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00:00मर्ध जाती से नफरत सी हो गई है
00:02और मैंने यह नहीं, मैंने बहुत कुछ देखा
00:04सारी पहन कर देखा,
00:06जीन स्टॉप पहन कर के देखा,
00:08बसते पहन कर भी देखे मैं
00:09मर्ध का अंजरिया बदलता ही नहीं है
00:12मुझे कहा जाता है कि तुम अपनी नजरे जोका लिया करो, अंदेखा कर लिया करो, मुझे सच के लिए लड़ाई
00:18लड़ना है तो मुझे अब अकेले ही चलना पड़ेगा, कि अब एक घर था, एक लड़की के लिए तो घड़ी
00:23होते है, पड़ी बारी होते है, उसका ब्यक अ
00:32वह है ही नहीं, क्योंकि मामे ने सच बोल दिया
00:55ऐसे जोश दिखाने से नहीं हो गए
00:57जो चीज आप नहीं देख पा रहे हैं, वो यह है कि
01:02ऐसी अगनी जो किसी प्रकार का बंधन बरदाश्त नहीं करती
01:06वो अगनी हर महिला में है
01:07और वो जला भी देगी
01:09जब बंधनों को अभूशन मान लिया गया हो
01:11तो अगनी होते हुए भी बेसर हो जाती है
01:14जजबी की कमी नहीं है
01:15और वो जजबा जला देना चाहता है
01:17अपने हर दुश्मन को
01:19दिक्कत यह है कि दुश्मन की पहचानी नहीं हो पा रही
01:23ओ प्यारी भावियों
01:25ओ नटकट बहनों सिंगार दान को छुटी दे दो
01:28आइने से कहो कुछ देर अपना अकेला पन घूरता रहे
01:31कंगी को जड़े हुए बालों की याद में गुनगुनाने दो
01:35रिबन को फेक दो अलगनी पर
01:37ये चोटी करने का वक्त नहीं और ना बाजार का
01:40बालों को एट कर जुड़ा बांध लो
01:42और सब की सब मेरे पास आओ
01:44देखो मैं एक नई और ताजा खबर के साथ
01:47घर की दहलीज पर खड़ा हूँ
01:49जैसा मैंने पहले कहा है
01:51बीस सेबो की मिठास से भरा यौवन
01:54जब भी फटता है
01:55तो न सिर्फ टैंक तूटता है
01:58बलकि खून के छीटे जहां-जहां पड़ते है
02:00बंजर धर्ती पर आजादी के कल्ले फूटते है
02:04और ओ प्यारी लड़की
02:06कल तु जहां आतिश के अनार की तरह फूटकर बिखर गई है
02:11ठीक वहीं से हम आजादी की वर्षगांट का जशन शुरू करते है
02:20ताली तो बजाली आप बताईए
02:21आपको कब समर्पित होगी यह कवित्र
02:27अचारी जी नमस्ते
02:32मैं बहुत शुक्र गजार हूँ आपकी
02:36आप ऐसम आए ऐसा लगता है मुझे नया जनम मिला
02:41पहले भी आए
02:43पर मैं पहली बार मिल रही हूँ आपसे
02:46तो मुझे ऐसा लग रहा है मेरा नया जनम हुआ है
02:50शोशन जो शब्द है
02:54वो मेरे साथ
02:56बच्पन से होते आया है
03:04घर वालों से शुरू करते हूँ
03:06घर वाले ही थे
03:08पहला शोशन जो ता घर वाले ही थे
03:14तो अब
03:15चाहे वो मौसा हो, मामा हो, ताओ हो, चाचा हो या भहिया
03:25तो अब मुझे
03:27उसके बाद से
03:30मर्द जाती से नफड़त सी हो गई है
03:34अब छोटा लड़का भी हो तो भी मैं
03:38मतलब नजर मिला के बात नहीं कर पाती हूँ
03:40मानी ही होता है मेरा
03:41क्योंकि मुझे लगता है कि ये भी बढ़ा हो करके वही
03:44मानसिक्ता जो है, यही है
03:49यही है
03:50रास्ते पर बाहर निकलू तो
03:53मतलब अभी ही जो ही मानसिक्ता
03:55कोई बोलता ही नहीं, मैं बहुत सारी लड़कियों को भी देखती हूँ
03:57बस दो ही काम करते हैं
03:59इग्नॉर और अवोइट करते है
04:01सुन करके वो चली जाती है
04:03और मैं उस जगा रहती हूँ
04:05मैं सुनती हूँ, मैं देखती हूँ
04:06मुझे इतना बुरा लगता है
04:08कि क्या बोलू, वो बिचारी वो भी चली जाती है
04:11कुछ बोलती नहीं है
04:12और मैं वो जो सुनती हूँ
04:16मैं इस इंसान के चैरे पर देख करके
04:19क्यों बोल रहा है
04:21क्या दिख गया
04:22और मैंने बहुत कुछ देखा
04:24सारी पहन कर देखा
04:27सलवार कमीज पहन कर देखा
04:29जीन स्टॉप पहन कर के देखा
04:30बस्ते पहन कर भी देखे मैं
04:34मर्द का नजर मतलब नजरिया बदलता ही नहीं है
04:39जिसके वज़े से मैं पैदल जा दे थी
04:41अपने काम के लिए
04:42कि मुझे स्कूटी लेना पड़ा कि मुझे ये लोग ना देखे वो जो बोलते रहते अशलील बाते वो ना बोले
04:53मुझे ही क्यों सुनाई देता और मैं ही क्यों रियक्ट करती हूँ
04:58और मैं रियक्ट करती हूँ तो मुझे बुड़ा बोला जाता है
05:03मुझे कहा जाता है कि तुम अपनी नजरे जुका लिया करो
05:07अंदेखा कर लिया करो
05:12तो घर का भी यही हाल है
05:14अब घर आपसे मिलने आई हूँ मैं तो बहुत दुअंद करके आई हूँ
05:18या कि साड़े साथ वेज़े का मैं ट्रेन था वो भी छुट गई है
05:23अब जाओंगी उसका भी एक दुअंद है
05:26ठीक है ठीक हरी तो करने दो बात
05:31तो उनसे तो घरवाले से तो लड़ाई मेरी चली रही है
05:36उखास पसंद करते नहीं अब मुझे
05:40क्योंकि मैं आपकी बाते बोलती हूँ आपको मानती हूँ
05:43सच बोलती हूँ
05:45तो अब पहले मैं नहीं बोलती थी तो बहुत प्रेम था मेरी बेटी है
05:49मेरी बहन है मेरी दीदी है
05:52अब वो सारे रिष्टे नहीं है
