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ईरान की एक बैलिस्टिक मिसाइल के जॉर्डन स्थित अल-अजरक एयर बेस के जर्मन सेक्शन पर कथित तौर पर गिरने के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया है। यह बहुराष्ट्रीय सैन्य अड्डा है, जहां जर्मनी की बुंडेसवेहर, नाटो गठबंधन और अमेरिकी सैनिक मिलकर तैनात हैं। मिसाइल हमले के दौरान जर्मन सैनिकों ने टकराव से कुछ ही क्षण पहले बंकरों में शरण ली, जबकि हमले के तुरंत बाद आपातकालीन प्रतिक्रिया और नुकसान का आकलन शुरू कर दिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। उनका कहना है कि इस बेस का इस्तेमाल अमेरिकी फाइटर जेट और गठबंधन बल कर रहे थे। इस हमले के बाद नाटो के भीतर यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या यह हमला उत्तरी अटलांटिक संधि के अनुच्छेद-5 को सक्रिय कर सकता है, जिसके तहत किसी एक सदस्य पर हमला पूरे नाटो पर हमला माना जाता है और सामूहिक जवाब देने की प्रतिबद्धता होती है।

जॉर्डन के इस रणनीतिक एयरबेस पर हुए हमले के बाद जर्मनी, अमेरिका और अन्य गठबंधन देश नुकसान का आकलन कर रहे हैं। इस घटना ने नाटो और ईरान के बीच संभावित बड़े टकराव की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जर्मनी के सैन्य विमान एयरबस A400M एटलस को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है, जबकि स्थिति तेजी से बदल रही है और घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।


Tensions surge as an Iranian ballistic missile reportedly strikes the German section of Al-Azraq Air Base, a multinational facility hosting coalition forces. The base, where troops from Bundeswehr and the NATO alliance operate alongside U.S. personnel, came under missile attack amid rapidly escalating regional tensions. German troops rushed into bunkers moments before impact, while emergency response and damage assessments began shortly after the strike.

Iran’s Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) reportedly claimed responsibility, stating the base was used by U.S. fighter jets and coalition forces. The strike has sparked urgent questions across the alliance about whether the attack could trigger Article 5 of the North Atlantic Treaty, the mutual defense provision that commits members of NATO to respond collectively to an attack on one ally.

As Germany, the United States, and coalition partners assess the damage at Jordan’s strategic airbase, the incident is raising fears of a wider confrontation between NATO and Iran. Military aircraft including Germany’s Airbus A400M Atlas have reportedly been placed on standby as the situation continues to develop.
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~HT.178~PR.516~ED.106~GR.122~

