00:19मिडिलीज्ट के संघर्ष के बीच अब एक ऐसी खटना सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को जग जोड दिया है
00:24दक्षनी लिमिनान में एक इस्राइली हमले में तीन पत्रकारों की मौत हो गई और विवाद इसलिए और गहरा गया है
00:30क्योंकि जिस वाहन पर हमला हुआ उस पर साफ तौर पर प्रेस लिखा हुआ था
00:35यह हमला उस वक्त हुआ जब पत्रकार सीमा के पास चल रही जहनपों की रिपोर्टिंग कर रहे थे
00:39मारे गए पत्रकारों में अली हसन शाइब और फातिमा फतवनी शामिल है जो छेत्रिय मीडिया नेटवर्क से जुड़ी हुए थे
00:47रिपोर्ट्स की मताबिक दोनों मौके पर लाइव रिपोर्टिंग कर रहे थे तब ही अचानक हमला हुआ रूर की जान चली
00:54गई
00:54इस घटना के तुरंद बाद इसराइली सेना आईडियाफ ने हमले के जिम्मेदारी लेते हुए एक बड़ा दावा किया है
00:59उनका कहना है कि मारे के पत्रकारों में से एक अली हसन साइब पत्रकार नहीं था बलकि हिजबुल्ला के रदवान
01:06फोर्स का सदस था
01:07जो पत्रकार के रूप में काम करते हुए इसराइली सेना की जानकारी जुटा रहा था
01:12आइडियाप ने यहां तक कहा है कि प्रेस का इस्तमाल एक कवर के तोर पर किया जा रहा था
01:17लेकिन दूसी तरब लेवनानी मीडिया और संबंसी संस्थानों ने इस दावे को पूरी तरह से खारिश कर दिया है
01:21उनका कहना है कि यह एक सुन्योजित हमला था जिसमें जान बूच कर पत्रकारों को निशाना बनाया गया
01:27उन्होंने से आश्विकार और प्रेस की सुदंता पर सीधा हमला बताया
01:31इस बीच एक वीडियो भी सामने आया जिसमें फातिमा फतोनी पूरी क्रिस गियर हेलमेट और जैकेट में रिपोर्टिंग करती नजरा
01:38आती है
01:38यह वीडियो उस हमले के कुछ पल पहले का बताया जा रहा है
01:42यही से मामला और गंभीर हो जाता है क्योंकि अब सवाल सिर्थ एक हमले का नहीं
01:46बलकि उस सीमा का है जो युद्ध में पत्रकार और लड़ाकों के बीच होती है
01:50क्या किसी पत्रकार को सिर्फ शक के आधार पर टारगेट बना जा सकता है
01:54क्या प्रेस लिखा हुआ होना अब सुलक्षा की गारंटी नहीं रहा है
01:57और सबसे बड़ा सवाल जंग के मैदान में सच कोन तै करता है या पहली बार नहीं है
02:02वैसे पहली बार नहीं है जब इसराइल हिजबुल्ला संगर्स में इस तरह के आरोप लगे हो
02:06लेकिन इस बार मामला इसलिए बड़ा है क्योंकि इसमें सीधे पत्रकारों की मौथ हुई है
02:11और अंतराश्टी एस्तर पर जवाब देही की मांग उठ रही है
02:14वैसे आज के दोर में युदु सिर्फ हत्यारों से नहीं बलकि जानकारी और नरेटिव से भी लड़ा जाता है
02:19और ऐसे में पत्रकार ही वो कड़ी होती है जो दुनिया तक सच्चाई पहुचाते हैं
02:23लेकिन अगर वही पत्रकार निशाने पर आ जाएं तो फिर सवाल सिर्फ जंग का नहीं है बलकि सच के अस्तित्तु
02:29का भी बन जाता है
02:30फिलाग लिए बस इतना ही बाकि अब्रेट लिए बने रहिए वन इंडिया हंदी के साथ
02:53श्राप लिए है
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