00:00थार का तपता रेगिस्तान, हवा का एक-एक जोंका रेत को उचाल कर जैसे सूरज को छूने की कोशिश कर
00:06रहा था.
00:07ऐसे माहौल में, एक उचा लंबा उट धीमी चाल से चल रहा था.
00:12उसकी आँखों में थकान और मूह सूखा था.
00:15तब ही जाडियों में अचानक सरसराहट हुई, और एक चालाक सियार बाहर निकला.
00:21चालाकी उसके चहरे पर ही नहीं, उसकी पूँच की हिलती गती में भी जलकती थी.
00:26ओहो, इतने बड़े महाराज इस धूप में अकेले क्या कर रहे हैं?
00:29रेध तप रही है और अब जल रहे हैं.
00:33मैं पानी ढूंड रहा हूँ, कई कोस चल चुका हूँ, ताकत जवाब दे रही है.
00:38अरे, यही तो मेरी खासियत है, आसपास सबसे ज्यादा जगहों का पता मुझे है.
00:44मेरे साथ चलो, मैं तुम्हें पानी तक ले चलता हूँ.
00:47क्या तुम सच कह रहे हो?
00:49बड़ी महरबानी होगी.
00:50क्या मैं और जूट बोलता हूँ?
00:52क्या तुम्हें मुझ पर इतना भी भरोसा नहीं है?
00:55चलो चलो.
00:56उट ने रहत की सांस ली.
00:58वह सियाल के पीछे चल पड़ा.
01:00कुछ दूर जाकर वे एक छोटे से सरोवर के पास पहुँचे.
01:04पानी साफ था और किनारे कुछ पेडों की छाया.
01:07धन्यवाद सियाल भाई.
01:08आज तुमने मेरी बड़ी मदद की है, मैं आपका आभारी रहूँगा.
01:11दोस्त, धन्यवाद नहीं, दोस्ती निभाओ.
01:14तुम बड़े, मैं छोटा, मिलकर रहेंगे.
01:17सियाल मुस्कुराया.
01:18लेकिन उसकी आँखों में एक चुपी सी चाला की चमकी.
01:21तभी एक कौवा उड़ता हुआ आया, और बोला,
01:24काओ, काओ, सियाल, नया साथी मिल गया क्या?
01:28चुप रेकागा, तू तो हर बात उड़ा कर ले जाता है.
01:31तभी जाडियों से एक छोटा खरगोश भी बाहर आया, और बोला,
01:34वाह, आज तो सियाल की बाहर है,
01:36बड़ा साथी मिला है, जो इसे कंधे पर बिठा कर भी ले जा सकता है.
01:40मुझे मदद चाहिए थी, अच्छा लगा कि तुम सब एक साथ आ गए.
01:44खरगोश ने सियाल को आँख मारते हुए कहा,
01:46लगता है आज कोई नई चाल चलने वाला है.
