00:00जैसे कि पैसे की मुझे जरूरत है, मैं ज्यादा खर्चानी करते हूँ मुझे जैसे मेकप करना या एक्स्ट्रा चीजे खरीदने
00:06का नहीं है, जितना जरूरत है मैं उतना ही मतलब सुरू सिरा है
00:10जरूरी चीज के लिए अगर मैं इनसे पैसे मांगों, मांगती थी, अब तो नहीं मतलब मांगती थी तो यह जैसे
00:16मुझे मना कर दिया नहीं मेरे पास पैसे नहीं और सेम डे रात को उससे मतलब हाजारो रुपे का ड्रिंक
00:22करके आगे
00:24तो उसके लिए मैं रही हूँ अभी भी रोती हो
00:29जब हम किसी से शादी करें तो हमें यह याद रहे कि इंसान तो गल्तियों का और स्वार्थ का पुतला
00:37है
00:37यह दुनिया तो पार्थ की ही है
00:40और जब यह दुनिया स्वार्थ की है, हमको पता है
00:43तो अपना बल नहीं छोड़ना चाहिए
00:46ऐसा कोई निश्काम प्रेमी
00:48जो अपने स्वार्थ को बिलकुल भुला करके
00:51बस दूसरे से प्रेम करे
00:52ऐसा दुनिया में होता नहीं है, हमारी कलपनाओं में होता है, हमारी चाहत में होता है, पर हकीकत में नहीं
00:59होता है, तो जो ऐसा नहीं होता है, तो अपना बल कभी छोड़ना नहीं चाहिए, अपने आपको कभी लाचार, पंगू,
01:06असहाय, डिपेंडेंट नहीं बना लेना चा
01:22तो किसी से प्रेम भी कैसे कर पाएंगी, पती से भी प्रेम कर पाना बड़ा मुश्किल हो जाएगा
01:26हम सोचते हैं कि दूसरे कि हम ताकत छीन लेंगे तो प्रेम बचा रहेगा नहीं
01:30आप जिसकी ताकत छीन रहे हो वह आपसे प्रेम नहीं कर पाएगा प्रेम भी ताकत मांगता है
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