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00:06क्या मिडलीज का तनाव अब एक बड़े वैश्विक युद्ध की दहलीज पर खड़ा है कि नाटों के सामने अब इरान
00:12के साथ सीधा टक्राव अनिवारे हो गया है
00:14नमस्कार मेरा नाम है संद्या और आप देख रहे हैं One India Hindi
00:18आज की सबसे बड़ी और चिंता जुना खबर जॉर्डन के अल अर्जक एरबीस से आ रही है
00:23खबर है कि इस रंडीतिक सैने अड़े पर एक इरानी बालिस्टिक मिसाइल गिरी है जोहां जर्मन और अमेरिकी सैनिक तैनाक
00:30है
00:54अगर नाटो इसे अपने सदस्य देश पर सीधा आकरमन मानता है
00:58तो ये इरान के साथ एक बड़े सैने तकराव की शुरुवात हो सकती है
01:02फिलाल जर्मनी के A400M इटलस विमान स्टांडबाइ मोड पर है
01:07क्या इरान ने इस हमले के जरिये कोई बड़ी चाल चली है या फिल एजवन की शुरुवात है
01:14मध्यपूर्व में इरान के मिसाइल हमलों ने अब एक जर्मन सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है
01:199 मार्च 2026 की रात को इरानी बैलिस्टिक मिसाइलों ने पूर्वी जॉर्डन में अल अजराक एर बेस जिसे मुवफक साल्टी
01:27एर बेस के रूप में भी जाना जाता है कि जर्मन अनुभाग पर हमला किया
01:31ये बेस एक बहुराष्ट्रिय गटबंधन सुविधा है जिसमें जर्मन बुंडिस्वेर, अमेरिकी वायू सेना और अन्य संबध बलों के कर्मी रहते
01:39हैं
01:39हालाकि इस बार हमला उस क्षेत्र के अंदर हुआ जिसका उप्योग जर्मन सैन्य को द्वारा किया जाता है
01:44शुरुवाती रिपोर्टों के अनुसार पूरिक शेत्र में अमेरिकी और संबध सैन्य ठिकानों के खिलाफ तहरान की जवाबी कारवाई के हिस्से
01:51के रूप में इरान से कई मिसाइले दागी गए
01:54कथित तोर पर उन मिसाइलों में से एक बेस पर स्थित जर्मन फील्ड कैम्प की एक इमारत से टकराई
01:59हमले के बावजूद कोई भी जर्मन सैनिक माराया घायल नहीं हुआ
02:03सैन्याधिकारियों का कहना है कि बढ़ते संघर्ष के बीच बेस के हाई अलर्ट पर होने के कारण
02:08मिसाइलों के गिरने से पहले ही सभी कर्मी सुरक्षात्मक बंकरों में चले गए थे
02:12इसलामिक Revolutionary Guard Corps, IRGC ने क्षेत्र में गटबंधन ठिकानों पर कई हमलों की जिमेदारी ली है
02:18इरान ने अल अजराक सुविधा को मध्यपूर्व में संचालित अमेरिकी लड़ाकू विमानो द्वारा उपयोग किये जाने वाले
02:24सबसे सक्रिय ठिकानों में से एक बताया और कहा कि उसकी मिसाइल सेना ने वहां के महत्वपूर्द बुनियादी धांचे को
02:30निशाना बनाया
02:30इस बेस को अपेक्षकृत सुरक्षित माना जाता था क्योंकि यहां उन्नत अमेरिकी वायूरक्षा प्रनालिया स्थित हैं
02:36जिनमें बेलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए डिजाइन की गई थाट बैटरियां भी शामिल हैं
02:40हालाकि रिपोर्टों से पता चलता है कि कुछ मिसाइले या उनका मलवा अभी भी बेस के अंदर की संरचना उपर
02:45गिरने में काम्याब रहा
02:46जिसमें जर्मन क्षेत्र के बैरक भी शामिल हैं
02:49जर्मन अधिकारियों का कहना है कि नुकसान की पूरी सीमा का अभी भी आकलन किया जा रहा है
02:53इस हमले ने बर्लिन में चिंता बढ़ा दी है क्योंकि इस क्षेत्र में जर्मन सेनिक मुख्य रूप से आयस आयस
02:59विरोधी अभियानों के लिए तैनात है
03:00ना कि विस्तारित इरान युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने के लिए
03:03बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के जवाब में जर्मनी ने अपने सेनिकों की निकासी की आवश्यक्ता होने की स्थिती में दो एरबस
03:09A400M परिवहन विमानों को स्टैंडबाई पर रखा है
03:12संखर्ष के दौरान बेस पर ये पहला हमला नहीं था
03:1528 फरवरी से 3 मार्च के बीच हुए हमलों में कथित तौर पर अल अजराक में तैनात अमेरिकी थाड रडार
03:20सिस्टम को नुकसान पहुँझा था
03:22उपग्रह चित्रों में बाद में रडार एरे के कुछ हिस्सों में जलने की निशान, मलबा और विनाश देखा गया
03:26जो आने वाली मिसाइलों का पता लगाने में महत्वपून भूमिका निभाता है
03:30ये नवीनतम हमला तब हुआ है जब इरान मध्यपूर्व में सैयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों से जुड़े सैन्य ठिकानों
03:36पर मिसाइले और ड्रोन दागना जारी रखे हुए हैं
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