00:16यह हमारे ही देश की दो विडियोज हैं लेकिन दोनों का केंद्र दूध ही है
00:22एक तरफ भारत के बविश्य के साथ भारत के बच्चों के साथ खिलवाड होता दिख रहा है और दूसरी तरफ
00:29भारत की परंपरा है
00:30एक तरफ बच्चे हैं और दूसरी तरफ भक्ती है लेकिन जब इन दोनों के बीच का कॉंट्रास्ट आप देखेंगे तो
00:38ये सवाल उठेगा दर्शकों कि क्या हम सही दिशा में जा रहे हैं
00:43शुरुवात करते हैं इस पहली वीडियो से ये पहली तस्वीर जो आप देख रहे हैं ये उत्तर प्रदेश के महोबा
00:49डिस्ट्रिक की है और ये वीडियो 13 फरवरी 2026 के एक गवर्मेंट स्कूल की मिड़े लिलकी है
00:56कैमरा में जो दिख रहा है वो सिर्फ वीडियो नहीं है बलकि सिस्टम की सक्चाई है एक बाल्टी पानी ली
01:02जाती है और उसमें सिर्फ एक लीटर दूद मिलाया जा रहा है जी हां दर्शकों सिर्फ एक लीटर दूद और
01:09फिर क्लास के बच्चों को वो पिला दिया जाता ह
01:11सोचिए दर्शकों जहां बच्चों को पोशन मिलना चाहिए वहाँ उन्हें मिल रहा है मिलावटी दूद और उसमें भी इतनी मिलावट
01:19कि सिरफ एक लिटर दूद में ही पानी घोल के बच्चों को पिला दिया
01:23ये वही मिड़े मिल स्कीम है जिसका मकसद था बच्चों को हेल्दी बनाना उन्हें स्कूल भेजने के लिए प्रोच साहन
01:30देना और उनका फ्यूचर सिक्यूर करना लेकिन यहाँ फ्यूचर को डायूट किया जा रहा है देश के भविश्य की साथ
01:38ही मिलावट की जा रही है ल
01:51हजारों लोगों की बीड आपको नजर आ रही होगी लेकिन यहां हुआ क्या दर्शकों 11,000 लीटर दूद सीधा नर्मदारिवर
01:59ने बहा दिया है जी हां 11,000 लीटर दूद वहीं यह सवाल के दर्शकों एक तरफ बच्चे हैं जिने
02:08एक गलास दूद भी नसीब नहीं हो रह
02:10है और इसी देश में उत्तर प्रदेश से सरफ मध्या प्रदेश तक आप आईए दूसरी तरफ हजारों लीटर दूद बिना
02:17सोचे समझे बहा दिया जा रहा है एक वीडियो में दूद की एक एक बूंद के लिए मजबूरी है आम
02:24बच्चों के पास पीने को दूद नहीं है
02:27और दूसरी वीडियो में दूद का समुंदर बेकार जा रहा है दर्शकों एक वीडियो में दूद पानी ही बन गया
02:34है और दूसरे वीडियो में असली 11,000 लीटर दूद पानी ने पहा दिया गया है अब ऐसे में कई
02:41लोगों की बात सामने आती है कि हमारी अपनी आस्था है
02:44लेकिन फिर भी समाच पे ये सवाल तो है दर्शकों कि जब आम लोगों के पास जब गरीब बच्चों के
02:51पास ही दूद नहीं है
02:53तब क्या आस्था इस प्रकार से निभाने चाहिए
02:56सवाल ये भी है दर्शकों कि यहां गलती किसकी है
03:00यहाँ कोई सही और गलत है भी के नहीं, क्या ये हमारी priorities की गलती है, blame किसे किया जाए,
03:07क्या भक्ती के नाम पर इतनी बड़ी बरबादी justify की जा सकती है, और क्या system की law परवाही को
03:14normal माना जा सकता है, चाहें तो system को blame कर सकते हैं, कि भाईया midday meal scheme में बच्चों
03:20को दूद क्यों न
03:26रहा है, दर्शकों ये सरफ दूद की कहानी नहीं है, ये एक तेश के सोच की कहानी है, जो इस
03:32वीडियो में मैंने आपके सामने रखने की सरफ एक कोशिश की है, एक बच्चा जब उस diluted दूद को पीता
03:37होगा, तो उसे ये नहीं पता होगा, कि उसके हक का दूद शायद कही
03:42ही बहा दिया गया, लेकिन हमें पता है, और जब हमें पता है, तो चुप रहना भी जिम्मेदारी से भागना
03:49ही है दर्शकों, आपको क्या लगता है, आपकी क्या राए है, हमें कॉमें सेक्षन में बताईएगा, लेकिन आज फैसला आपको
03:55करtó है कि हम ऐसे ही दो अलग-अल
04:11अबवारग चैनीजर ढूंटर का करते दिए हैं
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