Skip to playerSkip to main content
  • 2 days ago
जयपुर की विरासत, जिसने पूरे देश को कई कलाकार दिए, आज बदहाली की कहानी कह रहा है. पढ़िए...

Category

🗞
News
Transcript
00:15राजधानी जैपूर में रविंद्र मंच केवल एक सभागार नहीं, बल्कि ये शेहर की सांस्कृतिक आत्मा का केंद्र रहा है
00:23दशकों तक यहां से नाटक, संगीत और नित की ऐसी परंपरा विक्सित हुई, जिसने न केवल जैपूर, बल्कि पूरे देश
00:32को कई कलाकार दिए
00:40विडम्बना ये है कि जिस मंच ने सैकड़ों कलाकारों को पहचान दी, वही आज उपेक्षा और बधाली की कहानी कह
00:48रहा है
00:50रविंद्र मंच राजस्थान की राजधानी में ऐसा इस्थान है, जो कला और संस्कृति को जिसने पुष्पित किया, पल्लवित किया, संडक्षन
00:58किया, नहां से बहुत बड़े बड़े नाम निकले, और ये वह जगे है जहां पर हम शजन कर सकते हैं
01:05अगर जैपुर की राजधानी में रविंद्र मंच का हाल बदहाल है, प्रशाश्थनी का व्यवस्ताओं का शिकार है, इसके लिए भी
01:10पैसे की कमी है, तो मुझे लगता है कि कला और संस्कृति की दुआई देने वाली सरकार को इस वारे
01:16में पहले सोचना चाहिए, क्योंकि
01:17जैपुर तो वैसे भी कल्चर का बहुत बड़ा स्थान रहा है, आज हम यहां आए हैं तो देख बहुत मन
01:22भर गया, लगभग 50 साल से मैं इस जगह से जुड़ा हुआ हूँ, ना यहां एसी चल रहा है, ओल
01:28में पंखे नहीं है, टॉलेट्स नहीं है, दर्शक जो आए हैं व
01:47और कला शजन धर्मियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है, रविंद्र मंच की स्थापना वर्ष 1961 में देश के
01:54पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नहरू ने की थी, इसका उद्देश्य देश भर में कला, साहित्य और रंग मंच को नया
02:02मंच देना था, 15 अगस 1963 को इसके आ
02:1717 साल के वरिष्ठ रंग कर्मियों ने प्रसिद्ध कहानिकार गृष्णे चंद्र की कालजई कहानी पर आधारित नातक जामुन का पेड
02:24का मंचन की
02:37यह कहानी विवस्था की उस मानसित्ता पर व्यंग करती है, जहां फाइलों और प्रक्रियाओं के बीच इनसान की जिन्दगी गौन
02:45हो जाती है
02:47जामुन का पेड में जो कहानी है वो भी एक उसके नीचे दबेवे आदमी के साथ विवस्था किस तरह का
02:52खिलवार करती है, उसको बचाने में कोई इंट्रेस्टिट नहीं है
03:00तो ये एक सिंबल है, हम ये मान कर चल रहे हैं कि हमारी इस प्रस्थिती से कम से कम
03:08जितना जैपुर का रंग कर्मी वर्ग है और जितने साहित्तिकार हैं कवी हैं और लेकग हैं वो इससे जुड़ेंगे और
03:15इस मुहिम को आगे बढ़ाएं
03:16रंग कर्मियों की इतनी सी मांग है कि इस मंच को उसी तरह संरक्षित किया जाए जैसे अन्य एतिहासिक और
03:23सांस्कृतिक धरोहरों को किया जाता है
03:26यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीड़ियां उस विरासत से वंचित हो
03:33जाएंगी जिसने दशकों तक कला को जीवित रखा
03:37जैपूर से ईटीवी भारत के लिए अंकुर जाकर की रिपोर्ट
Comments

Recommended