क्या पाकिस्तान अब ईरान और अमेरिका की जंग रुकवाएगा? जानिए इस्लामाबाद की उस सीक्रेट मीटिंग का पूरा सच, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।
दुनियाभर में चल रहे युद्ध के तनाव के बीच एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिस पर यकीन करना मुश्किल है। पाकिस्तान, जो खुद आर्थिक और आंतरिक संकटों से घिरा रहता है, अब मिडिल ईस्ट में "पीसमेकर" (Peacemaker) यानी शांति दूत की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ी पहल की है।
इस्लामाबाद में पाकिस्तान ने सऊदी अरब (Saudi Arabia), तुर्की (Turkey) और मिस्र (Egypt) जैसे प्रभावशाली मुस्लिम देशों के साथ एक अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक का एकमात्र एजेंडा है—ईरान और इजराइल के बीच संभावित महायुद्ध को टालना। सूत्रों की मानें तो पाकिस्तान 'बैकचैनल डिप्लोमेसी' के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान भी कर रहा है।
हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या पाकिस्तान की यह कोशिश रंग लाएगी? एक तरफ अमेरिका और इजराइल का कड़ा रुख है, तो दूसरी तरफ ईरान के अपने तर्क हैं। क्या पाकिस्तान इन गुटों के बीच एक पुल का काम कर पाएगा या यह सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि सुधारने की एक नाकाम कोशिश बनकर रह जाएगी? विस्तार से देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट।
About the Story:
Pakistan is initiating a major diplomatic effort to mediate the escalating tensions between Iran, Israel, and the United States. By hosting a strategic meeting in Islamabad with Saudi Arabia, Turkey, and Egypt, Pakistan aims to find a path toward peace and de-escalation through backchannel diplomacy.
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