00:07तरह दो तरह की बुनियादों पर खड़ा हो सकता है एक अहंकारिक और एक अध्यात्मिक अहंकार की बुनियाद जब होगी
00:15राष्ट्र की तो हम कहेंगे हमारा राष्ट्र सहब गोरे लोगों का है
00:22या जैसे नाजी जर्मिनी ने कहा था कि आर्यन लोगों का है और बाकी जितने लोग हैं वो सभी धरुदर
00:29के हैं उनको मारेंगे
00:30या जैसे पाकिस्तान और बांगलादेश के पक्ष में जिन्ना का तर्क था
00:37कि धर्म अलग है तो राश्टर अलग है बने राश्टर की बुनियाद जो है वो मजभब हो गया
00:44राश्टर की ऐसी ऐसी विचित्र बुनियादें हो सकती है
00:48कि आप चकित हो जाएं
00:51खान पान की विवस्ता हमारी क्या रही है इस आधार पर भी लोग अलग राश्टर बना लेते हैं कौन कैसी
01:00माननेता हैं
01:01किनके यहां पर प्रचलन कैसे हैं संस्कार कैसे हैं इस आधार पर भी राश्टर बनाया जा सकता है
01:09तो ये सब राष्ट्रियता के बड़े अहंकारिक, बड़े उथले आधार होते हैं
01:13और इन आधारों पर जब भी राष्ट्र बनेगा, वो राष्ट्र जब तक चलेगा, खुद को दुख देगा, औरों को दुख
01:20देगा, और बहुत लंबा चलेगा भी नहीं
01:22ठीक वैसे जैसे ही खत्तर में बांगलादेश अलग हो गया, क्योंकि उस राष्ट्र की बुनियाद ही गड़बड थी, जो टू
01:29नेशन थियोरी थी जिन्ना की, उन्होंने यही बोला था, हिंदूस और मुस्लिम्स और टू सेपरेट नेशन, तो उन्होंने राष्ट्रियता क
01:38जो आधार चुना था, वो आधार ही गड़बड था, इसी तरीके से राष्ट्रीता का एक अधार जबान भी हो सकता
01:43है, भाषा, कि हमारी भाषा अलग है, तो साहब हम यह हम अलग कभीले के हैं, तो हम अपने आपको
01:48एक अलग नेशन बोलेंगे, ऐसे राष्ट्र नहीं बन
02:04कि हम सब ग्यान को सम्मान देते हैं, कि हम सब कहते हैं कि उपर उपर से हमें कितनी भी
02:10भिन्नताएं हो, आर्थिक भिन्नताएं, समाजिक भिन्नताएं, सांस्कृतिक भिन्नताएं, भाषाई भिन्नताएं, हमें कितनी भी हो सकती हैं, लेकिन भीतर भीतर से
02:21हम सब की एक ही सच
02:34में तो वो राश्ट्रियता का फिर जरा तगड़ा मस्बूत सशक्त आधार बनता है तो सिर्फ यह कह देने से बात
02:45नहीं बनती कि राश्ट्र है यह भी पूछना पड़ता है कि उस राश्ट्रियता का आधार क्या है
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