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Transcript
00:00पिता जी ने बुलाया एक दिन तुबा सुबह और बड़े गंभीर स्वर में बोले वो बिंदिया बड़ी हो गई है
00:07उसके ब्याह का कुछ देखना पड़ेगा और तुम हो 25-27 साल के छोटी बेहन है 20 साल की और
00:16उन्होंने इतनी गंभीरता से बोला
00:19कि तुमको लगा कि बात सही होगी नहीं तो ये आदमी किसी मुर्खता की बात पर इतना गंभीर कैसे हो
00:26जाता तो तुमको लगा ये बात सही होगी तो तुम्हारे करतवे बन गया आप बिंदिया की शादी कराना अब भुक
00:32तो बिंदिया के दहेज ही कठा कर रहे हैं बिंदि
00:48पुर्ण नहीं होता है अगर जब वोट दे रही हो तो हम जाकर के उसका बटन दबाएं बिन्दिया को अगर
00:52ड्राइविंग लाइसेंस मिलना होगा तो उसकी टेस्टिंग होगी तुम्हारी हमारी नहीं होगी ना बाप की ना भाई की बिन्दिया मरेगी
00:59तो साथ में ना बा�
01:15इसे बड़े बंधन होते हैं उन्हीं बंधनों से फिर डर आता है और पचास और चीज़ें कुछ ऐसे काम जो
01:21करने होते ही हैं उनको तुम ना करो फिर देखो जिन्दगी कैसी मस्त हो जाती है
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