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00:00प्रेणाम अचार जी मैं 11-12 साल से नौरात्री का ब्रत करते आई हूँ आपसे सीखा है कि जो हम
00:06निसब करते हैं बगवान के नाम पे घी का हवन करते हैं हल्वा पूरी चढ़ाते हैं और दुर्गा सबसती का
00:13भी पाट करते आई हूँ मम्मी का फोन आया था दो दिन पहले बो
00:19मैं बोली नहीं इस बार तो मैं व्रत नहीं रहूंगी इस नौरात्री क्या किया जाए कि महा माया मोक्षेदाइनी बने
00:25इस नौरात्री दुर्गा सब्तशती को पूरे हृदय से पूरी निष्ठा से समझा जाए जी नौ दिन बिलकुल ठीक हैं नकम
00:36न जाता पाठ करने के �
00:37और पाठ माने यह नहीं कि बस संस्कृत बोल दी या सुन दी पूरे हृदय से उसको समझना है पूरे
00:42हृदय से यही व्रत है सिर्फ रिचूल से काम नहीं चलने वाला भाई जो आपने जो लो ही बोला घी
00:49शक्कर हलवा कूड़ी वापको करना है तो करें पर वो परयाप्त क
00:53किसी हालत में नहीं है और कुछ ऐसा जिसमें मा के ही जो बच्चे हैं तब पशु पक्षी आप उनको
00:59खानी पहुंचाएंगे तब तो मा को बिलकुल अच्छा नहीं लगने वाला बिलकुल भी नहीं यह जो समूचा विस्तार है इसी
01:05को मा बोलते हैं इसी में आप उठते हो
01:07लहर की तरह है इसी में आप गिर जाते हो लहर की तरह है जन्म भी वही देती हैं मृत्यू
01:12भी वही देती हैं और मुक्ति भी वही देती हैं आज की जितनी समस्याएं हैं समकालीन समाज की आदमी के
01:20पगलाने से लेकर क्लाइमेट चेंज तर तुम्हें सब का मूल वहां समझ
01:24में आएगा जब ये सब राक्षा समाप्त हो जाते हैं तो इनकी समाप्ति के क्या लक्षण वहां बताए जाते हैं
01:31नदिया साफ हो गई पहले की तरह बहने लगी सूरज की रोचनी पहले जैसे हो गई धुआ छट गया यह
01:37असुरों का काम था कि उन्होंने प्रक्रति पूरी �
01:40बरवाद कर रखी थी और मा प्रक्रति ही है असुरों का संघार माने प्रक्रति को उसके निर्मल रूप में वापस
01:49लाना और प्रक्रति के साथ छेड़ छाड़ करते हो तो माने जो करा सब इनके साथ चुम्बनिशुम वगारा के साथ
01:55महीशा सुर वही फिर होता है अभी ज
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