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  • 2 days ago
पूज्य निरुमा के विचारों के अनुसार, सच्ची खुशी और सांसारिक सुख के बीच का अंतर बहुत ही गहरा है। आपने जो साझा किया है, वह अध्यात्म का एक बहुत ही सुंदर सार है।

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Transcript
00:14अपनी अपनी खुद की है
00:19थोड़ी सी मन की शांती हो
00:21मन की हलचल मेट जाए
00:24तो लगता है कि बहुत सुखा गया
00:26कुछ अंदर से आत्मा का ही सुखा गया
00:29ऐसा भी हो सकता है
00:33लेकिन रियल में वो आत्मा का सुख नहीं है
00:36मन की मस्ती है
00:37मन की मस्ती और आत्मा की सुख दोनों में बहुत पर्क है
00:46मन की मस्ती अच्छानक दूद उबर जाता है
00:49फिर बैट जाता है
00:52ऐसी रहती है
00:55इमोशनल पना रहता है
00:58मन की मस्ती में इमोशनल रहता है
01:02और आतमा के सुख में निराक उलता रहती है
01:07अंदर बिलकुल हल्चन नहीं रहती है
01:09बुकतना नहीं रहता है
01:12शानती रहती है
01:14निराक उलता जिसका आक उलता वेक उलता नहीं उसे निराक उलता
01:17निराकुल्त ये बहुत उची दशा कही जाती है
01:25मोक्ष की
01:27यहां से ही
01:29शुरुआत होती है
01:31वीजा मिल जाता है
01:33निरंतर निराकुल्ता
01:35अंतर दाप ये नहीं रहता है
01:40बाकिये संसारिक सुथ
01:42तुम अपनी अपनी मानिता कही साब से है
01:46जिस चीज में आपने
01:49कल्पना के
01:49कि इसमें सुख है तो आपको सुख लगेगा
01:54चम-चम में सुख है तो आपको
01:55चम-चम में सुख लगेगा
01:58और हमको कोई कहें के
02:00चम-चम लिए आपको बहुत पसंद दे
02:01हम कहते हम को इसमें सुख ने लगता है
02:06कि एक जबागा, थकी है। थोड़ा से खाते हैं, प्रेम से देते हैं, तो
02:13लेकिन हमारी मन्यता में उसमें सुख नहीं है
02:15है और राकिसी और के मman्यता में सुखे है एढ कि उसमें सुख आएगा
02:23और यह भी बदल सकता है, आज हमको नहीं अच्छा लगता है
02:26तो कल अच्छा भी लगे,
02:28धो Stop changing है.
02:30यह सब रिलेटिव सुख है,
02:32कालपुनिक सुख है,
02:33रिल नहीं है.
02:35रिल सुख एक बार आता है,
02:39तब गी जाता नहीं है.
02:42जो वो शुक आने के बाद चले जाता है, उसे रिल सुक नहीं कहा जाता है।
02:53वो रिलेटिव सुक है, कालपनिक सुक है।
03:00सच्छा सुक नहीं है।
03:03सच्छा सुक तो अपने अंदर है।
03:07अपने ही आत्मा को पच्छानने के आत्मा का सुभावी है, आनन्द, पर्मानद
03:13एक बार वो अनुभ में आता है कि मैं यह आत्म सुरूप हूँ।
03:18शरीर नहीं, मन नहीं।
03:21फिर उसका, वो सुक का अनुभ होने लगता है।
03:25दोनों सुक में दिमार्केशन रहती है।
03:39और इसी सुख, हर किसी को तो सुखी चाहिए और किसी दुख चाहिए।
03:43लेकिन सुख की व्याक्या मालूम ने इसलिए
03:47लोगों ने बताए हुए सुख की व्याक्या के पीछे दौरता है।
03:51कोई कहता है कि पैसे में सुख है तो पैसे के पीछे दौरता है।
03:54कोई करते हैं पढ़ाई में सुख है तो उसके पीछे दोड़ता है, कोई कहता है कि अच्छी गाड़िया लेने में
04:01तो उसके पीछे करो, घर बार पत्नी बचें, इसमें सुख है तो उसके पीछे पता है, लेकिन यह सुख रियल
04:14नहीं है, रिलेटिव है, कालपनिक है, अगर �
04:22हम आरोप करते हैं कि इसमें सुख है तो सुख मिलता है
04:26रिलेटिव सुख है जो सुख आके चले जाता है
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