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Transcript
00:00भारत में जो हाथ के काम होते हैं ज्यादा उनमें मुस्लिम समुदाय आगे रहता है यह का चाहे लकड़ी का
00:07काम हो चाहे मेसंडरी हो और इस तरह के प्लम्बिंग हो यह सारे काम बड़ा मुश्किल हो जाता है कोई
00:16भी काम करना
00:18एक महीना अब रमजान चल रहा है वहां आपको कारीगर नहीं मिलेगा एक महीना आपका जो भी काम है अब
00:25ठप पड़ा रहेगा आपको थोड़ा फरनीचर का काम कराना आप नहीं करा सकते आपको पुताई का काम कराना आप नहीं
00:32करा सकते क्यों कारीगर उपलब्ध नहीं हैं
00:34तो सब अपने गाउं गए हैं, इद मनाने के लिए, कारीगर नहीं है, गाउं गए हैं, इद मना रहे हैं,
00:40उन्हें तो यह चाहिए कि त्योहार आया है, तो मैं दूनी तेजी से काम करूँगा, क्योंकि काम ही तो सिंदगी
00:45है न मेरी, कर्म ही धर्म है, हमारे हैं यह होता है कि �
00:49जब त्योहार आता है तो हम अपना कर्म बिल्कु रोक देते हैं।
00:53और अगर आपका कर्म ऐसा है कि उसको रोकना पड़ता है तो फिर वो कर्म करने लायक है नहीं रहा
00:58होगा।
00:59जिस कर्म को त्योहार पे रोकना पड़े इसका मतलब वो कर्म त्योहार से मेल नहीं खारा ना
01:05त्योहार का मतलब होता है कोई ऐसी चीज जो पूजने लायक है
01:08त्योहार का संबंद किसी ऐसे से जो पवित्र है
01:13पवित्र दिन पर अगर कुछ रोकना पड़ रहा है तो वो चीज कैसी होगी
01:17अपवित्र होगी
01:17अगर पवित्र दिन पर काम रोकना पड़ रहा है तो निश्चित ही आपका काम क्या था
01:22बड़ा अपवित्र था
01:24तो अपवित्र काम आप साल भर करते रहे
01:26उसके बाद फिर आप पवित्र उत्सव मना ही क्यों रहे हो
01:30अगर वास्तों में आपका जीवन पवित्र हो
01:32आपका कर्म पवित्र हो
01:33तो त्योहार तो आप मनाओगे
01:35और ज्यादा काम करके न
01:38वो कहेगा आज मेरा धार्मिक त्योहार है
01:40आज हम डबल काम करेंगे
01:42ये होगा उसका उत्सव मनाने का तरीका भी
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