00:00भगत सिंग ने बटुकेश्वर दत्त को एक पत्र लिखा
00:02भगत सिंग ने पत्र में कहा
00:04वे दुनिया को ये दिखाएं कि क्रांतिकारी अपने आधर्शों के लिए मर ही नहीं सकते
00:10बलकि जीवित रहकर जेलों की अंधेरी कोठ्रियों में हर तरह का अत्याचार भी सह सकते हैं
00:16वो काम ऐसा है कि उसके लिए मरना पड़ा तो मरेंगे और जीना पड़ा तो जीवी लेंगे बरदाश्ट कर लेंगे
00:22जीना
00:23बगत सिंग ने उन्हें समझाया कि मृत्यू सिर्फ सांसारिक तकलीफों से मुक्तिका कारण नहीं बननी चाहिए
00:28फिर काला पानी की सजा के तहत बटुकेश्वरदत को अंडमान की सेलूलर जील भेजा गया
00:34उनको कैंसर हो गया बटुकेश्वरदत को
00:37अजादी के बात की बात है उनके इलाज के लिए पैसे किसने दी बताओ भगत सिंग की माने
00:42पंजाब के मुख्यमंतरी थे राम किशन जी उन्होंने कहा कि आपकी तबियत इतनी घराब है आप आप जा रहे हो
00:48हम कुछ कर सकते हैं आपके लिए वटुकेश्वरदत बोले मुझे कुछ नहीं चाहिए बस मेरा दा संसकार भगत सिंग की
00:55समाधी के बगल में करना
00:57ये मांगा जाता है अपने लिए
00:59कि मौत में भी किसी उचे की संगती रहे ये मांगा जाता है तुम पूछ रहे हो मुझे क्या मिलेगा
01:04ये मांगा जाता है
01:05कि जब मरूं तो मेरा दा संसकार भगत सिंग के बिलकुल बगल में करना है
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