00:00जब गुर्णानेक देव जी जब गुर्णानेक देव जी तो उससे उलट कुछ पाथ कर रहे हैं
00:17महापुरुषों के जीवन में घुस करके देखना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि आपको यह नहीं दिखाई देगा कि उनका कर्म का
00:25केंद्र क्या है
00:26आप बस बाहर से देख पाऊगे उन्होंने क्या किया ठीक और कर्म तो किनी स्थितियों में कोई भी हो सकता
00:33है ठीक हो
00:33तो आप उनका कर्म देखोगे उनके कर्म को समझोगे आप अपने केंद्र से और फिर आप उसमें जो नतीजा निकालोगे
00:40और गड़ड़ोगा
00:41इसलिए उनके जीवन में बहुत हमें तांग जाक नहीं करनी चाहिए
00:45हमें ये देखना चाहिए कि उन्होंने हमें हमारे लिए कौन से सिधांत दियें
00:50शिक्षक आपको सीख दे रहा है उसकी सीख पर केंद्रित रही है शिक्षक के विक्तगत जीवन में घुस करके आप
00:59वहां पर ढूंड़े उसने ये किया उसने वो किया और फिर अपनी सुधा नुसार आप तहें कि अच्छा बुद्ध ने
01:05भी तो कभी कह दिया था कि अगर
01:07मास यूही मिल गया है तो खालो तो ये एक तरीके का वयोरिजम है बचने का तरीका है कि उनकी
01:14निजी जिन्दगी में दखल अंदाजी करो उन्होंने पता नहीं पहली बात तो उस समय पर इतिहास इतने विवरण के साथ
01:20और इतना साफ साफ लिखा भी नहीं जाता था तो आ
01:38कि मतलब ही होता कि कोई नहीं जानता कि कहां से आई है उसको हम क्या मानने लग जाते है
01:44कि वो फैक्चुल हिस्ट्री है तो पहले तो उसको हम फैक्चुल हिस्ट्री बराएंगे और फिर कहेंगे उन्होंने ऐसा करा तो
01:49हम भी करेंगे और जोनोंने सीख दिया है उस पर क्यो
02:06तो भी इसे लिए प्रस्थान्त्रई का हिस्सा हो जाती है, और शुति के संकक्ष रखी आती है,
02:10लेकिन भागवत पुरान तो शुति के संकक्ष नहीं रखा जाएगा,
02:13क्यों कि एक में कृष्ण की सीख है और दूसरे में कृष्ण के विशय में कहानिया है,
02:19हमारा रस कहां जादा हो जाता है कहानी में जादा रस हो जाता है हमारा और गरबन हो जाती है
02:24और शृति क्या है
02:41ध्यान से देखो गौर से सुनो ये शृति है और ये सब क्या है
02:46झाल
02:47झाल
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