00:00गने जी ने चंदरमा को स्राब दिया था
00:02एक बार गने जी कुबेर के महल से बोजन करके लोट रहे थे
00:07उन्होंने धेर सारी मिठाईया अपने साथ ली और मुशक पर सवार होकर कैलास की और चल पड़े
00:13रास्ते में मुशक के साबने एक सर्प आ गया
00:17मुशक डर कर उचल पड़ा जिससे गने जी किर पड़े और मिठाईया फिकर गई
00:23गने जी ने उपर देखा तो चंदरमा उन्हें देखकर जोर जोर से हस रहा था
00:28उसकी हसी में उपहास और गमंड था
00:31गने जी को यह अपमान सहन नहीं हुआ
00:33उन्होंने चंदरमा से कहा
00:35तुम्हें अपने सुन्दर्था पर घमंड है
00:37और तुम तुसरों का उपहास करते हो
00:39मैं तुम्हें सराब दिता हूँ
00:41कि तुम्हारी सुन्दर्था नश्ट हो जाएगी
00:43और जो भी तुम्हें देगेगा
00:45उस पर जुटा कलंक लगेगा
00:47चंदरमा ने अपनी कलती सुविकार की
00:50और गने जी से छमा मागी
00:52गने जी ने कहा
00:53मेरा सराब तो अटल है
00:55लेकिन इसका परभाव कम हो सकता है
00:58इसलिए आज भी
00:59चंदरमा घटता बढ़ता है
01:02और भादरबद सुगलव चंतुरति के दिन
01:04चंदरतर्शन वर्चित माना जाता है
01:07नमस्कार
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