00:00मैं, पूजा, उम्र 28 वर्ष, हमेशा से शान्त दिमाग की थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से मेरे अंदर अजन भी
00:09ख्याल आने लगे, पहले लगा ये मेरे ही डर है, लेकिन वो विचार मेरे खिलाफ थे, चाकू उठाओ, शीशा तोड़
00:17दो, कूच जाओ, मैं रोने लग
00:23एक दिन मैंने नोटिस किया, मेरे होंट उन शब्दों के साथ हलके हलके हिलते हैं, मैं सोच नहीं रही थी,
00:31मैं दोहरा रही थी, रात को आइने के सामने खड़ी हुई, और अचानक मेरे मुह से आवाज निकली, अब तुझे
00:39आरा मिलेगा, मैंने खुद को थपड मारा, ले
00:52जब मैं सोचती हूँ, तो पहले से ही विचार मौजूद होता है, शायद ये दिमाग मेरा है, लेकिन किराय पर
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