05:55अब मानते ही नहीं है
05:58अब बोलती कि तुम गलत हो
06:06अब मेरा कोई रास्ता ही नहीं है
06:08या तो मुझे अब घर छोड़ना पड़ेगा
06:11मुझे सच के लिए लड़ाई लड़ना है
06:12तो मुझे अब अकेले ही चलना पड़ेगा
06:15एक घर था एक लड़की के लिए
06:17तो घड़ी होते है पड़िवारी होते है
06:18उसका वैक अप हो है ही नहीं
06:20क्योंकि वा मैंने सच बोल दिया
06:25आजाद हो ना बाप
06:28दुखी क्यों हो रहे हो
06:30अच्छा है दिख गया सब जल्दी दिख गया
06:34पर मुझे समाज में जो ये लोग इस तरह से देखते हैं
06:37मुझे ये हमेशा के लिए खतम करता है
06:39मुझे चाहिए नहीं
06:40मुझे एक ऐसा देश चाहिए
06:41ऐसा जगा चाहिए कि कोई कुछ ऐसा बोले ही नहीं
06:45एक भी मर्द नहीं
06:46कुछ बोले ही नहीं
06:47बस एक इंसान को इंसान की तरह ही देखे
06:49मुझे भी इंसान हर लड़की को इंसान की तरह ही देखे
06:51क्यों ऐसा
06:53क्यों देखते हैं वैसा
06:56क्या बात है
06:57हर जगा देख लिया मैंने
06:58चाहिए बड़े से बड़े ओफिस हो
07:02हर जगा
07:04सब इमानदारी बहुत अच्छी अच्छी बाते
07:07सब ही करते लिकिने
07:07बैक अफ दा माइंड मतलब उनलों का
07:09यह बात पॉइंट रहता है यह लड़कियों को लेकर के
07:12देखो
07:13दो चीजें होती हैं दोनों में
07:15अंतर करना पड़ता है
07:18आप क्या बदल सकते हो
07:19क्या नहीं बदल सकते
07:21और जो बदल सकते हो उसमें
07:23ततकाल क्या बदल सकते हो
07:25और क्या है जो कालसा पेक्छ
07:27जिसमें समय लगता है जिस चीज का सामना कर रहे हो ना पुरुशों के सेक्शूल व्यवहार का वो कम से
07:41कम डेड़ हजार साल के इतिहास की पैदाईश है और उसमें न जाने कितने कारक तत्तों जुड़े हुए हैं
07:55वो न रहे उसका काम गीता कारेकरम कर रहा है पर मुझे भी ऐसी कोई गलत फैमी नहीं है कि
08:05एक दिन में सफलता मिल जाएगी
08:07इतिहास की इतनी पुरानी धारा है इतने पुराने संसकार हैं मानसिक्ताएं हैं धारणाएं हैं
08:19भर्म के नाम पर इतना अधर्म लोकधर्म लोगों के दिमाग में डाल दिया गया है कि इस्त्री की एक विशेश
08:35च्छवी बन गई है
08:37और पुरुश इस्त्री की ओ उसी के अनुसार देखता है उसको पता भी नहीं होता हूँ उसने वैसा कब देखना
08:44शुरू कर दिया
08:45मैं उसको निर्दोश नहीं कह रहा हूँ ना उसका पक्ष ले रहा हूँ बस ये बता रहा हूँ कि ये
08:51सब पीछे की बड़ी लंबी धारा से आ रहा है
08:58सत्काल में इतनी करा जा सकता है कि स्वयम को इसके प्रति इम्यून कर दिया जाए
09:07जिसको जो बोलना है वो बोले वो स्वयम भी नहीं बोल रहा है वो बेहोश है
09:14उसको पता भी नहीं है कि उसके उपर कौन से शारिरेक, सामाजेक, एतिहासेक प्रभाव काम कर रहे हैं जिसके कारण
09:21वो अशालीन, रुग्ण, विक्रत, व्यवहार कर रहा है
09:28उसको छोड़ो, तो पहला काम तो यह है कि अपने आपको तकाल, इम्यून करो, यह काम इमीजियेटली हो सकता है
09:38दूसरा काम जिसमें थोड़ा समय लगता है, उसके बाद मैं आऊँगा कि तीसरा काम जिसमें लंबा समय लगता है
09:43जिसमें थोड़ा समय लगता है वो यह है कि आप अगर नहीं चाहते कि इस तरह के लोगों के बीच
09:50जीओ तो अपनी जगह बदल दो
09:54चूंकि पुरुशों का विवहार बहुत हद तक उनके इस्थान से परिवेश से संसकार से निर्धारित होता है
10:04तो इसलिए जो दूसरी जगह के पुरुश होते हैं उनका विवहार भी जाहिर है कि कुछ दूसरा होगा
10:13दूसरी जगहों पर जाओ ऐसी जगहों पर जाओ जहां पर पुरानी धारा अब उतनी बलवान नहीं है
10:23इस काम में थुड़ा समय लगेगा पर ये काम भी हो जाएगा
10:26फिर तीसरा काम है जो संस्था कर रही है वो ये है कि बिलकुल जड़ से सफाई कर दी जाए
10:34न इस्तरी वैसी रह जाए जैसी वो है
10:36न पुरुष वैसा रह जाए जैसा वो है
10:38और इस्तरी पुरुष का रिष्टा भी
10:42वैसा रोगी न रह जाए जैसा वो है
10:45उसमें समय लगेगा
10:48आर यह बात समझ में है
10:50और अपनी हालत पर शोब करने की जरूरत नहीं है
10:54अगर जीवन में कटू अनुभव हो गए है
10:58तो वो एक माइने में अच्छी बात है
11:00कि अब किसी गलत फहमी में नहीं रहोगे
11:05सबसे ज्यादा बुरी हालत तो उन लड़कियों की होती है
11:10जो 20-25 साल की होती है
11:11और अभी रोमेंटिक ख्यालों में जी रही होती है
11:14कि दुनिया बहुत अच्छी चगह है
11:16और दुनिया की विवस्थाएं, दुनिया की संस्थाएं
11:18दुनिया ने जो रस्मो रिवाज बना रखे है
11:20दुनिया ने मेरे लिए जो तैयारियां पहले से रखी हुई है
11:23दुनिया ने मेरे लिए जो स्क्रिप्ट तयार कर रखी हो बहुत अच्छी चीज़ है
11:28तुम्हारे लिए अच्छा है कि तुम अभी रो लिए
11:32जो अभी नहीं रोती ही उन्हें फिर उम्र भर रोना पड़ता है
11:36वो दुनिया की विवस्थाओं को खुदी स्विकार कर लेती हैं हसके और फिर उम्र भर तलपती है
