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  • 7 minutes ago
क्यों आया गणेश जी को चंद्रमा पर भयंकर क्रोध किस कारण वे काले पड़ गए

✨ कहानी का विवरण (Description)

यह कथा भगवान श्रीगणेश और चंद्रमा से जुड़ी है। मान्यता है कि एक बार गणेश जी जब भोजन करके लौट रहे थे, तब चंद्रमा ने उनका उपहास किया। इससे क्रोधित होकर गणेश जी ने चंद्रमा को श्राप दिया कि उसकी सुंदरता नष्ट हो जाएगी और उसका दर्शन कलंककारी होगा। बाद में क्षमा याचना करने पर गणेश जी ने श्राप का प्रभाव कुछ कम कर दिया। तभी से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) के दिन चंद्र दर्शन वर्जित माना जाता है।

यह कथा हमें यह शिक्षा देती है कि कभी भी किसी का उपहास या अपमान नहीं करना चाहिए, चाहे वह परिस्थिति कैसी भी हो।

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⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)

यह कहानी धार्मिक मान्यताओं और पुराणों पर आधारित है।
यह "मन्नु का सनातन ज्ञान" के अंतर्गत केवल सांस्कृतिक एवं पौराणिक संदर्भ के लिए साझा की गई है।
इसकी ऐतिहासिक या वैज्ञानिक पुष्टि आवश्यक नहीं है।
पाठकों से अनुरोध है कि इसे श्रद्धा और कथा परंपरा के रूप में ही ग्रहण करें।


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#गणेशजी #चंद्रमा #सनातनधर्म #धार्मिककथा #गणेशचतुर्थी #मन्नुकासनातनज्ञान #हिन्दूमिथक #पुराणकथा
Transcript
00:00गने जी ने चंदरमा को स्राब दिया था
00:02एक बार गने जी कुबेर के महल से बोजन करके लोट रहे थे
00:07उन्होंने धेर सारी मिठाईया अपने साथ ली और मुशक पर सवार होकर कैलास की और चल पड़े
00:13रास्ते में मुशक के साबने एक सर्प आ गया
00:17मुशक डर कर उचल पड़ा जिससे गने जी किर पड़े और मिठाईया फिकर गई
00:23गने जी ने उपर देखा तो चंदरमा उन्हें देखकर जोर जोर से हस रहा था
00:28उसकी हसी में उपहास और गमंड था
00:31गने जी को यह अपमान सहन नहीं हुआ
00:33उन्होंने चंदरमा से कहा
00:35तुम्हें अपने सुन्दर्था पर घमंड है
00:37और तुम तुसरों का उपहास करते हो
00:39मैं तुम्हें सराब दिता हूँ
00:41कि तुम्हारी सुन्दर्था नश्ट हो जाएगी
00:43और जो भी तुम्हें देगेगा
00:45उस पर जुटा कलंक लगेगा
00:47चंदरमा ने अपनी कलती सुविकार की
00:50और गने जी से छमा मागी
00:52गने जी ने कहा
00:53मेरा सराब तो अटल है
00:55लेकिन इसका परभाव कम हो सकता है
00:58इसलिए आज भी
00:59चंदरमा घटता बढ़ता है
01:02और भादरबद सुगलव चंतुरति के दिन
01:04चंदरतर्शन वर्चित माना जाता है
01:07नमस्कार
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