00:00पुम्बई से नागपुर जाने वाला पुराना राष्ट्रिय राजमार्ग, हाइवे 27, दिन में यह बस सडक है, रात में यह किसी
00:09और का हिलाका हो जाता है, खास तोर पर किलोमीटर 143 से 150, ड्राइवर इसे कहते हैं, मौत का मोड,
00:17कोई साइन बोर्ड नहीं, कोई, कोई चेता
00:19अपनी नहीं, लेकिन पुराने ड्राइवर नए लड़कों से बस इतना कहते हैं, अगर रात दो बजे के बाद रेडियो अपने
00:26आप बंध हो जाए, तो समझ जाना तुम उस हिस्से में घुस चुके हो, और उसी रास्ते पर था राजू
00:32यादव, जो नया नया ड्राइवर
00:49ट्रक में सीमेंट की 280 बोरियां, बारिश रुक रुक कर हो रही थी, सडक गीली, आसमान काला, दूर दूर बिजली
00:58चमक रही थी, राजू ने घड़ी देखी और कहा, दो बजे से पहले ये इलाका पार कर लूँगा, उसने घबराहट
01:05चुपाने के लिए एक्सिलेटर थो�
01:16गाना चल रहा था, फिर अचानक, आवाज खडखडाई, गाना तूट गया, और रेडियो बंद, पूरी तरह शांत, राजू ने नौब
01:31घुमाया, कुछ नहीं, उसने हलकी गाली दी, इसकी तो इसे भी अभी बंद होना था, लेकिन उसी वक्त उसे एहसास
01:37हुआ, सडक की �
01:39आवाज भी बदल गई थी, टायर गीले डामर पर नहीं, जैसे किसी मुलायम चीज़ पर चल रहे हों, और वहाँ
01:46सडक किनारे एक आकरती खड़ी थी, हेडलाइट्स ने सामने फेले अंधेरे को चाकू की धार की तरह चीर दिया, और
01:53उसी रोशनी की सफेद पट्टी में स�
02:09राजू ने अचानक ट्रक की रफतार धीमी कर दी, हेडलाइट की रोशनी अब सीधे उस पर पड़ रही थी, ट्रक
02:14धीरे धीरे उसके पास पहुचा लाल साडी पूरी तरह भीग चुकी थी, बाल चेहरे पर चिपके हुए थे, और अजीब
02:20बात उसके पैर दिखाई ही नह
02:37आइने में उस औरत का चेहरा दिखा, चेहरा पूरा नहीं था, जैसे आधा हिस्सा कुचल गया हो, उसने आगे देखा
02:43और खुद को समझाया, कोई चोर लुटेरे होंगे, शायद रात में ड्राइवर को रोकने का नया तरीका, उसने लंबी सांस
02:51ली, जैसे अपनी ही डर को
02:53जूट साबित कर रहा हो, अकेली औरत बनकर खड़ी हो जाते हैं, फिर गैंग आ जाता होगा, मुझे बेवकूफ नहीं
03:00बना सकते, कुछ दूर ट्रक चलाने के बाद राजू ने राहत की सांस ली, हेडलाइट की रोशनी फिर किसी पर
03:08पड़ी, वो फिर दिखी, इस बार स�
03:23तेज, वो नहीं हिली, राजू ने आखिरी पल में स्टीरिंग दाईने गुमा दिया, ट्रक उसके बिलकुल पास से निकला, जब
03:29मिरर में देख तो, सिर्फ खाली सड़क, राजू की सांसे याब भारी हो गई, उसने पानी पिया, हाथ हलका कांप
03:36रहा था, तब ही उसे ल�
03:52और राभी राजू के कान के पास ठंडी हवा लगी, और बहुत धीमी आवाज आई, रुख जाते तो छोड़ते थी,
03:58उसने जटके से सिर्घुमाया, कोई नहीं, लेकिन ट्रक के अंदर अब मिट्टी की गंध थी, तीली मिट्टी, और खून की
04:08हलकी सी लोहे जैसी महक आ र
04:21रहा, दिल अब भी तेज धड़क रहा था, उसने गहरी सांस ली और कहा, बस यहीं रुखता हूँ, पानी पी
04:28लूँगा, दिमाग ठीक हो जाएगा, उसने खुद फैसला लिया, आगे ऐसे हालत में गाड़ी चलाना ठीक नहीं, तीरे से इंडिकेटर
04:36दिया, ट्रक किनारे �
04:38लगाया और इंजन बंद कर दिया, कुछ पल सनाटा रहा, फिर उसने दर्वाजा खोला और नीचे उतर गया, और धाबे
04:47के सामने खड़ा हो गया, बारिश रुख चुकी थी, पेडों से अब भी पानी की बूंदे टपक रही थी, धाबे
04:53की ट्यूब लाइट हलकी हलकी टि
05:07लेकिन कोई नहीं था, राजु ने अंदर आकर देखा, एक प्लेट में रोटी रखी थी, रोटी अभी सूखी भी नहीं
05:15थी, साथ में आधा कटा हुआ, प्याज पड़ा था, एक कुरसी उलटी पड़ी थी, जैसे कोई अचानक उठकर पीछे गिर