11:42तुम्हें जो अनुभव हो गए एक तरह ऐसे शुक्रिया आदा करो उनका
11:47बोलो धन्यवाद कि दुनिया की असलियत मुझे जल्दी दिखा दी
11:52बच्पन से ही दिखा दी
11:54अब मैं फसूंगी नहीं यहाँ पर
11:56अब मैं निकल जाओंगी वहाँ जहाँ
12:00महौल बहतर हो
12:04तो मुझ में आ रही यह बाती है
12:06यह बहुत पुरानी कहानी है
12:09लंबा अफसाना है
12:14देखते नहीं हो अपनी परीक्षा में
12:16हम बहुत सारे पुराने गरंथों से आपको देते तो है
12:19शलोकी देखो यहाँ से तुम्हें समझ में आएगा
12:21कि पुरुष का इस्तरी के पते आचरण कहां से आ रहा है
12:24देते तो है
12:30इतना पुराना है
12:31हवाओं में फैल गया है
12:32जो चीज़ हवाओं में फैल जाती है
12:34वो बहुत ताकतवर हो जाती है
12:36क्योंकि अब उसका सुरोत पता नहीं चलता
12:40कोई चीज़ हवाओं में आ गई
12:41तो अब वो अपने सुरोत से आजाद हो गई
12:44अब वो हर तरफ है
12:46तुम्हें पता ही नहीं चलेगा वो आई कहां से
12:49उसी तरीके से
12:50जो रोगी संस्कृत है
12:52यह हवाओं में आ चुकी है हर तरफ है
12:54तुम्हें नहीं पता चलेगा कहां से आ रही है
12:56पर जब तुम इत्हास में जाते हो
12:58पुराने गरंथ खोजते हो
12:59पुरानी घटनाएं खोजते हो
13:01तो तुम्हें पता चल जाता है कि
13:02ये सब बीमारी शुरू कहां से हुई
13:05किसने शुरू करी सब जान जाते हो
13:09स्मृति और शुरुति का भेद
13:10तुम्हें दिखाई पड़ता है
13:14और उसके बाद तुम रोते हैं नहीं
13:16उसके बाद तुम कहते हो
13:18नालाए की किसी और ने शुरू की
13:20भुगतू मैं क्यों
13:21फिर रोगे नहीं फिर कहोगे
13:23ये सब चला आ रहा है बहुत पुराना
13:28एक एक विक्रत
13:30सेक्शुालिटी का गंदा नाला है
13:32जो बहरा है अब बहरा होगा
13:33तो बहरा होगा मैं उसमें डुपकी काई को मरूं
13:38हमारे देश में अभी भी
13:39खुले नालों
13:41की बड़ी विवस्था है
13:42यहां भी होंगे गुहाटी में भी
13:45लंबे चौडे खुले नाले बहरे होते हैं
13:48पर आवासी जगों के पास से ही.
13:50काला काला उसमें
13:52और खूब गंद उड़ रही होती है.
13:54तो आप क्या करोगे?
13:56सबसे पहला काम क्या करोगे?
14:00वहाँ घर नहीं बनाना है.
14:03यहाँ कोई है अशाग जो खुले गंदे नाले
14:06के पास plot खरीद के घर बनाना चाहता हो पहला गाम यह करो अच्छा है कि तुम्हें बच्पन में छीटे
14:11पड़े गए अच्छा है कि बच्पन में बद्बू से नहा गई अब कम से कम वहां घर नहीं बनाओगी बहुत
14:18सारी हैं जो वहां घर बनाने की तायरी में और बना चुक
14:35वो घर मुबारक हो जीने दो उनको वहां जीना है तो जिनको नालों में जीना है बहुत सारी life forms
14:48ऐसी होती हैं जो गंदी जगों पर ही मिलती हैं उन्हें जीने दो वहीं पर तुम्हें नहीं जीना तो सबसे
14:53पहले इस तरह हैं कि नालों से दूर जाओ दुनिया हर जगा एक �
14:57जैसी नहीं है बहतर लोग बहतर समाज भी मिलेंगे पुरुष भी हर जगा एक जैसे नहीं है बहतर पुरुष भी
15:03मिलेंगे महिलाएं भी हर जगा एक जैसी नहीं है और अब रही नाले की सफाई करने की बात तो उसके
15:16लिए जाडू लेकर के आप जाईए कहीं पर आराम से
15:21रही है वही है जाडू वाला काम हम कर रहे हैं जाडू वाले काम में हाथ बटाना हो बीच-बीच
15:27में तो आ जाना तर मुझे जर से खतम करना है मैं बरदाश नहीं कर पाती हो चीज ऐसे जोश
15:34दिखाने से नहीं होगा जोश आप इसलिए दिखा रहे है क्योंकि आपको लग र
15:51प्रेटना की स्मृति है कि ऐसा हुआ था मैं जा रही थी किसी एक पुरुष ने मेरे साथ ऐसा किया
15:56तो उसके प्रति आपके पास रोश है उसके विरुद्ध क्रोध है आहत है आप जो चीज़ आप नहीं देख पारे
16:05हैं वो यह है कि वो पुरुष अखेला नहीं है वो एक व
16:19विवस्था कोई बदलना पड़ेगा और वो विवस्था अपने मूल में लोकधार्मिक है वो विवस्था शारीरिक नहीं है यह मत समझना
16:26कि पुरुषों में इतना ज्यादा हॉर्मोनल उबाला गया है कि अल्ट्रा टेस्टोस्टेरोन उनमें चढ़ा हुआ है इसलिए वो
16:35पागल हो रहें सेक्शुली नहीं यह बात यह बात शारीरिक नहीं है यह बात लोकधार्मिक है लोकधर्म ने महिला को
16:45बिलकुल मास का टुकड़ा बना करके रखा है पुरुष के आगे और मुझे दुनिया का सबसे बड़ा जूबा लगता है
16:52जब महिलाएं लोकधर्म का �
16:54पालन करती हैं महिलाएं लोकधर्म की पक्षतर होती हैं जब महिलाएं अंधभक्ति करके बाबाओं के आगे नाश्ती दिखाई देती हैं
17:03सबसे यह यह जाती हैं बाबाओं के आगे
17:08जैसे बहुत सारी बकरियां जाके कसाई की दुकान पर गुड़गान कर रही हो
17:12जै कसाई देवा
17:16हम खुद आए हैं
17:20आपके चरण कहा है प्रभू
17:29प्रभू सर मैं कहीं भी जाती हूं घर से निकलती है
17:33कहीं भी नहीं है सब ऐसे भाई
17:35बहतर लोग भी हैं चिंता मत करो
