00:14अपनी अपनी खुद की है
00:19थोड़ी सी मन की शांती हो
00:21मन की हलचल मेट जाए
00:24तो लगता है कि बहुत सुखा गया
00:26कुछ अंदर से आत्मा का ही सुखा गया
00:29ऐसा भी हो सकता है
00:33लेकिन रियल में वो आत्मा का सुख नहीं है
00:36मन की मस्ती है
00:37मन की मस्ती और आत्मा की सुख दोनों में बहुत पर्क है
00:46मन की मस्ती अच्छानक दूद उबर जाता है
00:49फिर बैट जाता है
00:52ऐसी रहती है
00:55इमोशनल पना रहता है
00:58मन की मस्ती में इमोशनल रहता है
01:02और आतमा के सुख में निराक उलता रहती है
01:07अंदर बिलकुल हल्चन नहीं रहती है
01:09बुकतना नहीं रहता है
01:12शानती रहती है
01:14निराक उलता जिसका आक उलता वेक उलता नहीं उसे निराक उलता
01:17निराकुल्त ये बहुत उची दशा कही जाती है
01:25मोक्ष की
01:27यहां से ही
01:29शुरुआत होती है
01:31वीजा मिल जाता है
01:33निरंतर निराकुल्ता
01:35अंतर दाप ये नहीं रहता है
01:40बाकिये संसारिक सुथ
01:42तुम अपनी अपनी मानिता कही साब से है
01:46जिस चीज में आपने
01:49कल्पना के
01:49कि इसमें सुख है तो आपको सुख लगेगा
01:54चम-चम में सुख है तो आपको
01:55चम-चम में सुख लगेगा
01:58और हमको कोई कहें के
02:00चम-चम लिए आपको बहुत पसंद दे
02:01हम कहते हम को इसमें सुख ने लगता है
02:06कि एक जबागा, थकी है। थोड़ा से खाते हैं, प्रेम से देते हैं, तो
02:13लेकिन हमारी मन्यता में उसमें सुख नहीं है
02:15है और राकिसी और के मman्यता में सुखे है एढ कि उसमें सुख आएगा
02:23और यह भी बदल सकता है, आज हमको नहीं अच्छा लगता है
02:26तो कल अच्छा भी लगे,
02:28धो Stop changing है.
02:30यह सब रिलेटिव सुख है,
02:32कालपुनिक सुख है,
02:33रिल नहीं है.
02:35रिल सुख एक बार आता है,
02:39तब गी जाता नहीं है.
02:42जो वो शुक आने के बाद चले जाता है, उसे रिल सुक नहीं कहा जाता है।
02:53वो रिलेटिव सुक है, कालपनिक सुक है।
03:00सच्छा सुक नहीं है।
03:03सच्छा सुक तो अपने अंदर है।
03:07अपने ही आत्मा को पच्छानने के आत्मा का सुभावी है, आनन्द, पर्मानद
03:13एक बार वो अनुभ में आता है कि मैं यह आत्म सुरूप हूँ।
03:18शरीर नहीं, मन नहीं।
03:21फिर उसका, वो सुक का अनुभ होने लगता है।
03:25दोनों सुक में दिमार्केशन रहती है।
03:39और इसी सुख, हर किसी को तो सुखी चाहिए और किसी दुख चाहिए।
03:43लेकिन सुख की व्याक्या मालूम ने इसलिए
03:47लोगों ने बताए हुए सुख की व्याक्या के पीछे दौरता है।
03:51कोई कहता है कि पैसे में सुख है तो पैसे के पीछे दौरता है।
03:54कोई करते हैं पढ़ाई में सुख है तो उसके पीछे दोड़ता है, कोई कहता है कि अच्छी गाड़िया लेने में
04:01तो उसके पीछे करो, घर बार पत्नी बचें, इसमें सुख है तो उसके पीछे पता है, लेकिन यह सुख रियल
04:14नहीं है, रिलेटिव है, कालपनिक है, अगर �
04:22हम आरोप करते हैं कि इसमें सुख है तो सुख मिलता है
04:26रिलेटिव सुख है जो सुख आके चले जाता है
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