00:00एक बहुत अमीर व्यापारी था, जिसके पास दौलत तो बहुत थी, पर उसकी आँखों में ऐसा दर्द उठा कि उसका
00:08चैन छिन गया, बड़े-बड़े डॉक्टर आये हजारों दवाईयां दी गई पर आराम कहीं नहीं मिला, ठक हार कर वह
00:12एक ज्यानी साधू के पास पहु
00:29व्यापारी ने आव देखा नताओ, उसने हजारों मजदूर बुलाए और पूरे महल को हरे रंग से रंगवा दिया, कपड़े हरे,
00:36परदे हरे, यहां तक की नौकरों के जूते भी हरे, उसने पानी की तरह पैसा बहा दिया ताकि उसे हरा
00:41रंग ही दिखे, कुछ दिनों बा
00:59दी, साधू जोर से हसे और अपनी जोली से एक छोटी सी चीज निकाली, मूर्ख पूरी दुनिया को रंगने की
01:08जरूत नहीं थी, तुम बस चंद रुपयों का यहारा चश्मा पहन लेते, तो पूरी दुनिया अपने आप भरी हो जाती,
01:12दोस्तों जिन्दगी भी ऐसी ही है
01:14हम अकसर दुनिया को बदलने की कोशिश करते हैं ताकि हम खुश रह सकें, जबकि जरूरत सिर्फ अपना नजरिया बदलने
01:21की होती है
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