17:40इतने disappointment ही कोई जरूरत नहीं है
17:45grades होती है binary नहीं होते
17:47जैसे है इससे कुछ बहतर कहीं मिलेगा
17:50उससे कुछ बहतर कहीं और मिलेगा
17:51कोई और मिलेगा
17:52तुम्हें कौन सा 800 करोड़ लोगे साथ जीना
17:54इतनी लंबी तो उमर ही नहीं है
17:5720-40 साल और जीना होगा
18:00वैसे जीने के लिए एक अच्छा समाज और अच्छी संगती मिल जाएगी
18:04बस गलत जगह पर स्वार्त के मारे टिके मत रहना
18:07नाले के इपास घर्मत बना लेना
18:10और सबसे आग्रह कर रहा हूँ
18:12आप मेरा इशारा समझ रहे है
18:15नाले के अंदर तो डूबना दूर की बात है
18:18नाले के पास भी घर्मत बना लेना
18:32अच्छारची प्राणाम
18:34मैं एक वीडियो देख रही थी
18:36जिसमें आपने बताया कि
18:40तनक लता बरुवाजी के बारे में
18:43जो कि यहीं से हैं असम से
18:45और वो सत्य साल की थी तब सहीद हो गई थी
18:49और आज जब मैं देखती हूँ
18:52महिलाओं को चाहे वो असम से हो या पूरे भारत से हो
18:56लेकिन उनकी अंदर वो जजवा ही नहीं होता है
18:59जो उनको सत्रे साल में मिल गया था
19:01आज इसके बारे में
19:08कि उस तरह का जजवा महिलाओं के अंदर क्यों नहीं है
19:12उस तरह की जो क्रांती कारी जो बिचार है या आजादी कम है तो नहीं समझ पा रही है तो
19:19इसके पीछे क्या कारण है इसके बारे में आप मार्ग दर्शन देजिए
19:24करने क्लता बरुआ उनके उपर गुलामी की जंजीर पढ़ी आप ही बता रही हैं कि उन्होंने जजबे के साथ जंजीर
19:35को आप कह रहे हैं आज की लड़कियों महिलाओं में जजबा क्यों नहीं होता है ना अब जैसे अब यहां
19:42पर महिलाएं बैठी है अभी ऐसे मेरी जेब म
19:45आपको पता है ना मैं महाशिव रात्री वाला हूँ साप वाप रखके चलता हूँ अभी यहां से निकाल कर अरे
19:53मजाक समझ रहो मैंने आज तक छुपा के रखा अपना
19:59अब यहां से साप निकाल कर फेकूं फिर देखिए अभी जजबा कैसे नहीं छा जाएगा उतना ही पैशन उठेगा जितना
20:11किसी क्रांतिकारी में उठता है बंधनों के विरुद्ध पैशन कहीं नहीं चला गया है बस स्वार्थ के लिए
20:21पैशन पूरा है स्वार्थ के लिए पैशन कहीं नहीं चला गया आपने प्रशन में भूल कर दी आप कह रहे
20:27हैं आज कल की लड़कियों में वो पैशन क्यों नहीं होता वो जजबा क्यों नहीं होता
20:32उनको किसी तरीके की शारिरिक, भौतिक, मानसिक हानी कर दो
20:38फिर देखो उनका पैशन
20:42फिर देखो
20:45पैशन कैसे चला जाएगा
20:48आत्मा की तुलना कई बार अगनी से की गई है
20:51अगनी
20:53ऐसी अगनी जो किसी प्रकार का बंधन बरदाश्ट नहीं करती
20:59वो अगनी हर महिला में है
21:04और वो जला भी देगी
21:06पर बंधनों की पहचान तो हो न
21:11जब बंधनों को आभूशन मान लिया गया हो
21:15तो अगनी होते हुए भी बेशर हो जाती है
21:24करने कलता इस मामले में शेष्ट नहीं थी
21:29क्यों उनमें कोई विशेष आग थी
21:33शेष्ट इस मामले में थी
21:35कि ये संसकारित नहीं थी
21:37करप्टेट नहीं थी
21:39जो चीज जैसी थी जस कितस उनको दिखाई देती थी
21:42वो जो बंधन तो बंधन है दिखरा है बंधन है
21:46और उस समय हम उमर और भी लड़किया रही होंगी
21:50वो क्या कर रहे गुड़े गुड़िया खेल खेल रही है
21:54उस समय का भारत
21:57सत्रा अठारा की उमर
21:59नजाने उनकी कितनी सख्यों सहलियों का तो ब्या हो गया होगा बच्चे हो गए उस उमर में
22:06वो विशेश इसलिए थी क्योंकि उनको दिख रहा था कि ये बंधन है सब कुछ
22:12और जिस आख से वो देख पा रही थी
22:17कि समाजिक रस्मों रिवाज और दुनिया की कहानिया ये बंधन है
22:21उसी आख से वो ये भी देख पा रही थी कि अंग्रेजी साशन भी बंधन है
22:29आख तो वही है न
22:33जो सामाजिक बंधन नहीं पहचान सकता
22:35जो धार्मिक बंधन नहीं पहचान सकता
22:37वो राजनैतिक बंधन कैसे पहचान लेगा
22:38पहचान लेगा तब नहीं आखा जाएगी
22:43आग सब में होती है
22:45आग सब में होती है
22:46वो धूमिल का वक्त वेया दिन अभी कुछ दिन पहले ही पढ़ा था मैंने
22:49कि ऐसा नहीं कि मैं ठंडा आदमी हूँ
22:51मेरे भीतर भी आ गए
22:52मगर वो कभी भभक कर बाहर नहीं आने पाती
22:55क्योंकि उसके चारो तरफ चक्कर काटता एक पूझी वादी दिमाग है
23:01स्वार्थ पूझी पूझी उनको यह नहीं आग रह था कि मैं सुन्दर बन जाओं
23:10आकर्शक बन जाओं तो कोई मोटी कमाई वाला लड़का मिल जाए
23:15तो मैं भी जीवन भर मज़े करूंगी उनको यह नहीं आग रह था
23:23स्वार्थों पे जब आज आ रही होती है
23:24हमारे भीतर भी पैशन उमड जाता है
23:26उमड पढ़ता है कि नहीं
23:31एक वीडियो था
23:32जिसमें गाउं की दो महिलाएं
23:33बस की एक सीट के पीछे
23:35इतना लड़ी इतना लड़ी
23:36कि एक को बस में ये अंदर जो खंबा होता
23:39उसने उसका सर ऐसे पकड़के मार दिया
