00:00सब मेरे एक क्वेस्चन है कि अगर कोई वीक है और वो अपने लिए स्टांड नहीं ले पा रहे हैं
00:04तो उसे तो मजबूरन समाज का हिस्सा बनना ही पड़ेगा
00:09वीक कोई नहीं होता नलायक होते हैं
00:21दुर्बल होने के बीमार होने के अंगेनत लाव होते हैं भाई बहुत लाव होते हैं
00:27चिडिया कह रही है सोने की सलाखे हैं खाने को भी अच्छा मिल जाता है और कोई गिद्ध बाज चील
00:35आकर के हमला भी नहीं कर सकते पिंजड़ा बढ़ियां चीज है
00:39पिंजड़ा बढ़ियां चीज है और फिर बोलती है मैं क्या करूँ मैं तो मजबूर हूँ तु मजबूर नहीं है तुने
00:46सौधा करा है
00:48तो आप अगर मजबूर हो तो ये भी आपका चुनाव है कि आप अपने आपको मजबूर रखना चाहते हो
00:53जिस दिन भीतर से आग उठेगी कि ऐसी जिंदगी नहीं जीनी सारी मजबूरियां चल जाएंगी
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