रही है और यहीं से शुरू हुआ है नया टकराओ
02:4191 लाख नाम और सियासी विस्फोट इस टकराओ की जड़ में है सियार यानि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजिन
02:48चुनाव आयोग ने मदादा सूची की गहन समीक्षा शुरू की और नतीजा करीबी 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटा
02:55दिये गए
02:56ये सिर्फ आकड़ा नहीं था ये सीधे सीधे चुनावी गणित को बदलने वाला फैसला था
03:01सीवा वर्ति जिलो जुन में मालदा, मुर्शिदाबाद, नादिया, 24 परगना जहां पहले ही पहचान और नागरकता को लेकर बहस तेज
03:10होती रही है
03:11वही से सबसे ज्यादा नाम हटे है
03:13रिटबुल कॉंगरस ने तुरंत आरोफ लगाया ये सिस्टेमेटिक वोटर सप्रेशन है
03:18मतलब चुनिंदा वोटर्स को हटा कर चुनाव को प्रभावित करना
03:22ममता बैनर जी ने इसे सुप्रिम कोट के आदेश का उलंगन बताया
03:26और साफ कहा अगर जरूरत पड़ी तो हम फिर से कोट जाएंगे
03:30कोट जाने की धंकी ममता बैनर जी ने दी है
03:32लेकर इससे पहले वो कोट जा चुकी है
03:34आपको याद होगा कि काले कोट में वकील के वेश बूशा में
03:38खुद ममता बैनर जी सुप्रिम कोट पहुँची थी
03:40जा उन्होंने अपनी दलीले खुद रखी थी
03:42और इसी आई को काफी फटकारा था
03:44अब आते हैं चैप्टर टू
03:45चुनाव आयो का पक्ष कानून या फिर सक्ती
03:49अब चुनाव आयो क्या कहता है
03:50आयो का कहना है कि मदाता सूची की
03:53शुद्धता सुनिश्चित करना उसका सम्मिधानी करता व्य है
03:56भातिय सम्मिधान का अनुशे 324
03:58चुनावायों को स्वतंत्र और व्यापक अधिकार देता है ताकि चुनाव निश्पक्ष और पारदर्शी हो सके
04:04ECI के मुताबिक डुप्लिकेट एंट्री फरजी वोटर्स मितलोगों के नाम इन सबको हटाना जरूरी है
04:10लेकिन सवाल यहीं उठता है क्या यह प्रक्रिया उरी तरह से निश्पक्ष है या इसका टाइमिंग चुनाव से ठीक पहले
04:18का राजुनितिक असर डालता है
04:19और यही सवाल टीम सी उठा रहे हैं बार बार अब आते हैं तीसरे चैप्टर पर
04:24अल्टिमेटिम सीधी चेतावनी या लोकतांत्रिक दखल इसी आई का हालिया बया नजबार चुनाव बिना हिंसा और दबाब के होंगे
04:32यह पहली नजर में सावाने लगता है लेकिन बंगाल की राजुनीती में इसका मतलब अलग निकाला जा रहा है
04:38त्रिणमोल ने कहा कि यह सीधे तोर पर हमें टागेट करने की कोशिश है और टीमसी के पास यह कहने
04:43की वजह है
04:44क्योंकि ECI ने सीधा सीधा पार्टी का नाम लेकर चेताया है
04:48और यहाँ सबसे बड़ा सवाल यही है क्या यह स्वतन तरसंस था किसी पार्टी को इस तरसे चेताव नहीं दे
04:54सकती है
04:54तकनीकी तोर पर ECI का काम है चुनाव करा ना कानून व्यवस्था पर नज़र रखना
04:59लेकिन राजुनितिक भाषा में अल्टिमेटम शब्द निश्पक्षता पर सवाल जरूर खड़े कर देता है
05:07क्या यह पहला ठकराव है?
05:09नहीं, ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हो रहा है
05:132019 में लोगसभा चुनाव में बंगाल में हिंसा की आरोप लगे और ECI ने प्रचार समय कम कर दिया था
05:19जो अभूत पुर्व कदम था
05:212021 में धान सभा चुनाव में कई चरणों में मद्दान हुआ
05:24टीमसी ने कहा ये बीजेपी को फाइदा पहुचाने की रणनीती है
05:28दिल्ली, आंधिप्रदेश, तमिलनाडू कई राजियों में विपक्ष ने ECI पर सवाल उठाए है
05:34मतलब साफ है, ECI बनाम विपक्ष का टकराव नया नहीं है
05:38लेकिन बंगाल में ये सब से तीखा है
05:40अब आते हैं पांचवे चैप्टर पर
05:42असली सवाल
05:43क्या ECI पूरी तर स्वतंतर है?