23:40वो बहोश हो गई बस के अंदर
23:44पैशन तो पूरा है
23:45पर किस चीज के लिए है
23:48बस की सीट के लिए है
23:51बस की सीट के लिए पूरा पैशन है
23:54और दोनों एक दूसरे को
23:55दोनों के लंबे लंबे बाल
23:56दोन एक दूसरे को बाल पकड़ पकड़ के पकड़ पकड़ के ऐसे ऐसे जहमाट रही है
24:00एक को तो ऐसे उसने पूरे घ�ुमा करके मारा वो गई बस के खंबे में लगा अध्व
24:04वो बहोशी हो गई
24:08महिलाए ही है यह
24:09पहशन पूरा है पहशन की कमी नहीं है जजबे की कमी नहीं है
24:16और वो जजबा जला देना चाहता है अपने हर दुश्मन को
24:21दिक्कत यह है कि दुश्मन की पहचान ही नहीं हो पा रही
24:25वो बस वाली महिला को क्या लग रहा था दुश्मन कौन है
24:28इस बुपीर वो दूसरे महीला को दुश्मान वान रही तूसका सर फोड़ दिया
24:36कनकलता पहचान पाई दुश्मान कौन है
24:38आज की महीला पहचान ही नहीं पारी दुश्मान कौन है
24:41वो अपने दुश्मनों को
24:44अपना हम रास, हम सफर, हम विस्तर बनाए बैठी है
24:50तो अब क्या होना है, कुछ नहीं
24:54वो बड़े खुबसूर्ती से
24:57धुमिल काई फिर से वो वक्तब वे आ रहा है
24:58वो सीधे सीधे उन्होंने वो
25:00वो तो महिला के लिए ही लिखा है
25:02कि आतिश के अनार सी वो लड़की
25:03अगर कोई मुझे देगा तो पढ़ूंगा
25:05तो समझ में आएगा कि कनकलता बरुआ जैसी
25:07किस मिट्टी की बनती है
25:09कोई देगा, आतिश के अनार सी वो लड़की
25:12धुमिली कोई था, जल्दी दे दिया गरी
25:14जैसे ही बोलूं, खट-खट-खट
25:16या फोन बस बजने के लिए थे
25:28एक लड़की थी
25:30कोई इसका
25:35पयास ये लगाया जाता है कि शायद जो
25:39इरानी करांती हुई थी
25:42अभी भी एक इरानी करांती चल रही है
25:4347 साल पहले आज से भी इरानी करांती हुई थी
25:46तो उस समय
25:48पर एक लड़की इन्हें टैंक के आगे आकर
25:52के इरान में अपनी जान दी थी
25:53तो अनुमान लगा जाता है कि शायद उसके लिए लिखी है धूमिल नहीं
25:57लोग चकित थे ये देखकर कि एक नंगा गुलाब किस तरह लोहे के पहाड को अपनी मुठी में भीच रहा
26:04था
26:04लोहे का पहाड क्या?
26:06टैंक
26:06नंगा गुलाब क्या?
26:08वो लड़की थी
26:11और कोमल है, सुन्दर है, इसको नंगा गुलाब कह रहे हैं
26:15लोग चकित थे देखकर कि एक नंगा गुलाब किस तरह लोहे के पहाड को अपनी मुठी में भीच रहा था
26:20ठीक इस तरह होता है, जवानी जब फैसले लेती है, गुस्सा जब भी सही जुनून से उभरता है
26:27हम साहस के एक नए तेवर से परिचित होते हैं, तब हमें आग के लिए दूसरा नाम नहीं खोजना पड़ता
26:34है
26:36कनकलता जैसी ही किसी लड़की को समर्पित हैं ये पंक्तियां
26:41आगे सुनिये, और जितनी यहाँ भी महिलाएं हैं, सब सुने
26:46मुम्किन था वे अपने देश्वासियों की गरीबी से साड़े तीन हाथ अलग हटकर
26:58एक लड़की अपने प्रेमी का सिर छाती पर रखकर सो रहती देह के अंधेरे में
27:04वही जो ज़्यादातर लड़कियों की कामना होती है, लड़कों की भी होती है, पर अभी बात लड़कियों की हो रही
27:08है
27:10एक लड़की अपने प्रेमी का सिर छाती पर रखकर सो रहती देह के अंधेरे में
27:15अपनी समझ और अपने सपनों के बीच मैं उसे कुछ भी न कहता, सिर्फ कविता का दरौजा उसके लिए बंद
27:22रहता
27:23लगब यही बात मेरी उनके लिए जो गीता छोड़कर जाते है, मैं उन्हें कुछ नहीं कहता, बस गीता का दरौजा
27:32उनके लिए
27:32बंद रहता
27:35मैं उसे कुछ भी न कहता
27:37सिर्फ कविता का दर्वाजा उसके लिए
27:39बंद रहता लेकिन क्या समय भी
27:41उसे यूही छोड़ देता
27:42मैं तुम्हें कुछ नहीं कहूंगा लेकिन समय तुम्हें माफ नहीं करेगा
27:48लेकिन क्या समय भी
27:49उसे माने किसको
27:51उस लड़की की बात हो रही है
27:52लेकिन क्या समय भी उसे यूही छोड़ देता
27:55वह उसके चुम्बन के साथ
27:57बारूद से जले हुए गोश्ट का
27:59एक सड़ा हुआ टुकडा जोड़ देता
28:01और हवा में टांग देता उसके लिए
28:04एक असंसदी ये शब्द नीच
28:11समय
28:13समय के शब्द कोश में
28:16ऐसा वेवहार करने वालों के लिए
28:18एक ही शब्द होता है नीच
28:20चाहें वो लड़की हो के लड़का हो नीच
28:25जो कि अपनी व्यापक जिम्मेदारी
28:29से मुँ चुरा करके
28:32जो सच्चाई को पीठ दिखा करके
28:35क्या करते हैं
28:36पीछे अड़ जाते हैं
28:38सो रहते देह के अंधेरे में
28:39देह का अंधेरा माने
28:41सेक्सी नहीं होता
28:42सब आपकी जो विक्तिकत कामना हैं
28:44यह वो मेरी जिम्मेदारियां
28:46मुझे यह देखना है
28:47मुझे वो देखना है
28:48तो उनके लिए वक्त बस एक ही शब्द रखता है नीच
28:54और हवा में चांग देता
28:56उसके लिए एक असंसदी शब्द नीच
29:00मुम्किन यह भी था
29:03थोड़ी सी महंदी और एक अदद ओढ़नी का लोब
29:06यह थोड़ी सी महंदी और अदद ओढ़नी किसकी बात हो रही है
