00:00जो सचमुच आईसाई के सरगना डाउद इबराहीम की गोद में बैठ के उनके साथ अपराद करता रहा है
00:07उसको तो सरकार जुलुआ जुला रही है
00:12उसके नाम पे फिलिम नहीं बन रही है
00:14सम्विधान की सपत लेकर कानून की धजियां उड़ा करके
00:18सरकार में बैठे हुए और सरकार के जो हैंड है
00:23ये करमचारी ये गुलामी की मानसिक्ता से
00:28सरकारी पार्टी के राजनेताओं की एक शाके अनुसार काम कर रहे हैं
00:32अब ये शौक होगे आया फिल्मों वालों को भी थूपि
00:35उप भी बना सकते हैं चला सकते हैं
00:38अब वो फिल्म तो हमने नहीं देखा है, हमारे देश में फिल्म जगत में काम करने वाले लोग कोई भी
00:52कहानी बनाते रहते हैं।
00:55फिल्म के कहानी किसी सत्य घटना पे आधारित नहीं होती, वो पहले ही लिखके चलते हैं।
01:52तो ये नाम उठाला जा सकता है।
01:54साथ अपराद करता रहा है। उसको तो सरकार जुलुआ जुला रही है। उसके नाम पे फिल्म नहीं बन रही है।
02:03तो आम जनता में तो बात समझ में लोगों को आ रही है कि किस तरह से सम्विधान की स्टपत
02:11लेकर कानून की धजियां उड़ा करके सरकार में बैठे हुए।
02:17और सरकार के जो हैंड हैं ये करमचारी ये गुलामी की मानसिक्ता से सरकारी पार्टी के राजनेताओं की एक शाक
02:26अनुसार काम कर रहे हैं।
02:29अब ये शौक हो गया है फिल्मों वालों को भी थो भी बना सकते हैं चला सकते हैं।
02:34रांग साइड अगर जाएंगे तो मैं समझता हूँ उनके खलाब भी कानून अपनी कारवाई करेगा।
02:41अभी तो अच्छा लग रहा है ठीक है चलाइए।
02:43आपको भी विग्यापन विग्यापन का पैसा मिले तो धुरंदर फिल्म का परशाद है।
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