00:00कामका एकदशी वरत चेत्रमा के शुक्ल पक्ष की एकदशी तिथी को रखा जाता है
00:04इस दिन भगवान विश्नु की पूजा करने से शुब फल प्राप्त होते हैं और पापों से मुक्ति मिलती है
00:09साल 2026 में कामका एकदशी का वरत 29 मार्च को रखा जाएगा
00:14कामका एकदशी का वरत रखने वालों को वरत कथा का पाठ भी जरूर करना चाहिए
00:18तब ही वरत का पूरा फल आपको मिलता है
00:20आए जानते हैं कामका एकदशी की वरत कथा
00:23धार्मिक मानेताओं के मताबिक कामका एक अदशी की वरत कथा गुरु वशिष्ट जी ने भगवान राम के पूरवज राजा दिलीप
00:29को सुनाई थी
00:30कथा के मताबिक प्राचीन समय में भोगीपुर नाम का एक नगर था जहां पुंडरीक नाम का एक राजा राज्य करता
00:36था
00:36भोगीपुर में ही एक ललित और ललित नाम के पति-पत्नी भी निवास करते थे और पति-पत्नी के बीच
00:41गहरा प्रेम था
00:42ललित राजा पुंडरी के दर्बार में संगती सुनाता था
00:44एक बार गंधर्वों के साथ ललित राज दर्बार में संगीत सुना रहा था
00:48गाना गाते वक्त उसका ध्यान अपनी पतनी पर गया और ललित का सुर बिगड़ गया
00:52राजा ने इसे अपना अपमान माना और राजा क्रोधित हो गया। क्रोध में आकर राजा ने ललित को राक्षस बने
00:58का श्राप दे दिया। राजा के श्राप के प्रभाव से ललित मास खाने लगा और उसका चहरा भी राक्षसों के
01:04समान भयानक हो गया। इसके बाद भी लल
01:19ललित उस आश्रम में गई और वहां जो मुनी थे उनको प्रणाम किया। रिशी ने ललिता से पूछा कि तुम
01:26कौन हो। ललिता ने अपना नाम बताया और साथ ही अपने पती को मिले श्राप के बारे में भी बताया।
01:31दुख्यारी ललिता को देखकर मुनी को तरस आ गया और
01:33उन्होंने ललिता को बताया कि इस समय चेतर महा चल रहा है और चेतर महा की एकादशी का वरत रखने
01:39से उसका पूर्णे अपने पती को देने से वो ठीक हो सकता है
01:43मुनी की बात को सुनकर विदी विधान से ललिता ने कामका एकदशी का वरत रखा और द्वादशी ती ठीक वो
01:48वरत का पारण मुनी के सामने किया
01:50इसके साथी ललिता ने कामका एकदशी का पूर्णे फल अपने पती को दिया
01:54वरत के शुब परभाव के कारण ललित धीरे धीरे ठीक होने लगा इसके बाद पती पतनी मिलकर एकादशी वरत का
02:01पालन निरंतर करने लगे और उनके जीवन में खुशियां लौट आई
02:07जैसे ललित के हुए और जीवन में खुशाली आती है फिलाल इस वीडियो में इतना ही उमेद आपको ये जानकारी
02:12पसंद आई होगी वीडियो को लाइक करें शर करें और चानल को सब्सक्राइब करना बिलकुल नब भूलें
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