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सुप्रीम कोर्ट ने 9 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक फैसले में एक वकील पति के 80 से ज़्यादा केस एक साथ खत्म किए और पत्नी को ₹5 करोड़ permanent alimony दिलाई। Justice Vikram Nath और Justice Sandeep Mehta की bench ने Article 142 का इस्तेमाल करते हुए इस "matrimonial battle of Mahabharata" को हमेशा के लिए बंद किया।

2010 में हुई इस शादी के बाद 2016 में अलगाव हुआ। वकील पति ने अपनी legal knowledge का दुरुपयोग करते हुए पत्नी, उसके परिवार और उसके वकीलों तक पर केस दर्ज किए। Supreme Court ने इसे "vindictive litigation" करार दिया और Article 142 के तहत तलाक मंज़ूर करते हुए दो बेटों की custody माँ को सौंपी।

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Chapters (Timestamps):

00:00 — Introduction
00:45 — शादी कब और कैसे हुई?
01:30 — वकील पति ने क्या किया?
02:30 — 80 केस की पूरी कहानी
03:15 — Article 142 क्या है?
04:00 — Supreme Court का फैसला
05:00 — बड़ा संदेश क्या है?

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~HT.410~PR.548~ED.520~GR.510~

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Transcript
00:10सोचिए एक साधी दो इंसान और असी से ज़्यादा कोड़ केस इतना लंबा इतना कड़वा कि खुच सुप्रीम कोड़ को
00:19कहना पड़ा ये तलाक का मामला नहीं यह महभारत बन गया है
00:27आज की कहानी एक ऐसे मामले की है जिसमें पती खुद बकील था लेकिन उसने कानून को नयायक लिए नहीं
00:35बलकि अपनी पतनी को तोड़ने के लिए इस्तिमाल किया
00:38और जब ये मामला सुप्रीम कोड पहुचा तो जो फैसला आया वो सिर्फ एक तलाक का फैसला नहीं था
00:44वो था कानून के दुरप्योग पर एक करारा जबाब
00:48शुरुआत कहां से हुई साल था 2010 मुंबई में एक जोड़े की साधी हुई पती पेशे से बकील पत्मी पढ़ी
00:58लिखी खुद भी कपिम
00:59शुरुआत में कुछ साल ठीक ठाक गुजरे दो बेटे हुए लेकिन 2016 आते आते रिस्ते में इतनी दरार आ गई
01:07कि दोनों अलग हो गए
01:09और फिर शुरू हुई एक ऐसी लड़ाई जो अगले 10 साल तक नहीं रुकी बकील पती ने क्या किया
01:17अब यहां असली मोड़ाता है आम तोर पर तलाक के मामले में एक दो केस होते हैं
01:23फैमली कोर्ड पर तलाक की अरजी मेंटिनेंस का मामला पच्चों की कस्टडी लेकिन इस पती ने क्या किया
01:30उसने अपनी लीगल नॉलिज का इस्तिमाल किया और ठोक दिये 80 से ज्यादा केस पत्नी पर पत्नी के परवार पर
01:37और सुरी पत्नी के वकीलों पर भी
01:40अकेले वकीलों के खिलाप नौकेस मकसद क्या था नयाय पाना नहीं बल्खी सामने वाले को इतना ठका दो इतना परिशान
01:50कर दो कि वो खुद हार मान ले
01:53सुप्रीम कोर्ट ने इसे कहा विंडिक्टिव लिटिगेशन यानि बदले की भावना से की गई कानों लड़ाई पैसो अखे कितना ही
02:04नहीं जब मेंटिनेंस यानि गुजारा भत्ते की बात आई पत्नी और बच्चों के लिए तो पत्ही ने कहा मेरे पास
02:12पैसे नहीं है मै
02:14मैंने कंपनी की डारेक्टर से छोड़ दी है मैं फानेंसली कमजोड हूँ लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा सब टर्फियोज
02:24यानि सिर्फ एक चाल जिम्मेदारी से बचने का बहाना कोर्ट ने पाया पती कई कंपनियों से जुड़ा था आर्थिक रूप
02:33से शक्चम थ
02:36मैं पती का ये तर्क भी वो खुद पड़ी लिखी है खुद कमा सकती है कोट ने इसे भी सिरे
02:43से नकार दिया कोट ने कहा पत्नी का पड़ा लिखा होना पती को उसकी और बच्चों की जिम्मेदारी से मुक्त
02:50नहीं करता एक बहुत जरूरी बात है जो हर किसी को समझनी चाह
03:06भारत के संबिधान में है आर्टिकल 142 ये एक स्पेशल पाबर है जो सिर्फ सुप्रिम कोट के पास होती है
03:14इसके तहत अगर कोई मामला इतना उल्जा हुआ हो इतना कंप्लेक्स हो कि आम कानूनों से पूरा इंसाफ ना हो
03:23सके तो सुप्रिम कोट खुद अपने विवेक से क
03:27कोई भी जरूरी आदेश दे सकता है और इसी आर्टिकल 142 का इस्तिमाल करते हुए जस्टिस बिक्रमनात और जस्टिस संधी
03:36मेहता की बैंच ने एक जटके में तीन बड़े फैसले सुनाये फैसला के था पहला साधी खत यानि रिस्ता इतनी
03:45गहराई से टूट चुका है कि �
03:46इसे जोडने का कोई अर्थ ने दूसरा रुपे पांच करों पर्मानेंट एलिमानी यह रकम पत्नी को पास्ट मेंटिनेस फ्यूचर मेंटिनेस
03:57बच्चों की परवरिश और पढ़ाई और दस साल की लीगल लडाई के खर्च सब मिला कर दी जाएगी फुल एंड
04:05फाइनल से
04:08सबसे बड़ा 80 से ज्यादा सारे केस एक साथ एक आदेश से ख़त साथी पत्नी को देना होगा एक रिटिन
04:16अंडर्टेकन की वो आगे से पत्नी उसके परवार या उसके वकीलों के खिलाप कोई भी केस नहीं करेगा और एगर
04:23ऐसा किया तो सक्त कारवाई होगा अब बच्च
04:38या नि बच्चों से मिलने का हथ बना रहेगा लेकिन परवरिस की जिम्मेदारी मा की इस फैसले का बड़ा संदेश
04:46क्या है बाकर इस फैसले ने दिया क्या एक अगर साधी सच में तूट चुकी हो अगर रिष्टे में कुछ
04:55बचा ना हो तो उसे सालों तक अदालत में घसी
04:59इतना न्याय नहीं अत्याचार है दो कानून एक ताकत है लेकिन अगर कोई उस ताकत का इस्तेमाल किसी को परिसान
05:06करने ठकाने डराने के लिए करे तो सुप्रीम कोड हश्चिप करेगा और ऐसा सीधा फैसला दे सकता है और तीन
05:16पतनी का काबिल और पड़ा लिखा होना पत
05:28से दस साल तक अदालतों में भठकती रही असी से ज्यादा केस दो बच्चे और अंगनिव जक्म आज सुप्रीम कोड
05:36में इस महाभारत को खत्म कर दिया एक एक सवाल छोड़ गया क्या हमारे देश में कानून के दुरिपोग को
05:44रोकने के लिए और सक्त कदम उठाने के जर�
05:50अगर यह वीडियो आपको इंफॉर्मेटिव लगी हो तो लाइक करें शेयर करें और अगर अभी तक आपने सब्सक्राइब नहीं किया
05:59है तो अभी कर लिजिए वन इंडिया है ना हो शिबेंगो मिलते हैं अगली ख़बर में धन्नबाद
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