01:49जैसे ही रात होने लगी, सियाल उंट के पास आया,
01:52दोस्त, आज चलो एक खेत में, वहां मीठे तर्बूज लगे हैं,
01:56तुम बिना जुके उन्हें तोड़ दोगे, हम दोनों खाएंगे, आधा आधा,
02:01किसी के खेत से चोरी करना सही नहीं,
02:03अरे हम भूखे हैं, थोड़ा सा खाएंगे,
02:06आधा मेरा, आधा तुम्हारा, हम दोनों की भूख भी मिठ जाएगी,
02:10और किसान का क्या ही बिगड जाएगा,
02:12तभी खरगोश बोला,
02:14सावधान रहना मुझे इसमें कुछ गड़बर लग रही है,
02:17खाओ, सावधान उट, ये भाईया, आधा खाना कभी नहीं बांटते,
02:21तुम दोनों चुप, चल उट, तेरे और मेरे पेट की बात है,
02:24भोला उट मान गया,
02:26खेट पहुँचकर उट ने तर्बूज तोड़कर नीचे गिराने शुरू किये,
02:30और सियाल मस्थ होकर खाता रहा,
02:33उट ने पूछा,
02:34कितना खाया, मेरा हिस्सा कहा है,
02:36अरे गिनती छोड़ो, तुमने पानी पी लिया था न,
02:39वो तुम्हारा हिस्सा समझो,
02:40ये धोखा है सियाल,
02:42तभी किसान की आवाज आई,
02:44कौन है वहाँ,
02:45कागा ने उड़कर चेतावनी दी,
02:47काओ, काओ, भागो,
02:49सियाल तुरंथ जाडियों में घुज गया,
02:52उट का बड़ा शरीर छिप नहीं सका,
02:54किसान ने उसे लाठी मारी,
02:56और सियाल दूर बैठ कर मुस्कुराता रहा,
02:59कुछ दिनों बाद उट ठीक हो रहा था,
03:01तभी अचानक एक कोटर से एक आवाज आई,
03:03चक चक, क्या जगड़ा हो रहा है यहां बच्चों,
03:06सबने देखा, एक तोता,
03:09जिसकी आँखें उम्र के साथ धूंदली हो चुकी थी,
03:12समुदरी हवा जैसा शान्त स्वभाव लिए बैठा था,
03:15सियाल, तु फिर किसी को मुसीबत में डालाया?
03:18अरे तोते, तुम तो हमेशा उलाहना देते रहते हो,
03:21काओ, सच बोल रहा हूँ तोते जी,
03:23सियाल ने उँट को धोखा दिया,
03:26शायद मैंने विश्वास ज्यादा कर लिया,
03:28विश्वास रेत जैसा है,
03:30उँट बालक, घलत साथी मिल जाए,
03:33तो हाथ से फिसल जाता है,
03:35सियाल ने हसी उडाते हुए,
03:36बूढ़े हो गए हो,
03:38और तुम खुद को विद्वान समझते हो,
03:40तोते ने आँखें बंद कर ली,
03:42पर कुछ न कहा,
03:43अगले दिन सियाल फिर आया,
03:45दोस्त उँट एक जगे है,
03:47नदी,
03:48वहाँ पानी भी है,
03:50फल भी,
03:51चलो, वहाँ चलते हैं,
03:52खाओ,
03:53मुझे शक है इस पर,
03:55उट भाईया,
03:55इस बार सोच कर जाना,
03:57लेकिन,
03:57उस खेत के बाद,
03:59सियाल मेरे पास ही तो रुका,
04:01शायद बदल रहा हो,
04:02बदलना कठिन नहीं सियाल,
04:05पर आदतें पुरानी हो जाईएं,
04:07तो निभाना मुश्किल होता है,
04:08फिर भी उट चल पड़ा,
04:10नदी तक पहुँच कर सबने पानी पिया,
04:13फल खाए,
04:14हवा ठंडी थी,
04:15सियाल अकेले जाकर सबसे ज्यादा फल खा आया,
04:18कागा ने देखा और बोला,
04:20काओ, ये पूरे फल खा गया है,
04:23उहट भया, मैंने पहले ही बताया था,
04:26मैं महनत करके फल लाया हूँ,
04:28तुम लोग बोलते बहुत हो,
04:29तभी चालाक सियाल के मन में एक युक्ती आई,
04:32चलो उट, नदी के उस पार चलें,
04:34वहां गाव है, धेर सारा खाना मिलेगा,
04:37पर मैं तैर नहीं सकता,
04:39इसलिए तो मैं कह रहा हूँ,
04:40मैं तुम्हारी पीट पर बैठ जाऊँगा,
