00:00जैसे अफगानिस्तान का है कि वहाँ पर विमन को एक अब्जक की तरह ट्रीट किया जाता है ना उन्हें कोई
00:06सम्वेधानिक अथिकार प्राप नहीं कानूनी अधिकार उन्हें मानसिक वेदना जो मिल रही है उन्हें कभ इसका चुनाव किया था
00:12दिख नहीं रहा क्या? यह सम नियम अगर पुरुष सत्ता ने बनाई है तो पुरुष सत्ता रात को कहां लोट
00:18कर आती है? ऐसे पुरुषों के साथ एक ही विस्तर पर सोना चुनाव है या नहीं है? क्यों ऐसे पुरुषों
00:24को खाना बना कर देते हो? मैं बताता हूँ क्या च�
00:29तो थोड़ी बहुत तो सुक सोजधा मिली रहेगी? या कम से कम पीटे नहीं जाएंगे? खाना बना कर नहीं देंगे?
00:35इनके साथ विस्तर पर सोएंगे नहीं? तो पीटे भी जाएंगे? तो चुनाव है कि नहीं है? कि नहीं पिटना चाती?
00:40इस्थिती इतनी खराब हो रही
00:43भीड़ जाओ जान दे दो और सब को जान देने की सरुवत भी नहीं पड़ेगी? सौपचास भी ऐसी शूर इस्तरियां
00:51खड़ी हो जाएं तो यह सब पुरुष घुटने टेक देंगे? आप नहीं जानते पुरुष मानसिक रूप से शारेक रूप से
00:58किस हद तक इस्तरी प
01:12अब इस्तर देंगे देखते हैं क्या कर लेंगे पुरुष तो चुनाओ है या नहीं है? चुनाओ सदा होता है चुनाओ
01:19जितना कठिन होता है उतनी ही बड़ी मुक्ति उसके साथ जुड़ी भी होती है
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