00:00घना जंगल उचे उचे पेड, बहती नदी और हर तरफ जानवरों की हलचल। इस जंगल का राजा था शेर वीर
00:10सिंग। ताकतवर, तेज और गर्व से भरा हुआ। लेकिन जंगल में एक और ऐसा जानवर था जिसकी ताकत शेर से
00:18भी ज्यादा थी। हाथी महाबली, शांत, स
00:26जंगल की आत्मा। अहंकार की शुरुआत। समय की साथ शेर के दिल में अहंकार भरने लगा। वो सोचने लगा, मैं
00:35राजा हूँ, मेरी ताकत सबसे बड़ी है, मेरे बिना जंगल कुछ भी नहीं। एक दिन शेर ने फर्मान जारी किया,
00:43अब जंगल के सारे जानवर सिर्�
00:45मेरी एजाजत से पानी पिएंगे। जानवर डर गए, नदी तो सबकी थी, पर कोई कुछ बोल नहीं पाया। हाथी महाबली
00:53ने ये सुना, तो वो सीधे शेर के पास गया। हाथी शांत स्वर में। राजा, नदी सबकी है, ताकत का
01:01मतलब जिम्मेदारी होता है, डर नहीं�
01:05शेर, गुस्से में, मुझे मत सिखाओ, मैं राजा हूँ। हाथी चुपचाप लोट गया, लेकिन जंगल की चिंता उसके चहरे पर
01:13साफ थी। जंगल का संकट। कुछ दिनों बाद भयंकर सूखा पड़ा, नदी सूखने लगी, पेड मुर्जाने लगे, छोटे जानवर �
01:23बीमार होने लगे, शेर ने सोचा, सब मेरे पास आएंगे, तब उन्हें मेरी ताकत का एहसास होगा, लेकिन हुआ उल्टा,
01:31हाथी ने जंगल के जानवरों को एकठा किया, अपनी सूंड से जमीन खोद कर पानी निकाला, पेडों को गिरने से
01:38बचाया, और सब को साथ लेकर
01:40काम किया, जंगल भीरे-धीरे संभलने लगा, जानवर फुस-फुसाने लगे, असली नेता तो हाथी है, शेर की चुनोती, ये
01:50बात शेर के कानों तक पहुँची, उसका अहंकार भड़क उठा, उसने सब के सामने एलान किया, अगर हाथी खुद को
01:57इतना ही बड़ा समझता
01:59है, तो कल खुले मैदान में मेरी ताकत से मुकाबला करे, जंगल में सननाटा चागया, हाथी ने चुनोती स्वीकार की,
02:07लेकिन कहा, मैं लड़ना नहीं चाहता, पर अगर इससे जंगल को सच्चाई समझाती है, तो मैं आऊंगा, ताकत बनाम समझ,
02:15अगले दिन पूरा जं�
02:17मैदान में इकठा था, शेर दाहाडा, जमीन कापठी, उसने पूरी ताकत से हाथी पर हमला किया, हाथी हिला भी नहीं,
02:26उसने शेर को नुकसान नहीं पहुचाया, बस अपनी मजबूत टांगों से रास्ता रोक लिया, शेर ठकने लगा, दाहाड कमजोर पड़
02:34गई, हाथी
02:35शेर को नीचे गिराया, लेकिन मारा नहीं, हाथी, राजा बनने के लिए ताकत नहीं, दिल बड़ा होना चाहिए, शेर की
02:43समझ, शेर पहली बार चुप था, उसने चारो तरफ देखा, डरे हुए नहीं, बलकि उमीद से भरे जानवर, उसकी आखें
02:52भर आई, शेर धीमी आ�
02:54मैं राजा था, लेकिन नेता नहीं, उसने हाथी के सामने सिर जुका दिया, नया जंगल, उस दिन के बाद जंगल
03:04बदल गया, शेर राजा रहा, लेकिन फैसले हाथी की सलाह से होने लगे, नदी सबकी हुई, ताकत सेवा बन गई,
03:12और जंगल फिर से खुशाल