Skip to playerSkip to main content
मुंबई के जुहू बीच पर एक अनोखा नज़ारा इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां पृथ्वी राजपोहला नाम का एक युवक लोगों का ‘इमोशनल सपोर्ट’ बनकर बैठा है। वह कोई सलाह नहीं देता, बस लोगों की बातें सुनता है—और इसके लिए पैसे भी लेता है। ₹250 से लेकर ₹1000 तक की फीस के साथ उसका ‘दुख सुनने’ का रेट कार्ड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कोई इसे शानदार स्टार्टअप आइडिया मान रहा है, तो कोई इसे समाज की संवेदनहीनता का प्रतीक बता रहा है। इस पहल ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या आज के समय में हम इतने अकेले हो गए हैं कि अपनी बात कहने के लिए भी पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं? यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस समाज की है जहां सुनने वाले कम होते जा रहे हैं।

An unusual scene at Mumbai’s Juhu Beach has been grabbing attention lately, where a young man named Prithvi Rajpohla is offering “emotional support” to people. He doesn’t give advice—he simply listens, and charges for it. With a rate card ranging from ₹250 to ₹1000, his “listening service” has gone viral on social media. While some see it as a brilliant startup idea, others view it as a reflection of growing emotional disconnect in society. This initiative raises a serious question—have we become so lonely that we now have to pay someone just to be heard? This story is not just about one individual, but about a society where people willing to truly listen are becoming increasingly rare.

#Mumbai #JuhuBeach #MumbaiViral #ViralVideo #EmotionalSupport #ListeningService #PaidListener #MentalHealth #Psychology #Philosophy #IndiaViral #BeachStory #HumanConnection #ModernTherapy #StartupIndia #SocialExperiment #EmotionalWellbeing #TalkItOut #UrbanLife #MentalHealthAwareness #IndiaNews #ViralIndia #BeachVibes #UniqueBusiness #CheapTherapyDebate #MumbaiStories

~HT.410~PR.516~GR.538~ED.108~

Category

🗞
News
Transcript
00:09सोचे, आप एक भीटभाड वाले शहर में हैं, हजारों लोग आपके आसपास से गुजर रहे हैं, लेकिन आपके दिल में
00:15एक बात है, बोज है जिसे आप किसी को बताना चाहते हैं
00:19आप अपना फोन उठाते हैं, कॉन्टाक्ल स्क्रोल करते हैं, लेकिन रुक जाते, क्योंकि आपको समझ नहीं आता कि आपको बिना
00:26जज़ किया आखे सुनेगा कौन
00:2921 सदी की वो बिमारी है, जुसका कोई टाबलेट नहीं बना, लेकिन मुंबई के जूहू बीच पर इन दिनो एक
00:36श्रक्स बैठा है, जो आपकी इसी अकेलेपन की दवा बेच रहा है
00:40ना कोई दवाई, ना कोई प्रवचन, सिर्फ एक कान, जी हाँ, वो पैसे लेकर आपकी बाते सुनता है
00:46सोशल मीडिया पर इन दिनो एक वीडियो आख की तरह फैल रहा है
00:50वाइरल हो रहा है इस वीडियो में दिख रहा है श्रक्स का नाम है पृत्वी राज पोहला
00:55पृत्वी मुंबई के मशूर जूहू बीच पर एक बोर्ड लेकर बैठते हैं
00:59जिस पर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा है किसी को अपना दुख सुनाना है तो मैं सुन सकता हूँ
01:04लेकिन हैरानी की बात ये नहीं है कि वो लोगों की बाते सुन रहे हैं
01:09बड़ी ये है कि उन्होंने इसके लिए एक रेट कार्ट तक तयार कर लिया है
01:12जैसे किसी रेस्टरॉन में खाने का मेन्यू होता है वैसी पृत्वी के पास दुख सुनने का भी मेन्यू है
01:18आई आपको समझाते हैं कि पृत्वी की सर्विस की कीमत क्या है
01:22अगर आपकी समझ से छूटी या आप बस एक हलकी फुलकी बातचीत करना चाते हैं तो कीमत है 250 रुपे
01:28अगर परिशानी बड़ी है गेहरी है और आपको लगता है कि उसे समझाने में वक्त लगेगा तो लगेंगे 500 रुपे
01:35और सबसे चौकाने वाला हिस्सा अगर आपका दिल भरा हुआ है और आप बस किसी के सामने बैट कर जी
01:40भर कर रोना चाते हैं तो उसके लिए पृत्वी हजार रुपे चार्ज करते हैं
01:44अब आपके बन में सवाल आ रहा होगा कि ये कोई मजाक है या फिर ठगी करने का कोई नया
01:49तरीका हमने जब इसकी तहक्तिकात की तो पृत्वी का पक्ष काफी अलग था पृत्वी ने साइकोलोजी और फिलोसिपी की पढ़ाई
01:57की है उनका कहना है कि आज की भाग दोड़ �
02:00की जिन्दगी में हर कोई अपनी सुनाना चाहता है पर किसी के पास दूसरे के सुनने का वक्त ही नहीं
02:05रोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं क्योंकि उनके पास एमोशनल आउटलेट है ही नहीं पृत्वी सेर्फ इसको एक धंदा
02:12नहीं बरकि एक सोशल सपोर्ट की तौ
02:26का करने आते हैं जाहिर है इस अनों के काम ने इंटरनेट को दो हिस्सों में बाट दिया है एक
02:31पक्ष कहता है कि एक शांदास स्टार्ट अप आइडिया है कम से कम कोई तो है जो प्रफेशनल तरीके से
02:36सुनने के लिए तैयार है दूसरा पक्ष उसे खतरनाक मानता है विशे
02:54काये तक नसीब नहीं होती है लेकिन इस खबर के पीछे एक बहुत कड़वा सत्च छिपा है विथवी का ये
02:59चोटा सा बोड हमारे समाच भी एक पड़ी नाकामी को दिखाता है क्या हम इतने अकेले हो गए है कि
03:04हमें अपना दुख सुनाने के लिए भी जेब धीली करनी प�
03:22जब आपका कुल दोस्त आपसे कहे कि यार कुछ बात कर ली है तो अपना फोन साइड में रखकर उसकी
03:27सुन लीजेगा वना बजार तो हर चीज की कीमत लगाने के लिए तैयार ही बैठा है जाते जाते आपसे एक
03:34और सवार अगर आपको अपनी सबसे बड़े परिशानी किस
03:37अंजान को सुनानी हो तो क्या आप 500 रुपए खर्च करेंगे क्या फिर आप अब भी अपने पुराने दोस्तों पर
03:42भरुसा करते हैं अपनी राए हमें कमिंग में जरूर बताए
03:47सबस्क्त करेंगे करेंगे बताते हैं
Comments

Recommended