00:05वेदवयास लेकिन क्या हुए साधारन मनुस्य थे नहीं वेदवयास वास्तव में मैर्सी प्रासर और सत्यवती के पूत्र थे
00:14सत्यवती वई थी जो बाद में अस्तिनापुर की रानी बनी वेदवयास का जनम एक द्विव पर हुआ था
00:21इसलिए उनका नाम दुएपायन पड़ा लेकिन उन्होंने तपस्या से ऐसा ज्यान पाया कि तेवता भी चकित रह गए
00:28क्याते हैं उन्होंने तीन युगों का ज्यान केवल ध्यान से देखा और समझा वेदू को चार बागों में बाट कर
00:36उन्हें सुलब बनाया
00:37इसलिए उन्हें कहा गया वेदवयास वीदू को व्याक्या देने वाला अब सवाल ये उठता है मा बारत चैसा विसाल करंथ
00:46उन्होंने अकेले कैसे लिखा तो इसका उत्तर है स्री गनेश वेदवयासी बोले मैं बोलूँगा तुम बिना रुके लिखना
00:53गनेश जी बोले मैं तबी लिखूंगा जब एक भी सब्द दुराएं न जाएं वेदवयास ने मन में गहरे अर्थ वाले
01:02सलोक बोले गनेश ने उन्हें तुरंत लिखा और इस तरह कविता दर्सन और इतियास का महा साकर बना महा भारत
01:10ऐसे थे वेदवयास जिनोंने नैके
01:12वलकथा दी बलगी धरम और ज्यान को युगो युगो तक जीवित कर दिया नमस्कार
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