00:00उडिशा की सियासत में उस वक्त एक बड़ा भूचाल आ गया जब कॉंग्रिस के तीन विधायकों ने अपनी ही पार्टी
00:06की पीठ में छुरा घूंप कर राज्य सभा चुनाव की पूरी बाजी ही पलगती।
00:10ये कोई सामान ने राजनीतिक मतभेद नहीं था बलकि एक सोची समझी बगावत थी जिसने बीजेपी समर्थित उमीदवार की जीत
00:18का रास्ता साफ कर दिया।
01:09लडाई का मन बना लिया है।
01:10दिलीप रे ने वो जीत हासिल की जिसकी उमीद कॉंग्रिस बीजेडी गटबंधन को दूर दूर तक नहीं थी।
01:16इस धोखे ने पूरी विपक्षी रननीती को धाराशाही कर दिया और कॉंग्रिस के खेमे में मातम पसरा दिया।
01:51जैसे ही इस विश्वास खात की खबर बाहर आई।
01:52कड़े शब्दों का इस्तमाल करते हुए यहां तक कह दिया कि ये विधायक भेड बक्रियों की तरह बिख गए हैं।
01:58ये बयान साफ दर्शाता है कि कॉंग्रिस इस चोट से कितनी आहत है।
02:03अब कॉंग्रिस के वेल निलंबन तक ही नहीं रुकने वाली है।
02:06पार्टी इन बाग्यों की विधायकी चीनने की पूरी तैयारी में है।
02:09कॉंग्रिस विधायक दलकेनेता रामचंद्र कडमा ने विधान सभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर
02:14समविधान की दस्वी अनुसूची यानि दल बदल विरोधी कानून के तहत इन तीनों की सदस्यता रद करने की मांग की
02:21है।
02:21कॉंग्रिस का तर्क है कि जब विप जारी कर दिया गया था तो उसका उलंगन सीधे तोर पर सदस्यता गवाने
02:27का आधार बनता है।
02:28फिलहल उडीसा की राजनीती में इन तीन चहरों को गददार के तोर पर पेश किया जा रहा है।
02:34और कॉंग्रिस ये संदेश देने की कोशिश कर रही है कि अनुशासन हींता और धोके के लिए पार्टी में कोई
02:39जगा नहीं है।
02:41ये पूरी कहानी भारतिय राजनीती के उस कड़वे सच को उजागर करती है जहां कुरसी और रसूख के लिए विचार
02:47धारा की बली चड़ाना अब एक आम बात हो गई है।
Comments