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Transcript
00:00सीता को उठा ले गया है रावन और राम रो रहे हैं और जानवरों से पक्षियों से व्रिक्षों से सबसे
00:07पूछ रहे हैं
00:08हे खगम्रगहे मदुकरशेनी तुम देखी सीतामरी मैनी
00:12जटायों के पास पहुँचते हैं वो गिरा पड़ा है आखरी सांसे ले रहा है चत्विक्षत उसका शरीर है
00:19राम उसको छाती से लगा लेते हैं भाव प्रवण हैं राम एक नन्नी सी गिलहरी है
00:25पुल बन रहा है लंका पहुचने के लिए ठोब मुह में रेत के दो दो चार चार दाने भरके समुधर
00:31की और भाग रही है
00:44बहुत बड़े बड़े चमतकार नहीं भाई मरने को पड़ा हुआ है तो भी उसकी जान वो कोई चमतकार करके नहीं
00:52बचा लेते
00:53वो अब आशरित हैं कि हनुमान जाएं और वैद्य से दवा पूछें और फिर दवा ढूनें और दवा ले करके
00:59आएं बहुत साधारण है राम
01:01आज कौन साधारण रहना चाहता है आज कौन किसी गिलहरी की पीट पर हाथ फेरना चाहता है
01:07आज कौन वानरों को गले लगाना चाहता है
01:10आज तो हमें वो सब कुछ चाहिए जिसमें ताकत हो
01:14और उस ताकत का इस्तिमाल करके हम दुनिया को भोग सके और और सुख पा सके
01:18कोई वज़ा है कि कवीर साहव जैसा मूरधन ज्यानी राम-राम-राम और बस राम का ही नाम लेता रहता
01:27है
01:27कोई वज़ा है कि कुरुगरंथ साहिब में राम का नाम सेकड़ों हजारों बार आया है
01:32इस राम को अगर आज हम मूल लिया सम्मान नहीं देना चाहते
01:37तो हमारी वर्जू
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