29:09शादी की
29:10मुम्किन यह भी था कि थोड़ी सी महंदी और एक अदद ओढ़नी का लोब लाल तिकोने के खिलाफ बोलता जिहाद
29:18लाल तिकोना किसका होता है
29:21अब आपने आज कल नहीं देखा होगा पहले चलता था
29:24वो फैमिली प्लानिंग का होता था
29:25कि ज्यादा बच्चे मत पैदा करो उसके लिए एक लाल तिकोर्ड बनाते थे
29:29मुम्किन यह भी था कि थोड़ी से महंदी और एक अदद ओढ़नी का लोब लाल तिकोने के खिलाफ बोलता जिहाद
29:35और अपने वैनिटी बैग में छोड़कर बच्चों की एक लंबी फेहरिस्त एक दिन चुपचाप कब्र में सो जाती हवा की
29:42इंकलावी अउलाद
29:45वैनिटी बैग बहुत सारे बच्चे दिखाई दे रहा है आम महिला का संसार सजो सवरो बच्चे पैदा करो
29:55लेकिन ऐसा हुआ नहीं और अब आप से क्या कहा जा रहा है वो ध्यान से सुनिए
30:01ओ प्यारी भावियों ओ नटकट बहनों सिंगार दान को छुट्टी दे दो
30:07आईने से कहो कुछ देर अपना अकेला पन घूरता रहे
30:11कंगी को जड़े हुए बालों की याद में गुनगुनाने दो
30:15रिबन को फेक दो अलगनी पर ये चोटी करने का वक्त नहीं और ना बाजार का
30:21बालों को एट कर जुडा बांध लो और सब की सब मेरे पास आओ
30:26देखो मैं एक नई और ताजा खबर के साथ घर की दहलीज पर खड़ाऊं
30:33जैसा मैंने पहले कहा है बीस सेबों की मिठास से भरा यौवन
30:37जब भी फटता है तो न सिर्फ टैंक तूटता है बलकि खून के छीटे जहां जहां पड़ते हैं
30:45बंजर धर्ती पर आजादी के कल्ले फूटते हैं और ओ प्यारी लड़की
30:50कल तूजहां आतिश के अनार की तरह फूटकर बिखर गई है ठीक वहीं से हम आजादी की वर्षगांट का जश्न
30:58शुरू करते हैं
31:03जैसे कनकलता बरुआ को ही समर पे थो सारी बात
31:15ताली तो बजाली आप बताईए आपको कब समर्पित होगी यह कविता
31:22उसके लिए प्रयास कर रहे है आचरे जी
31:30प्रड़ाम आचरे जी अचरे जी मेरा नम हर्ष है मैं आटी गुवाटी का चातर हूँ
31:34अचरे जी मेरा जो सवाल है वो मेरी कॉलेज लाइफ को देखकर निकला है
31:39अचरे जी आप महिलाओं के उपर आपने बहुत करेटी से बात करिये बार-बार
31:44मेरा पुरुषों को लेकर सवाल है
31:46हमारे समाज में उपरुषों के लेकर एक शवी बन गए कि मर्द को दर्भ नहीं होता वैसे करके
31:51तो इसके कारण से फिर होता ही है कि कोई वियाकर उनको प्रॉब्लम होगी तो खुल कर शेयर नहीं कर
31:57पाएगे
31:57और अपने दोस्त करीबी दोस्तों के साथ ही शेर नहीं कर पाएंगे
32:01और इसका मैं उधारान देना चाहता हूँ मेरे कॉलेज लाइफ से जस्त तीन-चार महीने पहले ही बात है
32:06मेरे जो दोस्त था वो उसको कुछ इंटरंशिफ वगरा के लेटेड प्रब्लम हो रहा था
32:10तो जब उसने शेर किया हम सब की बीच में हम सब जोर से हसे तो नहीं बट हमारे चारब
32:16ऐसी थी
32:16और यह जो प्रतिक्रा थी वो बहुत स्पॉंटीनिस थी मतलब बिना सोचे समझे से आ गई
32:22अब वो लड़का क्योंकि ड्रग अबीउस तो करता नहीं है तो वो इंस्टाग्राम में एडिक्ट हो गया बहुत ज़दा
32:27बहुत बहुत बहुत ज़द हो गया और ऐसा उन लोगों के साथ कोई लोग ऐसे होते जो ड्रग अबीउस में
32:34चले जाते हैं
32:34तो मतलब ऐसे हो क्यों रहा है आपने जब आप महिला पर बात करते तो आपने का था कि महिला
32:42के भावनात्मक होने को ग्लोरिफाइश लिए करते हैं क्योंकि उन्हें बंदन मनाया जाए
32:46तो क्या पुरुष के भावनात्मक नहूने को ग्लोरिफार करने का भी कोई उनको मंदिन मनाने रखने का मतलब उनको बंदी
32:54बनाये रखने का कोई कारण है या कुछ क्या है मतलब समाज जैसा क्यों छबी बनाया रखने जाता है क्या
33:00disruption हो जाएगा अगर यह सबी हट जाएगी
33:02तो उन्हें एक एक एक रोल दिया गया है और वो रोल है वारियर का प्रोवाइडर का उसी के सामने
33:23उसी के विपरीत तो महिला को रोल दिया जाएगा ना केर टेकर का
33:33जब तक तुम्हें कठोर नहीं बनाया जाएगा उसको कोमल आंगिनी कैसे बनाया जाएगा
33:43और जब कठोर कोमल से मिलता है तभी चिंगारियां उड़ती है
33:53तो एक स्क्रिप्ट रची गई है जिसके आधार में ही अंधेरा है
34:03जिसमें इस्त्री को उतना कोमल बना दिया जितनी कोमल वो है ही नहीं
34:09उतना भावुक बना दिया जितनी भावुक वो है ही नहीं
34:12इतनी भावुक प्राक्रतिक रूप से कोई नहीं होती इस्त्री
34:16जितना उसको कहानियों में, मिथकों में और संस्कृति में बना दिया गया है
34:22कि वो तो बस ममता की मूर्ति और उसके बास कुछ होते ही नहीं है
34:28और जब तुम स्त्री को अतिकोमल दिखाना चाते हो तो पुरुष को अतिकठोर भी दिखाना पड़ेगा
34:35पुरुष कैसा है?
34:38बिलकुल
34:40वज्जर जैसे बाहुदंड
34:43लोहे जैसी छाती
34:46और स्तिरी कैसी है?
34:49फूल जैसी सुकोमल
34:50ये कैरिकेचर्स हैं
34:53एक को लोहा, एक को फूल बना रहे हो
34:55क्या पागल बना है?
