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  • 2 weeks ago
जलवायु परिवर्तन की मार कछुओं पर पड़ी है. जिसकी वजह से ऑलिव रिडले कछुओं ने अब तक अंडे नहीं दिए हैं. ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के भितरकनिका नेशनल पार्क. जो देश का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव है.ये लगभग 672 वर्ग किलोमीटर  में फैला है. जो ब्राह्मणी, बैतरणी, देवी और धामरा नदियों के डेल्टा पर है. यहां नवंबर से ही कछुओं का आना शुरू हो जाता है. फरवरी में ये अंडे देना शुरू कर देते हैं. इनके अंडे देने की प्रक्रिया एक महीने बाद भी शुरू नहीं हो पाई है. इकोलॉजिस्ट इसको लेकर चिंतित हैं. अनुकूल वातावरण में एक ऑलिव रिडले कछुआ 100 से 150 अंडे देता है. जिनसे डेढ़ से दो महीने में बच्चे बाहर निकलते हैं. लेकिन इस बार इन कछुओं में कुछ ने बहुत कम अंडे ही दिए हैं. इन अंडों को जानवरों से खतरा है. वहीं कुछ शोधकर्ता कुछओं के अंडे देने में देरी को देरी नहीं मान रहे है.इनका कहना है कि कभी-कभी ये अप्रैल में अंडे देते हैं.

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00:30And in February, they are starting to give us an end.
00:34They are starting to give us an end.
00:37Ecologists are proud of it.
00:50Ecologists are proud of it.
01:00foreign
01:30प्रेल 2012 में ऑलिव रिडले कच्छूओ द्वारा बड़े पैमाने पर अंडे देने की प्रक्रिया हुई थी अभी उमीद बाकी है
01:37इस समय छित्पू टूप से अंडे देने की प्रक्रिया चल लही है वन विभाग इन अंडों को इकठा कर रहा
01:42है क्योंकि इस बात का डर है कि �
01:44बिखरे हुए अंडों को अक्सर कुत्ते, लोमडी और अंडे जानवर खा जाएंगे वन विभाग के राजकन का रेंच के एक
01:53अधिकारी का कहना है कि ओलिव रिडले कच्छूओ के अंडे देने में देरी हुई है लेकिन उमीद है कि जल्द
02:00ही अंडे दे देंगे लेकिन स�
02:04जब तक समूओं में अंडे देने के लिए टट पर नहीं आते जब तक उन्हें सुरक्षित महसूस नहीं होता
02:14Climate Change की वज़े से ओलिव रिडले कच्छूँ के स्तित्व पर खत्रा मढरा आने लगा है जवरत है परेवरण के
02:21प्रती जाग्रुक होनी की जिससे इन बेजुवानों को बचाया जा सके और एको सिस्टम को सुरक्षित किया जा सके
02:27इट भी भारत के लिए ओडिशा के केंद्र पाड़ा से राधाकांत महंती की रिपोर्ट
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