00:00पढ़ाम चारी जी एक और आरोप है अध्यात्मिक व्यक्ति के कोई गून दिखते नहीं है जब देखो तब सेक्स के
00:07उपर बात करते हैं बेशरम टाइप से हैं ऐसे आरोप लगते हैं
00:17पेशरम तो मैं शान से हूँ मेरी पुरी सीखी है यह मैं अकेला क्यों पेशरम रहा हूं सब लोग हो
00:23जाओ इसी में कुछ विशेश नहीं सब तीजे हैं तो जैसे सब विशेयों पर बात करता हूं तो वैसे ही
00:31जब कोई सवाल आता है कोई मुद्दा उठता है तो सेक्स पर भ
00:41उम्रा है अटाय मुझसे तुम हाखर कर अपने बाल की बात करो एक इस बात लूह कर लूए और फिर्टनी
01:04की कर लोगे तो कर लूए वैसे ही
01:06तो अगने देव मना थोड़ी कर देते हैं कि यो गंदा वाला हिस्सा हम थोड़ी स्पर्श करेंगे
01:12उनके लिए तो सब भौतिक पदार थे मिट्टी है मिट्टी राक हो गई मिट्टी मिट्टी हो गई कोई भेद नहीं
01:17है क्या अंतर है यह है पर उनकी सोचो जिनके सामने जैसे ही ऐसी एक साया और वो ऐसे हो
01:24जाते हैं अध्यात्म के नाम पर जो नाड़े बाजी चली है ना आ
01:40मिलाओं पर ही लगता है वैसे हुमारा ना टाइट था पर यही रमभा उर्वशी आ करके सारा खेल खराब कर
01:47देती हैं तो इंको बंधन नमें रखो और हाब में रखो इनको घुंगट में रखो यह हमारा ब्रहंचरे खर आप
01:53कर देती ये नाणिनकर का द�ार है रोड़ सा
01:57हमारा बंधन है उसी बेड़ी का इस्तिमाल करके समाज हूटे से बांध कर रखता है तुमको
Comments