04:42पानी उथला है,
04:43सियाल की बातें धुएं जैसी है,
04:45साफ नहीं दिखती,
04:47पर आँखें जला देती है,
04:49बुढ़े तोते, तुम्हें डर लगता है,
04:51वो मेरी गलती नहीं,
04:53उट चल पड़ा,
04:53पानी गहरा निकला,
04:55उट लड़ खड़ाया,
04:57सियाल उसकी पीट पर चढ़ चुका था,
04:59कागा और खरगोश किनारे से चिल्लाए,
05:01साफधान,
05:03उट भाई वापिस आओ,
05:04नदी के बीच पहुँचकर सियाल बोला,
05:06उट, क्या मैं गीत गाउँ,
05:07अभी, यहाँ, पागल हो क्या,
05:10अगर तुम गाउगे तो मैं डगमगा जाऊँगा,
05:12मैं क्या करूँ,
05:13फल खाकर मेरा मन खुश हो गया है,
05:15और वह जोर-जोर से किकी आने लगा,
05:18गाउँ वाले जाग गए,
05:19शोर बढ़ गया,
05:20सियाल, चुप, लोग पकड़ लेंगे,
05:22मेरी आदत है गाने की,
05:24जैसे तुम्हारी आदत है सहने की,
05:26किनारे पहुँचकर सियाल जाडियों में चिप गया,
05:29और उट को फिर लोगों ने दोडाया,
05:31अगली सुबह सब मित्र उट के पास पहुँचे,
05:34तुम ठीक हो, थोड़ी चोट है, पर मैं ठीक हो,
05:37सियाल की चालों से दूर रहो बालक,
05:39तभी सियाल एंटता हुआ आया,
05:41अरे मेरे प्यारे साथी, आज वापस चलते हैं,
05:44यहां खत्रा है, काव, और खत्रा कौन है,
05:47तुम या गाउँ वाले, तुम सब को बस मेरी बुराई करनी है,
05:51हम तो सच बता रहे हैं,
05:52उट इस बार चुप रहा, सियाल फिर उट की पीट पर बैठ गया,
05:57सभी मित्र किनारे ही रह गये,
05:59नदी के बीच पहुँचकर उट अचानक रुख गया,
06:01अरे, क्या हुआ, जल्दी चलो,
06:04कल तुमने कहा था, फल खाकर मेरा मन खुश होता है,
06:08इसलिए मैं गाता हूँ,
06:09याद है, तो आज मैंने भी पानी पिया,
06:13और पानी पीकर मेरा मन भी खुश होता है,
06:16इसलिए अब मेरी बारी है गौर करने की,
06:19सियाल की आँखें फैल गई,
06:21नई, नई, नई, उन्ट तु चुप रहेगा,
06:23लोग आ जाएंगे,
06:24उन्ट जोर-जोर से आवाज निकालने लगा,
06:27शोर पानी पर गूंच गया,
06:29उन्ट ने अपना शरीर हिलाया,
06:31सियाल फिसल कर नदी में गिर पड़ा,
06:33किसी तरह तैर कर सियाल किनारे पहुँचा,
06:36इधर गाउवाले उसे देखकर दौड पड़े,
06:38गाउव, अब समझ आएगा,
06:40भागो सियाल, भागो,
06:41सियाल जान बचा कर जंगल की और भागा,
06:44उन्ट धीरे धीरे नदी की दूसरी तरफ पहुँच गया,
06:47आज तूने बुरा नहीं किया,
06:50तूने सिर्फ सियाल को उसके कर्मों का फल दिया,
06:53मैंने उसे चोट नहीं पहुँचाई,
06:55सिर्फ समझाया,
06:56सियाल जाडियों से ठका हुआ निकला,
06:58उसकी आँखों में पच्चतावा था,
07:00उहट, मैं गया नहीं हूँ,
07:03पर आज समझ आया की चालाकी और दोस्ती साथ नहीं चल सकती,
07:07दोस्ती वही जो मुश्किल में साथ दे,
07:09तुम तीन बार मुझे मुसीबत में छोड़ कर भागे,
07:12गलती वही होती है,
07:14जो दोहराई जाती है,
07:16अब फैसला तुम्हारा है,
07:17सियाल, तुम बदलोगे या राह अलग करोगे?
07:22मैं कोशिश करूँगा.
07:24उट ने धीरे-धीरे सिर हिलाया और आगे बढ़ गया,
07:27बाकी सब उसके पीछे चल पड़े,
07:29सियाल अकेला बैठा रहा,
07:31पर आज पहली बार उसने अपनी चालाकी पर शर्म महसूस की.