05:22गया हो, और सबसे अजी
05:39सननाटा, कोई आवाज नहीं तभी पीछे दीवार पर टंगा आइना हलका हिला, राजु ने उसमें देखा, पीछे दरवाजे पर लाल
05:48साड़ी वाली औरत खड़ी थी, इस बार साफ, उसका चहरा पूरा कुचला हुआ, उसकी आखें इंसानी नहीं थी, जबड़ा अजी�
05:59आइने में वो पास आती गई, राजु ने जटके से पीछे मुड़ कर देखा, पीछे कोई नहीं, राजु का गला
06:05सूख गया, वो कुछ सेकेंड हिल ही नहीं पाया, उसने फिर आइने में देखा, अब वो बिलकुल उसके पीछे खड़ी
06:11थी, इतनी पास की उसकी ठंडी सा
06:13उसके कान पर महसूस हुई और उसने फुस फुसाया, मैं जिन्दा थी, राजु की रूह काँप उठी, वो जोर से
06:22चिलाया, आइना तूट गया, काँच के टुकडे चारो तरफ बिखर गए और धाबे की सारी लाइटें एक साथ बंद हो
06:31गई, पूरा अंधेरा, राजु �
06:33जान बचाकर भागा, सीधे ट्रक में कूदा, दरवाजा बंद किया, चाबी घुमाई, लेकिन ट्रक चालू नहीं हो रहा था, चाबी
06:41फिर घुमाई, ट्रक का इंजन उसका साथ नहीं दे रहा था, तभी उसे एहसास हुआ, इस बार बगल वाली सीट
06:48सच में भरी हुई थी
06:49धीरे धीरे उसने देखा, लाल साड़ी, भीगी हुई, गर्धन उल्टी दिशा में मूडी हुई, आँखें सीधे उसकी आँखों में, और
06:58वो बोली, अब भागोगे कहां, राजू? राजू का दिल धड़कना भूल गया, उसने दरवाजा खोला, ट्रक छोड़कर सीधे �
07:10जंगल की तरफ भागा, पीछे से ट्रक का हॉर्न अपने आप बजने लगा, लंबा, अटूट, जैसे कोई अंदर बैठकर दबा
07:17रहा हो, राजू भाग रहा था, पीछे हाईवे पर उसका ट्रक खड़ा था, हेडलाइट सब भी जल रही थी, हॉर्न
07:25लगातार बज रहा थ
07:26जैसे किसी ने अंदर से दबा रखा हो, राजू अंधा धुंद भाग रहा था, अजीब से चीखने की आवाजें आने
07:33लगी, आवाजें बदल गई, हवा नहीं चल रही थी, फिर भी पेडों की टहनिया हिल रही थी, हर कदम भारी,
07:39पीछे से वही आवाज, वो मुड कर दे
07:55ट्रक दूर से दिखाई दे रहा था, नहीं, मैं तो अंदर भागा था, उसने दूसरी दिशा में दौड लगाई, इस
08:04बार जाडियाओं और घनी थी, कांटे हाथों में जुब रहे थे, अचानक उसके पैर किसी चीज से टकरा है, वो
08:10गिर पड़ा, नीचे देखा, पुरा
08:25के बीच खड़ी थी, लाल साडी अब कीचड से सनी हुई थी, चहरा पहले से ज्यादा तूटा हुआ, एक आँख
08:32सीधी, उसे देख रही थी, दूसरी आँख बं थी, उसकी आवाज अब चारो तरफ गूंज रही थी, राजू चीखा, और
08:40फिर से भागने लगा, भागते ह
08:42हुए, वो एक खंडहर गाव में जाकर पहुँच गया, अचानक पेड़ खत्म हो गय, सामने खुला मैदान था, और उसके
08:48बीच एक पुराना उजड़ा हुआ गाव, तूटी दीवारें, छटें गिरी हुई, दर्वाजे, टेड़े लटकते हुए, कोई आवाज नहीं, न
09:09लगी हो कभी, उसे अचानक महसूस हुआ, ये गाम बहुत पुराना नहीं था, जैसे लोग अचानक इसे छोड़ कर गए
09:16हुँ, राजू एक तूटे हुए घर के अंदर गया, उसे दीवार पर अखबार का फटा टुकडा चिपका मिला, उस पर
09:24साफ लिखा था, हाइवे 27 �
09:2628 पर ट्रक हादसा, ड्राइवर फरार, स्थानिय लड़की की मौत, नीचे धुंदली तस्वीर, लाल साड़ी, राजू के हाथ कांपने लगे,
09:36मैंने, मैंने, नहीं, मैं तो पहली बार, तभी पीछे घर का दरवाजा, अपने आप बंद हो गया, सिर्फ तूटी छट
09:44से चा
09:56लगा, दीवार से टकराया, भागने का रास्ता नहीं, मैंने कुछ नहीं किया, मुझे छोड़ तो, उसकी आवाज तूट रही थी,
10:04उसके बिल्कुल पास आ गई, इतनी पास की दोनों एक दूसरे के आमने सामने थे, उसकी सड़ी हुई सांस उसके
10:12चेहरे पर लगी, मैंने
10:14भी कुछ नहीं किया था,
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