00:00जंगल के किनारे एक महनती किसान रहता था.
00:03किसान सीधा सादा था, पर उसकी सबसे बड़ी पूझी उसका ईमान था.
00:08उसके पास एक गधा था, जो सालों से उसके यहां काम करता आ रहा था.
00:12गधा देखने में साधारन था, पर दिल का बहुत साफ और महनती.
00:16वह किसान के खेत जोतने, अनाज ढोने और बाजार तक सामान ले जाने में कभी आलस नहीं करता
00:23अरे मेरे अच्छे गधे, तू ही तो मेरा सच्चा साथी है, तेरे बिना ये खेत कैसे चले, मेरे जीवन की
00:31सारी जमा पूजी सिर्फ तुम हो
00:33मालिक आप इतने इमानदार हैं, तो मैं भी पूरी निष्ठा से काम करूँगा
00:38मैं कभी भी काम में आलस नहीं करूँगा, ना ही आपको धोका दूँगा
00:43पास ही जंगल में तरह तरह के जानवर रहते थे
00:46उनमें एक थी चालाक और लालची लोमडी
00:50लोमडी को हमेशा दूसरों को अपनी बातों में फसा कर फाइदा उठाने की आदत थी
00:54उसे इमानदारी से चिड़ थी, क्योंकि इमानदार लोग उसकी चालों में नहीं फसते थे
01:01एक दिन लोमडी खेतों की ओर आई
01:03उसने देखा कि गधा अकेले अनाद से भरी बोरियांड हो रहा है
01:08लोमडी की आँखों में चमक आ गई
01:10अरे भाई गधे, कितनी महनत करते हो, दिन रात काम, पर बदले में क्या मिलता है?
01:16मुझे मेरे मालिक का भरोसा मिलता है, वही मेरे लिए काफी है
01:19तभी लोमडी ने अपनी चालाक बुद्धी से सोचा
01:21ये बाकियों की तरह नहीं है, इसे लालच दिखाना होगा, इसे अपने मालिक पर भरोसा है
01:27अगर तुम चाहो तो कम महनत में ज्यादा मजा कर सकते हो, जंगल में देखो, बकर यां, फल, सब मुफ्त
01:34में
01:35मुफ्त का लालच बुरा होता है, जो अपना नहीं, उसे लेना गलत है
01:40इमानदारी अपनी जगर ठीक है, पर जिंदगी में थोड़ा चालाक होना भी जरूरी है
01:45इसी जंगल में एक भेडिया रहता था, भेडिया ताकतवर था और अकसर दूसरों को डरा कर अपना काम निकालता था
01:52वह दूर से इस बातचीत को देख रहा था
01:55अगर ऐसा गधा जंगल में आ गया, तो मज़ा आ जाएगा
01:58भेडिया तुरंत ही जाडियों से बहार निकला
02:00अरे लोमडी, यहां क्या साजिश चल रही है?
02:03साजिश नहीं, दोस्ती, मैं गधे को बहतर जिंदगी का रास्ता दिखा रही हूँ
02:08गधा थोड़ा घबरा गया, पर सच बोलने से नहीं रुका
02:11मैं अपने मालिक के साथ खुश हूँ, मुझे किसी और रास्ते की जरूरत नहीं
02:15इमानदारी पेट नहीं भरती गधे, जंगल में ताकत चलती है
02:19इतनी देर में जंगल का राजा, शेर, अपनी गुफा से बाहर आया
02:24उसकी दहार से पूरा जंगल गुँझ उठा
02:27कहा हो तुम सब, यहां इतना शोर क्यों है, क्या किस की शामत बुला रही है
02:32सब जानवर सन रह गए, लोमडी ने तुरंथ जुक कर सलाम किया
02:36महाराज, हम तो बस बातें कर रहे थे
02:39गधे, तुम जंगल के नहीं लगते, यहां क्यों आये हो
02:42महाराज, मैं किसान के यहां काम करता हूँ, मैं बस अपना काम कर रहा था
02:47इमांदारी दुरलब है, पर याद रखो, जंगल में हर कोई तुम्हारा मित्र नहीं
02:53लोमडी ने मन ही मन सोचा, कि शेर के सामने अभी कुछ कहना ठीक नहीं
02:57लोमडी भेडिया किसी को बहकाना या डराना ठीक नहीं, हर किसी को अपने रास्ते चुनने दो
03:02भेडिया चुप हो गया, लोमडी की चाल फिलहाल नाकाम रही, पर उसका लालच अभी मरा नहीं था
03:08गधा किसान के पास लोटाया
03:11किसान ने उसे पानी पिलाया और दुलार किया
03:14आज देर हो गई गधा, सब ठीक तो है?
03:17आज इमानदारी नहीं मुझे बचाया है
03:19अगली सुबह जंगल में हलकी धुंद फैली हुई थी
03:22लोमणी रात भर सो नहीं पाई थी
03:24उसका दिमाग गधे को फंसाने की नई चालो में उल्जा हुआ था
03:28अगर मैं सीधे लालच दिखाऊंगी
03:30तो यहाँ गधा नहीं फंसेगा
03:32लेकिन अगर डर और लालच दोनों को मिला दूँ
03:36तो शायद यह अपने किसान को छोड़ कर
03:39जंगल की और कदम बढ़ा दे
03:41उधर किसान अपने खेत में काम की तयारी कर रहा था
03:44गधा पास ही खड़ा था
03:46क्यों गधे?
