00:00मैं पिता होने के नाते बहुत दुख है, मुश्किल तो है कि बोला नहीं जा रहा है, पर क्या करें
00:04अब रात को नीद नहीं आई एक वज़े तक बेटा आएगा साम को तो उसके बाद हम डिसाइड करेंगे, आपस
00:09में वो तो आफेर उसके बाद हमने एमस ले जाना है, माहा के
00:16मौत किसी भी इनसान के जीवन में होने वाली आखरी घटना जरूर है, लेकिन ये हर बार बहुत ही मुश्किल
00:23होती है, ये और ज्यादा सम्वेदंशील हो जाती है, जब एक पिता को ये फैसला लेना पड़े कि उसका बेटा
00:29आखरी सांस कब लेगा, यही हाल है हरीश रहना
00:42में रहते थे, यहां से 2013 में वे एंजिनेरिंग करने चंडी गड़ जाते हैं और वहां जाकर उनके साथ एक
00:49हादसा हो जाता है, वे एक बिल्डिंग के चौथी मंजल से गिर जाते हैं और जिसके बाद वे अच्छे तवस्था
00:55में चले जाते हैं, आप आम भाशा में इसे को
00:58मा भी कह सकते हैं, इसके बाद वे न कभी बोले, न कभी उन्होंने किसी से कोई एक्सप्रेशन शेयर किये,
01:05न कोई बाद शेयर की, बस एक जिन्दा लाश की तरह वो पड़े रहे, तेरा सालों तक हरीश के पिता
01:12अशोक राणा इस चीज का संगर्श करते रहे, अपने बे�
01:27वे इस दुनिया में उस हाल में नहीं लौट सके, जिस हाल में वे 2013 के पहले हुआ करते थी,
01:34चंडी करके PGI से लेकर दिली के एमस तक, सरकारी, गेर सरकारी, कई हॉस्पीटल्स में उनका इलाज कराया गया, लेकिन
01:42नतीजा सभी जगे सिफर रहा, शूने रहा, बात कोट में
01:47पहुंचती है, लंबी सुल्माई चलती है और उसके बाद जस्टिस जेबी पार्दीवाला इस पर फैसला देते हैं, वे जिस वक्त
01:56ये फैसला दे रहे थे, वे खुद दुखी थे, ये बात उन्होंने अपने फैसला देते वक्त दिये गए, स्टेटमेंट में
02:02कही, लेकिन
02:04अब हरिश राणा को एक शामरत्यू की जो याचिका उनके परिवार की तरफ से दाखिल की गई थी, उसको सुईकार
02:11कर लिया है, इसके बारे में जब ववन इंडिया ने उनके पिता आशुक राणा से की, तो उन्होंने बताया कि
02:16कितना संगर्ष भरा हुआ उनका इन 30 सालो
02:20का समय था जो बहुत ही मुश्किल से गुजरा है, इसके साथ ही हमने पूछा कि उनकी मा का इस
02:27बारे में क्या कहना था कि जब उन्हें पता चला कि उनकी एक शामरत्यू की जो याचिका थी उसे मनजूर
02:34कर लिया गया है, तो उन्होंने कहा कि इस पर एक मा का क्या ही रियक्�
02:48इसकरी हर तक आज चार बर से हम लड़ाई लड़ रहे थे, तो आज मान नियाए दीशने है, जो एक
02:57मान बता के नाते जो नियाए दिया है, वो बहुत अच्छा दिया है, इससे हमारा फाइदा नहीं, मैं पिता होने
03:05के नाते बहुत दुख है, और खुशी भी है, खुशी �
03:18हो गए हैं कि जो ऐसे बच्चे हैं उनके जो भी जैसे ये प्रोसेस है जो आप परतरकार यूज करें,
03:25यूथोनेसिया वो बर्ज गल्थ है, यूथोनेसिया उसको दिया जाता है, जैसे पागल कुत्य ने काट लिया, किसी को और इंजेक्शन
03:32लगा दिया, वो यूथोनेसि
03:34ये प्रकर्ति की गोद में छोड़ा, इसको भगवान की गोद समझ लो, ये प्रकर्ति अमपाज तत्वों का चोला है, तो
03:40उसकी फिसर फूट पाइपट आई जाएगी, ठीक है कि नहीं, उसको जो भी है, तीरे-दीरे पानी बगारा मूह में
03:47देंगे, वो जैसे भी जो भी
04:04समेस्टर था इसका, और हमारा भागया ऐसा होगा, सेवा लेनी होगी, पूछ पूर्व जन्मों की सावकताब होते हैं, जो कि
04:10देना लेना होता है, कोई फिजीरो तरशेश, कोई डॉक्टर, कोई एच्वी ओटी, डॉक्टरों को नहीं पता है, हाईपर बैरिक ऑक्सीजन
04:18�
04:18होती है, तो इसको पैक सेट डला हुआ, जो कि बाला जी एक्सन में डालते हैं, यहां सीमों सहाब ने
04:22मेरे को यह सोदा बेजा, डॉक्टर मॉन जी थे डालने निया, तो ऐसा यह होता है, कि बहुत सारी चीजें
04:27इसमें, तो यह प्रोसेस चल रहा था, गोवर्मेंट ने हमा
04:45अच्किस सक है, उप अच्किस सक है, पिता के तोर पर आप लेकिन पिता के तोर पर निया दिए नहीं
04:51है, जैसे ऐसे लोग पता ने कितने पड़ें, मैं आपको बर्चप पे भेज़ दूगा, मुश्किल तो है, बोला नहीं जा
04:58रहा पर क्या करें अब रात को नीद नहीं आ
05:15सब्सक्राया है, तो लागो इप्लिमेंट है, हो तो हमारे उपर साम को हम डिशाइड करेंगे, आपस में वह तो आफर
05:21उसके बाद अपने ले जाना है, उसको रखेंगे, उसके बाद पाद तो वो आपको बहुत को झाला नहीं पाती है,
05:35वो बोलने पाती है ठीव है, पिला
05:44सालत में चल रहे हैं जहां एक शम्रत्यों की बात की गई है कोई पेशन्ट है जो सालों से बिस्तर
05:50पर है कोई बोल नहीं रहा कोई हरकत नहीं हो रही बहुत ही एक सो प्रतिशत जिसको ब्रेंडेड कहते हैं
05:59उस अवस्था में और शायद उन केसिस के दर्वाजे इस के बाद �
06:04खुल जाएंगे केमरामेन आशिस के साथ सिधार्त परोहित वन इंडिया
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