00:10सोचिए एक साधी दो इंसान और असी से ज़्यादा कोड़ केस इतना लंबा इतना कड़वा कि खुच सुप्रीम कोड़ को
00:19कहना पड़ा ये तलाक का मामला नहीं यह महभारत बन गया है
00:27आज की कहानी एक ऐसे मामले की है जिसमें पती खुद बकील था लेकिन उसने कानून को नयायक लिए नहीं
00:35बलकि अपनी पतनी को तोड़ने के लिए इस्तिमाल किया
00:38और जब ये मामला सुप्रीम कोड पहुचा तो जो फैसला आया वो सिर्फ एक तलाक का फैसला नहीं था
00:44वो था कानून के दुरप्योग पर एक करारा जबाब
00:48शुरुआत कहां से हुई साल था 2010 मुंबई में एक जोड़े की साधी हुई पती पेशे से बकील पत्मी पढ़ी
00:58लिखी खुद भी कपिम
00:59शुरुआत में कुछ साल ठीक ठाक गुजरे दो बेटे हुए लेकिन 2016 आते आते रिस्ते में इतनी दरार आ गई
01:07कि दोनों अलग हो गए
01:09और फिर शुरू हुई एक ऐसी लड़ाई जो अगले 10 साल तक नहीं रुकी बकील पती ने क्या किया
01:17अब यहां असली मोड़ाता है आम तोर पर तलाक के मामले में एक दो केस होते हैं
01:23फैमली कोर्ड पर तलाक की अरजी मेंटिनेंस का मामला पच्चों की कस्टडी लेकिन इस पती ने क्या किया
01:30उसने अपनी लीगल नॉलिज का इस्तिमाल किया और ठोक दिये 80 से ज्यादा केस पत्नी पर पत्नी के परवार पर
01:37और सुरी पत्नी के वकीलों पर भी
01:40अकेले वकीलों के खिलाप नौकेस मकसद क्या था नयाय पाना नहीं बल्खी सामने वाले को इतना ठका दो इतना परिशान
01:50कर दो कि वो खुद हार मान ले
01:53सुप्रीम कोर्ट ने इसे कहा विंडिक्टिव लिटिगेशन यानि बदले की भावना से की गई कानों लड़ाई पैसो अखे कितना ही
02:04नहीं जब मेंटिनेंस यानि गुजारा भत्ते की बात आई पत्नी और बच्चों के लिए तो पत्ही ने कहा मेरे पास
02:12पैसे नहीं है मै
02:14मैंने कंपनी की डारेक्टर से छोड़ दी है मैं फानेंसली कमजोड हूँ लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा सब टर्फियोज
02:24यानि सिर्फ एक चाल जिम्मेदारी से बचने का बहाना कोर्ट ने पाया पती कई कंपनियों से जुड़ा था आर्थिक रूप
02:33से शक्चम थ
02:36मैं पती का ये तर्क भी वो खुद पड़ी लिखी है खुद कमा सकती है कोट ने इसे भी सिरे
02:43से नकार दिया कोट ने कहा पत्नी का पड़ा लिखा होना पती को उसकी और बच्चों की जिम्मेदारी से मुक्त
02:50नहीं करता एक बहुत जरूरी बात है जो हर किसी को समझनी चाह
03:06भारत के संबिधान में है आर्टिकल 142 ये एक स्पेशल पाबर है जो सिर्फ सुप्रिम कोट के पास होती है
03:14इसके तहत अगर कोई मामला इतना उल्जा हुआ हो इतना कंप्लेक्स हो कि आम कानूनों से पूरा इंसाफ ना हो
03:23सके तो सुप्रिम कोट खुद अपने विवेक से क
03:27कोई भी जरूरी आदेश दे सकता है और इसी आर्टिकल 142 का इस्तिमाल करते हुए जस्टिस बिक्रमनात और जस्टिस संधी
03:36मेहता की बैंच ने एक जटके में तीन बड़े फैसले सुनाये फैसला के था पहला साधी खत यानि रिस्ता इतनी
03:45गहराई से टूट चुका है कि �
03:46इसे जोडने का कोई अर्थ ने दूसरा रुपे पांच करों पर्मानेंट एलिमानी यह रकम पत्नी को पास्ट मेंटिनेस फ्यूचर मेंटिनेस
03:57बच्चों की परवरिश और पढ़ाई और दस साल की लीगल लडाई के खर्च सब मिला कर दी जाएगी फुल एंड
04:05फाइनल से
04:08सबसे बड़ा 80 से ज्यादा सारे केस एक साथ एक आदेश से ख़त साथी पत्नी को देना होगा एक रिटिन
04:16अंडर्टेकन की वो आगे से पत्नी उसके परवार या उसके वकीलों के खिलाप कोई भी केस नहीं करेगा और एगर
04:23ऐसा किया तो सक्त कारवाई होगा अब बच्च
04:38या नि बच्चों से मिलने का हथ बना रहेगा लेकिन परवरिस की जिम्मेदारी मा की इस फैसले का बड़ा संदेश
04:46क्या है बाकर इस फैसले ने दिया क्या एक अगर साधी सच में तूट चुकी हो अगर रिष्टे में कुछ
04:55बचा ना हो तो उसे सालों तक अदालत में घसी
04:59इतना न्याय नहीं अत्याचार है दो कानून एक ताकत है लेकिन अगर कोई उस ताकत का इस्तेमाल किसी को परिसान
05:06करने ठकाने डराने के लिए करे तो सुप्रीम कोड हश्चिप करेगा और ऐसा सीधा फैसला दे सकता है और तीन
05:16पतनी का काबिल और पड़ा लिखा होना पत
05:28से दस साल तक अदालतों में भठकती रही असी से ज्यादा केस दो बच्चे और अंगनिव जक्म आज सुप्रीम कोड
05:36में इस महाभारत को खत्म कर दिया एक एक सवाल छोड़ गया क्या हमारे देश में कानून के दुरिपोग को
05:44रोकने के लिए और सक्त कदम उठाने के जर�
05:50अगर यह वीडियो आपको इंफॉर्मेटिव लगी हो तो लाइक करें शेयर करें और अगर अभी तक आपने सब्सक्राइब नहीं किया
05:59है तो अभी कर लिजिए वन इंडिया है ना हो शिबेंगो मिलते हैं अगली ख़बर में धन्नबाद
06:08अभिए ऑ्याने स्थक्त करें हो जडियो sound चうडबर में वजडरों किया है ऑ्रो सब्सक्राइब हो
06:15तूल WHY करें लेगरों कारें वीड एक और लाइक को डिजग RICH के बाहले सब्सक्राइब हें वालिटाएब करें?
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