00:00बानियद्र जी एक बड़ा सवाल ये है कि युद्ध का खेती पर क्या प्रभाव हुगा देश के किसानों ने हमारे
00:11अन्न के भंडार भर रखे हैं इसलिए भारत के पास परियाप्त खाध्यान है हमारा ये भी प्रयास है कि खरिप
00:21सीजन की ठीक से बुगाई हो सके सरकार ने �
00:25बिते सालों में आपां स्थिती से निपड़ने के लिए खाध की परियाप्त व्यवस्ता भी की हैं अतीत में भी हमारी
00:35सरकार ने दुनिया के संकटों का बोच किसानों पर नहीं पढ़ने दिया था
00:44कोरोना और उस समय के उद्ध्यों के दोरा उस समय भी ग्लोबल सप्लाई चेन में डिस्रप्शन आ गई थी
00:57दुनिया के बाजार में यूरिया की एक बोरी तीन हजार रुपय तक पहुँच गई
01:04लेकिन भारत के किसानों को वही बोरी तीन सो रुपय से भी कम किमत उपलब्द कराई गई
01:13अध्यक जी देश के किसानों को इस प्रकार के संक्टों से बचाने के लिए भी बीते वर्षों में अनेक कदम
01:23उठाए गए हैं
01:24पिछले एक दसक में देश में छे यूरिया प्लांट शुरू किये गए हैं इस से सालाना चिहतर लाग मेट्रिक टन
01:35से अधिक की यूरिया प्रोडुक्शन केपरिसिटी जुड़ी है इस दोराँ डी अपी और एनपी के एस जैसी खाद का गरेल
01:46उत्पादन भी करी पचास ला
01:54खाद के आयात को भी डावर्शिफाई किया गया है ऐसे ही डी एपी और एनपी के आयात के लिए भी
02:03हमने अपने विकल्पों को विस्तार किया है अत्यगी सरकार ने देश के किसानों को मेडिन इंडिया नेनो इर्या का विकल्पी
02:14दिया है सरकार किसानों को प्राकृतिक खे
02:24योजना के तहट किसानों को 22 लाग से जादा सोलर पंप दिये गए हैं इससे भी डीजल पर उनकी निर्भरता
02:34कम हुई है
02:35मैं सदन के माध्यम से देश के किसानों को विश्वात दिलाता हूं कि सरकार किसानों की हर संभव मदद करती
02:47रहेगी
02:54�ешьषे लादनों के पादर ल 오랜만े ओर विश्वान के अनकी विश्वाम से लिज है विभरतान से इचिछ एग टार विखिव
03:00ऑनकी य है