34:56हाँ अंतर होता है
34:59प्राक्रतिक शारिरिक अंतर होता है
35:01पर इतना भी बड़ा नहीं होता
35:02इतना बड़ा बना दिया
35:04मानसिक अंतर भी होता है
35:05पर उतना भी नहीं होता
35:07इतना बना दिया
35:08इस्तरी को तो बना दिया
35:10कि भावनाओं का पुतला है
35:11और पट से रोपड़ती है
35:12उसके पास बुद्धी तो ही नहीं बस भावना है
35:16पुरुष बहुत बहुत दुलार के साथ बोलते हैं
35:23क्या करे इस्तिरी का भावुक्चित या ऐसे क्या करे इस्तिरी की बुद्धी
35:29बुद्धी तो होती नहीं या होती भी है तो बुद्धी से तो काम करती नहीं
35:33इस्तरी है ना भावना पे चलती है
35:36तो इस्तरी को बना दो कि उसके बुद्धी है नहीं
35:39या बुद्धी थे काम नहीं करती है तो भावना पे चलती है
35:42और पुरुष को बना दो कि उसके भावना नहीं है
35:45वो तो बस तर्क पे चलता है
35:47और ये दोनों ही distortions है
35:52दोनों ही distortions है
35:53हाँ बिलकुल ऐसा है कि चूंकि
35:58बच्चा इस्तरी प्यादा करती है तो इसलिए
36:01उस समय पर कुछ hormones उसके पास विशेश होते हैं
36:06जो कि उसमें attachment का भाव प्यादा करते हैं
36:10लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वो कोई अलग प्रजाती हो गई
36:18हमज़ में आ रही है बात
36:22स्त्रियां वैज्ञानिक भी हुई है गणितग्य भी हुई है
36:27योद्धा भी हुई है
36:30लेकिन लोक संस्कृति ने उनको एक अलग स्पीशीज ही बना दिया है
36:35प्रजाती और उनको जितना उस अति पर रखना है
36:41पुरुष को फिर उतना ही विपरीत अति पर रखना पड़ेगा
36:48तुम जंगल में जाओ तो वहां नर और मादा में कोई बहुत अंतर थोड़ी कर पाओगे
36:55क्या तुम जानते हो कि शेरों में शिकार का ज्यादा तर काम कौन करता है
37:01शेरनी
37:03वो शेर बस अपनी ओदाड़ी बढ़ा ही घुमता रहता है
37:09वो बस फोटोग्राफी के और नेशनल जोग्रफिक के काम आता है
37:13असली शिकार करके नाले का काम शेरनीया करती है
37:16जुंड बना के जाती है और मार मूर के ले आती है चलो इखाओ
37:19फिर शेर आ जाता है अपना अज़र बड़ा हम हम है शेर
37:28प्रक्रति में कहीं भी नर और मादा के बीच
37:31उस तरह का विक्रत अंतर देखने को नहीं मिलता है
37:34जैसा है कि मानव में देखने को मिलता है
37:37होमो सेपियन्स अकेले हैं
37:39जिन्होंने भयानक जंडर डिस्टॉर्शन करा है
37:45माने कोई बाहरी किसी गरह से वेक्ते आए
37:51विशेशकर एक हिंदुस्तानी पुरुश और एक हिंदुस्तानी इस्त्री को देखे
37:54तो कहेगा ये स्पीशीज दो अलग-अलग है
37:57क्यां सब कुछ ही अलग है एक के बाल लंबे हैं एक के नहीं है
38:01एक ने बहुत सारा मूँ पे मेटल डाल रखा है
38:05कान पे, नाक पे, होट पे, सर पे
38:07दूसरे ने कोई मेटल नहीं डाल रखा
38:12एक ने तो बहुत सारा अपना होट भी रंगा हुआ है
38:15दूसरे ने तो नहीं रंगा हुआ है
38:16तो कहेगा ये स्पीशीज ही दूसरी है
38:17इनमें क्या कॉमन है? कुछ भी कॉमन नहीं है
38:21एक ने जिम जा जाके अपने को ऐसा चोड़ा कर लिया है
38:24और दूसरी अपना घर में पड़ी रहती है कुछ करती नहीं वो और ऐसी टिटेहरी हो गई है
38:29इन दोनों में समानता क्या है यह अलग अलग स्पीशीज है
38:32एक बाहर निकलता है सड़क पे नजर आता है
38:35एक कभी सड़क पे दिखती है नहीं हो घर में घुसी रहती है
38:39इन में कुछ भी कॉमन नहीं है
38:42एक के शरीर में मसल मास खूब है और दूसरे के शरीर में मसल मास एक दम कम है फैट
38:48ही फैट है
38:52एक बात करता है तो उसके लहजे में तरक प्रदानता रहती है
38:58और दूसरी बात करती है
38:59तो उसके फिर भाव ही भाव उमरते है
39:05एक गरजता है वो एक थर्राती है
39:09बोले ये दोनों सेम स्पीशीस कैसे हो सकते है
39:15ये प्रजाती है ये अलग-अलग है
39:18कोई बाहर का आएगा नो बोले गए प्रजाती
39:20ये विक्रती हमने पैदा करी है
39:22हमने इस्तरी पुरुष को प्रजाती अलग-अलग बना दिया
39:26ये वैसे जैसे इस्तरी को गरजना वर्जित है
39:30वैसे ही पुरुष को रोना वर्जित है
39:32पुरुष रोई तो उसको बोलो गए
39:33है चूडिया पहन गया गया
39:37अच्छा चूडियां अगर इतनी हे बात होती है
39:41कि चूडी गाली जैसी बात है
39:43तो यह सब महिलाओं को चूडी काई पहनाते रहते हो
39:45जो तुम्हारे लिए गाली है
39:47वो उसका अभूशन हो गया
39:48अगर उस अचमुच गाली है चूडी
39:50तो सबसे पहले उसकी चूड़ियां उतारो
39:55कोई पुरुश रो पड़े तो तुरंद बोलोगे
39:57यह ना सौफ्टी है थोड़ा
39:59यही सब नाम दियते हैं सौफ्टी है
40:06और महिला कड़क हो जाए तो बोलेंगे
40:08बड़ी मरदानी बन रही है
40:17दो अलग अलग प्रजातियां
40:26अब क्या करें
40:30देखो न जाकर के फिर कह रहा हूँ जंगल में
40:32नहीं पाओगे इतना अंतर
40:36नार और मादा के लहरी में ऐसे ही देख के अंतर बता सकते हो
40:41बता पाओगे
40:42नर और मादा साप में बता पाओगे
40:47बता पाओगे
40:51नर और मादा लंगूर में भी ना बता पाओ
40:55खरीर में कुछ अंतर दिख जाएगा
40:56व्यवहार में बहुत अंतर नहीं दिखेगा
41:00यहां तो व्यवहार में जबरदस्त अंतर है
41:02और ये अंतर प्राकृतिक नहीं है
41:05सामाजिक और सांस्कृतिक है