03:47आज तुम्हें जंगल के पास वाले खेत में चलना है
03:50वहां की मिट्टी सख्त है
03:52और तुम्हारी ताकत के बिना
03:54काम पूरा होना मुश्किल हो जाएगा
03:56इसलिए ध्यान से और इमांदारी से साथ देना
04:00मालिक, आप निश्चिंत रहिए
04:02मैं पूरी मेहनत और सच्चाई से काम करूँगा
04:05क्योंकि आपकी भलाई में ही मेरी भलाई है
04:08और इमानदारी से किया गया काम कभी बेकार नहीं जाता।
04:12दोपहर के समय लोमडी और भेडिया फिर खेत के पास पहुँचे।
04:16दोनों जाडियों के पीछे चिपकर गधे को देखने लगे।
04:19लोमडी, अगर यह गधा हमारे साथ आ गया,
04:22तो मुझे कई दिनों तक शिकार की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।
04:26लेकिन अगर इसने शोर मचाया, तो शेर तक बात पहुँच सकती है।
04:30तुम चिंता मत करो, मैं इसे डर और सपनों दोनों का ऐसा जाल दिखाऊंगी,
04:34कि यह खुद ही किसान से दूर जाने के बारे में सोचने लगेगा।
04:39लोमडी और भेडिया गधे के पास आए।
04:41गधे भाई, मैंने सुना है कि किसान तुम्हें बहुत काम करवाता है,
04:45पर अगर कभी तुम बीमार पढ़ गए, तो क्या वह तुम्हें उतना ही प्यार देगा,
04:51या फिर किसी और को ले आएगा।
04:53मेरा मालिक मुझे सिर्फ काम का साधन नहीं समझता,
04:56वह मेरा खयाल रखता है, और सच्चा रिष्टा शक और लालच से नहीं,
05:02भरोसे और इमान से चलता है।
05:06मुझे जंगल में अजीब फुस-फुसाहट सुनाई दे रही थी,
05:09और मुझे यह जानना है कि कहीं कोई फिर से किसी कमजोर को बहकाने की कोशिश तो नहीं कर रहा।
05:14महराज, हम तो बस बातें कर रहे थे, कोई गलत इरादा नहीं था, लेकिन यह गधा जंगल का नहीं है,
05:20इसलिए हम इसे इसकी जगह याद दिला रहे थे।
05:23गधे तुम्हारी जगह वही है, जहां तुम्हारा मन सच्चाई से जुड़ा है, क्योंकि ताकत से जीती गई आजादी खोखली होती
05:30है, लेकिन इमानदारी से निभाया गया बंधन, जीवन भर साथ देता है।
05:35लोमडी ने सिर जुका लिया, पर उसके मन में जलन थी, गधा किसान के पास लौट आया, शाम ढल रही
05:42थी।
05:42आज मैंने फिर समझा कि सच्चाई और इमानदारी मुश्किल रास्ता जरूर है, लेकिन यही रास्ता मुझे हर खत्रे से बचाता
05:52है, और मुझे अपने मालिक के पास सुरक्षित रखता है।
05:56जंगल में शेड दूर खड़ा सब देख रहा था।
05:58जब तक जंगल में न्याय और सच्चाई की आवाज रहेगी, तब तक चालाकी और लालज कभी पूरी तरह जीत नहीं
06:04पाएंगे।
06:28वही सच लगे, जो मैं दिखाना चाहती हूँ।
06:34भेडिया भाई, आज रात अगर तुम मेरा साथ दोगे, तो गधा किसान से हमेशा के लिए दूर हो जाएगा, और
06:43फिर जंगल में ताकत और चालाकी दोनों की जीत होगी, जिससे हमें कोई रोक नहीं पाएगा।
07:01योजना तै हो चुकी थी, उधर किसान अपने घर के बाहर बैठा था और गधा पास ही आराम कर रहा
07:07था, तब ही जंगल की ओर से शोर मचने लगा।
07:10मालिक, मुझे जंगल की तरफ से अजीब आवाजें सुनाई दे रही हैं। ऐसा लग रहा है जैसे कोई जान बूच
07:18कर हमें डराने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन मेरा मन कहता है कि हमें घबराना नहीं चाहिए।
07:24डरना नहीं चाहिए, क्योंकि डर ही गलत रास्ते की शुरुआत होता है और जब तक हम सच्चाई और मेहनत पर
07:31टिके रहेंगे, तब तक कोई भी चाल हमें हमारे कर्तव्य से भटका नहीं सकती।
07:37इसी बीच लोमणी दोडती हुई आई, जैसे वहां बहुत डरी हुई हो।
08:11अगर आज तुम हमारे साथ नहीं आए, तो मैं किसान को नुकसान पहुँचा सकता हूँ, इसलिए बेहतर यही है कि
08:17तुम अपनी इमानदारी को छोड़कर जंगल का रास्ता चुन लो।
08:37इमानदारी ने आज मुझे भी गर्व महसूस कराया है।
08:41लोमडी और भेडिया, तुम्हें चेतावनी दी जाती है कि आगे से किसी की सच्चाई और भरोसे से खेलने की कोशिश
08:47की, तो परणाम बहुत कठोर होंगे, क्योंकि जंगल का नियम नियाय पर्टिका है।
08:52अगली सुबर, किसान और गधा खेत की ओर चले।
08:55आज मुझे विश्वास हो गया कि इमानदारी भले ही रास्ता कठिन बनाए, लेकिन अंत में वही सच्ची सुरक्षा और सम्मान
09:04दिलाती है, जो किसी भी लालत से कहीं ज्यादा मूल्यवान होती है।