05:45भारतिय चुनावायोग को दुनिया की सबसे शक्तिशाली चुनावी संस्थाओं में गिना जाता है
05:50लेकिन इसकी स्वतंतर्ता पर बहस हमेशा से रही है
05:53नियुक्ति प्रक्रिया हो, सरकार की भूमिका हो
05:56और फैसलों का टाइमिंगे सबी सवाल उठते रहे हैं चुनावाय उपर
06:00विपक्ष का आरोप रहा है कि ECI अब पहले जैसा निश्पक्ष नहीं रहा
06:04वहीं सरकार और समर्थक कहते हैं कि ECI सिर्फ अप्रा काम कर रहा है
06:08सच्चाई शायद इन दोनों के बीच कहीं है
06:13बंगाल का चुनावी इतिहास
06:15बगाल जहां चुनाव सिर्फ बोच नहीं शक्ति प्रदर्शन है
06:18बंगाल की राजनीती में हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और डराने धमकाने के आरोप नए नहीं है
06:24हर चुनाव में ये मुद्दे उठते रहे हैं
06:27इसलिए ECI का सक्त रुख कुछ लोगों को जरूरी रगता है
06:31लेकिन अब यहीं सक्ति किसी एक पार्टी के खिलाफ दिखे तो सवाल उठना लाजमी है
06:35यानि कि अगर चुनाव आयोग ने ट्विट करके अगर अल्टिमीटम दिया
06:39अगर चेताव नी दी है तो ये दोनों पार्टियों के लिए होनी चाहिए
06:42जितने लोग चुनाव में उतर रहे हैं जो भी पार्टियां चुनाव लड़ रही है
06:46सब के नाम पर होना चाहिए
06:47किसे एक पार्टी विशेश टीमसी का नाम लेकर ये बोलना आपने आप में एक बड़ी बात हो जा रही है
06:53तो अब आगे क्या
06:54अब हालात ये हैं एक तरफ चुनाव आयोग है दूसरी तरफ ममता बेनरजी और उनकी पार्टी
06:58बीच में खड़ा है वोटर जुसका नाम लिस्ट में है या नहीं यही अब सबसे बड़ा सवाल बन चुका है
07:05अगर ये विवाद बढ़ता है तो ये सिर्फ बंगाल तक सिमित नहीं रहेगा
07:09बलकि पूरे देश में चुनावी संस्थाओं की विश्वासनियता पर असर डालेगा
07:13आखिर में सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि क्यानवे लाक नाम क्यों कटे
07:17सवाल इससे कहीं बड़ा है
07:19सवाल ये है कि क्या देश की सबसे एहम लोगतांतरिक संस्था पर
07:23लोगों का भरोसा वैसा ही बना हुआ है जो ऐसा पहले था
07:27क्या आब उस भरोसे में दरारे दिखने लगी है
07:29क्योंकि चुनाव सिर्फ वोट डालने की प्रक्रिया नहीं है
07:32ये विश्वास का तंत्र है एक ऐसा सिस्टम जिस पर करोडो लोग बिना सवाल की भरोसा करते है
07:39पश्चिम बंगाल में जो कुछ हो रहा है वो सिर्फ एक राज्य की सियासत नहीं है
07:43ये एक संकेत है कि आने वाले समय में चुनाव और भी ज्यादा बदबादों के घेरे में आ सकते है
07:48जब एक तरफ चुनाव आयोग सकती दिखाता है और दूसरी तरफ सत्ताधारी पार्टी इसे टार्गेटेड एक्शन बताती है
07:55तो आम वोटर किंफ्यूज हो जाता है उसे समझ नहीं आता कि सच किसके साथ है और यही कंफ्यूजन लोगतंतर
08:02के लिए सबसे बड़ा खत्रा बन जाता है
08:04अगर मदाता सूची पर ही सवाल खड़े हो जाएं अगर चुनाव से पहले लाखों लोगों को ये डर लगने लगे
08:10कि उनका नाम लिस्ट में है या नहीं तो फिर चुनाव का असले मकसद ही कमजोर बढ़ जाता है
08:15क्योंकि लोगतंतर की ताकत वोटर की भागिदारी में है और अगर वही भागिदारी संदिक्द हो जाए तो पूरी प्रक्रिया पर
08:22सवाल उचना लाजुमी है
08:24अब नजरें सिर्फ एक चीज पर है आने वाले चुनाव पर
08:28क्या ये चुनाव सच में भय मुक्त और निश्पक्ष होंगे जैसा चुनाव आयोग दावा कर रहा है
08:34या फर ये विवाद और गहराएंगी
08:36क्या ममताब एनर्जी की कानूनी लड़ाई कोई बड़ा मोड आएगी या फिर चुनाव आयोग अपने फैसले पर कायम रहेगा
08:43इन सवालों की जवाब तो आने वाले वक्त पे मिलेगा भविश्य में मिलेगा लेकिन इतना तय है कि पश्चिन बंगाल
08:48का ये चुनाव सिर्फ सरकार चुनने का चुनाव नहीं होगा वलकि ये तय करेगा कि लोगतंत्र में भरोसे की नियू
08:53कितनी मजबूत है और क्या दे
09:13कि अप्सक्राइश टे ओ सुटर्ड वाले वंश्य मैं ठध्याला करे आप डिए
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