41:07और बहुत बहुत हानिकारख है विशैला है
41:12लेकिन अंतर जितना बढ़ा दोगे
41:15सेक्शूल फायर उतनी भबक के जलेगी
41:17बिकॉज ओपोजिट्स अट्रैक्ट
41:20और ये बात सुनने में कितनी घिनानी है
41:23कि काम वासना और भबक के जले
41:26इसके लिए दोनों को
41:29एकदम सेपरेट ऑपोजिट एंड्स बना दो
41:32कि पुरुश इस्तरी को देखे और कए आहाहा
41:34कितनी कॉमल है इसका सब कुछ कॉमल कॉमल
41:36और इस्तरी पुरुश को देखे कि आहाहा
41:38इस बिल्कुल स्टील जैसा कठोर है
41:39और दोनों में सेक्शूल अट्रैक्शन पैदा हो जाए
41:41ये कितनी घिनानी बात है
41:46आपने जोई बताया ना
41:47मतलब उन लोगों के साथ
41:49अगर बैठता भी होना तो उनकी
41:51कॉमर्जेशन भी ऐसी होती है कि लड़की कॉमल या तो उसके साथ ऐसा ऐसा करना मतलब बहुत वल्गलवर्गर लेंग्विज में
41:57होती है वह भी यह बात लड़कियों को बता दो ना जो बिलकुल आतुर हो रही है
42:13आंहा ज're आ एक्शूली में नॉर्मल नॉर्मल को में हमेंशा होती है दो व convention को पता हो न जो
42:27सोचती है कि
42:28लेकिन अगरूद दस लोग एक सा डाइनिंग टेबल बेठेंगे तुझ फील्ड पेंड वाला उनके लिए एकसा होता है जैसे बेकर
42:34ये क्या होता है वो मानेंगे नहीं कि फीलिंग्स वगेरा कुछ होती भी है मानना वगेरा एक सीमा काम नहीं
42:41आता है उसके आगे हिम्मद च
42:57कि वहाँ जो खड़ा है उसकी सेवा मत कर ला मुझे थोड़ा पानी पिला दे पर ही कायर है उधर
43:04वाला जो खड़ा है वो इसको थोड़ी घुड़की देगा यह उसकी तरफ भाग जाएगा मैं पैसा मरूँगा
43:12तुम्हारी जिंदगी में अगर लोग कायर हैं तो इस बात से कभी आश्वस्त मत हो जाना कि उन्होंने तुम्हारी बात
43:17मान ली कायर बस अपनी कायरता की बात मानता है कायर के लिए ग्यान बड़ा नहीं होता है भै बड़ा
43:24होता है तो मुसे कितना भी ग्यान दे दो चलेगा
43:27वो भैपरी
43:30देते रहा उसको ज्ञान
43:31वो समझ जाएगा
43:33पर जहां दस लोग सामने दिखाई देंगे
43:35वो अपना सारा ज्ञान एक तरफ रख देगा
43:37और दस के साथ चल देगा
43:42मैं यहां कोई ज्ञानी नहीं पैदा कर रहा हूँ
43:44मुझे हिम्मत वर लोग चाहिए
43:46ज्ञानी बहुत हुए
43:49बिना हिम्मत का ग्यान दो कोड़ी का होता है
43:51वो ग्यान रखे रहते हैं और ग्यान को हंकार की खुराक बनाते हैं
43:58जानना तो तुम्हारे लिए बहुत आसान है
44:00मैं सामने खड़ा हूँ न जनवाने के लिए
44:05जानना तो तुम्हारा मैं सरल कर देता हूँ
44:07कठिनाई तो उसके बाद शुरू होती है
44:09कि अब हिम्मत दिखाओ जाने हुए को जीने की
44:12वो हिम्मत नहीं होती है
44:16ये आपको सावधान कर रहा हूँ
44:17जिस आदमी के केंदर में कायरता बैठी है
44:20उस पर कभी विश्वास मत करियेगा
44:23वो किसी का नहीं होता
44:24वो बस अपने भै का होता है
44:31न उसके पास वफा होती है
44:34न दोस्ती होती है
44:35न प्रेम होता है
44:36न ग्यान होता है
44:38उसके पास सबसे बड़ी चीज
44:40भै होता है
44:43आप धोखा खा जाएंगे
44:45आपको सदमा लग जाएगा आप कहेंगे कि
44:46इसको मैंने इतना समझाया इसको मैंने इतना दिया
44:49इसके साथ मैंने इतनी निश्ठा रखी
44:51उसके बाद भी इसने धोखा दिया
44:54हाँ दिया क्योंकि उसका केंद्र ही कायरता का था
45:02कईता है कुछ भी बन
45:05कायर ना बन
45:07बश्पन में अच्छी लगती थी उच्छे पता नहीं था क्यों अच्छी लगती है
45:12अच्छार जी अगर मतलब कोई ऐसे बोल रहा है कि यार
45:15यह पुएंट की बाद जब कॉनवर्शेशन होती है ना तो वह एसे बोल लेते कि यार मेर से छोड़ा नहीं
45:19जाएगा पनीर बगरा तो फिर उसका कुछ नहीं कर सकता है
45:22मतलब कुछ भी अरे जिससे छोड़ा जाएगा उसका छोड़ाओ ना मैं हाँ खड़ा हूं तो मैं पूरे गौहाटी शहर से
45:28थोड़ी बात कर रहा हूं जने का छोड़ा एक जने का छोड़वा दिया था है जो नहीं छोड़ रहा उससे
45:34का यारान निभाए पड़े होगी त
45:57अचारे जी अपने जीवन को देखने का एक बहतर नजरिया हमें सिखाते हैं तो आप अपने जीवन को बहतर तरीके
46:05से समझ पाते हैं जिससे आपकी कमजूरियां आपकी दूर होती है जिसमें आपका डर होता है आपके बंधन होते हैं
46:12आपको एक आंतरिक मजबूती मिलती ह
46:15जो आपको अच्छा काम करने में सायक होती है, जिससे मेरे जीवन के बहुत सारे अच्छे वैसले में ले पाही
46:22हूं, जाए वो मेरे काम को लेकर हो, निडर्ता के साथ मैंने अपने काम में संघर्ष करके सही काम को
46:29चुना है, जाए वो मेरे रिष्टे हो, मेरे रिष्टे बह�
46:42कि जब उनके सामने जाते हो ना तो आप एक मजबूती का नुभव करते हो जो यूटुब पर सुनकर सिर्फ
46:49सुना जा सकता है लेकिन समझा नहीं जा सकता तो मेरा सभी से जो मुझे सुन रहे हैं या नुरोध
46:54है कि अगर आप सुनते हैं और आपको कहिना कहीं उनकी बाते सम�
47:09कि कामी में चेंज है जो हमारे आता कि छीजें हैं जो हमारी जीवन को प्रभावित कर रही है हमारे
47:16आसपास बहुत सरी वहत्सारी उधानाय होती है तो उनको समझना आपस जादा आसान बना देते हां अचारेजी अपनी सीक से
47:23अपनी लर begitu है पहतार बनाया है मैं चाहती आ�
47:36झाल
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