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  • 7 months ago
अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में एक प्रस्ताव पेश किया है. इसमें 25 मार्च, 1971 को पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगी संगठन जमात-ए-इस्लामी द्वारा बंगाली हिंदुओं के खिलाफ किए गए अत्याचारों को 'युद्ध अपराध और नरसंहार' के रूप में मान्यता देने की मांग की गई है. ओहायो से डेमोक्रेट कांग्रेसी लैंड्समैन ने शुक्रवार को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में यह प्रस्ताव पेश किया और इसे विदेश मामलों की समिति को भेज दिया गया है. इस प्रस्ताव में कहा गया है कि 25 मार्च, 1971 की रात को पाकिस्तान सरकार ने शेख मुजीबुर रहमान को जेल में डाल दिया और उनकी सैन्य टुकड़ियों ने जमात-ए-इस्लामी की विचारधारा से प्रेरित कट्टरपंथी इस्लामी समूहों के साथ मिलकर पूरे पूर्वी पाकिस्तान में 'ऑपरेशन सर्चलाइट' नामक एक व्यापक कार्रवाई शुरू की. इसमें आम नागरिकों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया गया. इसमें कहा गया है कि 28 मार्च, 1971 को ढाका में अमेरिका के कॉन्सल जनरल आर्चर ब्लड ने वॉशिंगटन को 'चुनिंदा नरसंहार' (Selective Genocide) शीर्षक से एक टेलीग्राम भेजा, जिसमें उन्होंने लिखा था, 'इसके अलावा, पाकिस्तानी सेना के समर्थन से, गैर-बंगाली मुसलमान गरीब लोगों के इलाकों पर सुनियोजित तरीके से हमले कर रहे हैं और बंगालियों तथा हिंदुओं की हत्या कर रहे हैं.' लैंड्समैन ने बताया कि 6 अप्रैल, 1971 को जिसे बाद में 'ब्लड टेलीग्राम' के नाम से जाना गया कॉन्सुल जनरल ब्लड ने इस संघर्ष पर अमेरिकी सरकार की आधिकारिक चुप्पी के खिलाफ एक आपत्ति भेजी, जिस पर ढाका स्थित कॉन्सुल जनरल कार्यालय के 20 सदस्यों के हस्ताक्षर थे. लेकिन हमने इसमें दखल न देने का फैसला किया है यहाँ तक कि नैतिक तौर पर भी नहीं इस आधार पर कि अवामी संघर्ष, जिसमें दुर्भाग्य से 'नरसंहार' शब्द लागू होता है, पूरी तरह से एक संप्रभु राष्ट्र का आंतरिक मामला है. उस समय के राजनयिक ने टेलीग्राम में कहा. लैंड्समैन द्वारा पेश किया गया प्रस्ताव प्रतिनिधि सभा से आग्रह करता है कि वह 25 मार्च, 1971 को बांग्लादेश के लोगों के खिलाफ पाकिस्तान के सशस्त्र बलों द्वारा किए गए अत्याचारों की निंदा करे.

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00:03अमेरिकी सांसद ग्रेग लेंड्समेन ने अमेरिकी प्रतिनिधी सभा में एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें उन्होंने 25 मार्च 1971 को पाकिस्तानी
00:13सेना और जमाते इसलामी द्वारा बंगाली हिंदूों के खिलाप किये गए अत्याचार को युद्ध अपराद और नरसंगार
00:49गोशित करने की मांग की है।
01:19अगरिकों का बड़े पैमाने पर नरसंगार किया गया।
01:21के नाम से जाना गया।
01:22कोंसूल जनरल ब्लड ने इस संगर्ष पर अमेरिकी सरकार की आधिकारिक चुप्पी के खिलाप एक आपत्ती भेजी।
01:30जिस पर ढाका इस्थित कोंसूल जनरल कार्याले के 20 सदस्यों के हस्ताक चरते लेकिन अमेरिका ने इसमें दखलना देने का
01:38फैसला किया।
01:45प्रतिनिधी सभा से आगरा किया गया है कि वो 25 मार्च 1971 को बांगलादेश के लोगों के खिलाप पाकिस्तान के
01:53सौशस्त्र बलों दवारा किये गए अत्याचारों की निंदा करे।

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