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13 साल की लंबी लड़ाई, दर्द और उम्मीद के बाद हरिश राणा केस में एक ऐतिहासिक फैसला सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार एक ऐसे मामले में इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जहाँ माता-पिता अपने बेटे की असहनीय पीड़ा को खत्म करना चाहते थे। हरिश राणा पिछले 13 सालों से गंभीर हालत में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। उनके माता-पिता ने अदालत से गुहार लगाई कि उनके बेटे को इस दर्द से मुक्ति दी जाए। कोर्ट ने सभी मेडिकल रिपोर्ट और परिस्थितियों को देखते हुए यह फैसला सुनाया। यह फैसला भारत में इच्छामृत्यु की बहस को फिर से चर्चा में ले आया है। इस केस ने समाज, कानून और मानवता से जुड़े कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर माता-पिता के इस कदम के पीछे कितना दर्द छिपा था, यह कहानी उसी सच्चाई को सामने लाती है।

After a painful legal battle of 13 years, the Harish Rana case has led to a historic moment. The Supreme Court allowed euthanasia in a case where parents requested an end to their son’s unbearable suffering. Harish Rana had been battling a critical medical condition for over a decade, living between life and death. His parents approached the court seeking mercy for their son. After reviewing medical reports and the circumstances, the court granted permission. This decision has reignited the debate on euthanasia in India. It raises important questions about law, ethics, and humanity. The emotional struggle of the parents reveals the depth of pain behind their decision. This story highlights the complex reality of mercy killing.

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~HT.410~GR.506~PR.512~ED.520~

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00:00मैं पिता होने के नाते बहुत दुख है, मुश्किल तो है कि बोला नहीं जा रहा है, पर क्या करें
00:04अब रात को नीद नहीं आई एक वज़े तक बेटा आएगा साम को तो उसके बाद हम डिसाइड करेंगे, आपस
00:09में वो तो आफेर उसके बाद हमने एमस ले जाना है, माहा के
00:16मौत किसी भी इनसान के जीवन में होने वाली आखरी घटना जरूर है, लेकिन ये हर बार बहुत ही मुश्किल
00:23होती है, ये और ज्यादा सम्वेदंशील हो जाती है, जब एक पिता को ये फैसला लेना पड़े कि उसका बेटा
00:29आखरी सांस कब लेगा, यही हाल है हरीश रहना
00:42में रहते थे, यहां से 2013 में वे एंजिनेरिंग करने चंडी गड़ जाते हैं और वहां जाकर उनके साथ एक
00:49हादसा हो जाता है, वे एक बिल्डिंग के चौथी मंजल से गिर जाते हैं और जिसके बाद वे अच्छे तवस्था
00:55में चले जाते हैं, आप आम भाशा में इसे को
00:58मा भी कह सकते हैं, इसके बाद वे न कभी बोले, न कभी उन्होंने किसी से कोई एक्सप्रेशन शेयर किये,
01:05न कोई बाद शेयर की, बस एक जिन्दा लाश की तरह वो पड़े रहे, तेरा सालों तक हरीश के पिता
01:12अशोक राणा इस चीज का संगर्श करते रहे, अपने बे�
01:27वे इस दुनिया में उस हाल में नहीं लौट सके, जिस हाल में वे 2013 के पहले हुआ करते थी,
01:34चंडी करके PGI से लेकर दिली के एमस तक, सरकारी, गेर सरकारी, कई हॉस्पीटल्स में उनका इलाज कराया गया, लेकिन
01:42नतीजा सभी जगे सिफर रहा, शूने रहा, बात कोट में
01:47पहुंचती है, लंबी सुल्माई चलती है और उसके बाद जस्टिस जेबी पार्दीवाला इस पर फैसला देते हैं, वे जिस वक्त
01:56ये फैसला दे रहे थे, वे खुद दुखी थे, ये बात उन्होंने अपने फैसला देते वक्त दिये गए, स्टेटमेंट में
02:02कही, लेकिन
02:04अब हरिश राणा को एक शामरत्यू की जो याचिका उनके परिवार की तरफ से दाखिल की गई थी, उसको सुईकार
02:11कर लिया है, इसके बारे में जब ववन इंडिया ने उनके पिता आशुक राणा से की, तो उन्होंने बताया कि
02:16कितना संगर्ष भरा हुआ उनका इन 30 सालो
02:20का समय था जो बहुत ही मुश्किल से गुजरा है, इसके साथ ही हमने पूछा कि उनकी मा का इस
02:27बारे में क्या कहना था कि जब उन्हें पता चला कि उनकी एक शामरत्यू की जो याचिका थी उसे मनजूर
02:34कर लिया गया है, तो उन्होंने कहा कि इस पर एक मा का क्या ही रियक्�
02:48इसकरी हर तक आज चार बर से हम लड़ाई लड़ रहे थे, तो आज मान नियाए दीशने है, जो एक
02:57मान बता के नाते जो नियाए दिया है, वो बहुत अच्छा दिया है, इससे हमारा फाइदा नहीं, मैं पिता होने
03:05के नाते बहुत दुख है, और खुशी भी है, खुशी �
03:18हो गए हैं कि जो ऐसे बच्चे हैं उनके जो भी जैसे ये प्रोसेस है जो आप परतरकार यूज करें,
03:25यूथोनेसिया वो बर्ज गल्थ है, यूथोनेसिया उसको दिया जाता है, जैसे पागल कुत्य ने काट लिया, किसी को और इंजेक्शन
03:32लगा दिया, वो यूथोनेसि
03:34ये प्रकर्ति की गोद में छोड़ा, इसको भगवान की गोद समझ लो, ये प्रकर्ति अमपाज तत्वों का चोला है, तो
03:40उसकी फिसर फूट पाइपट आई जाएगी, ठीक है कि नहीं, उसको जो भी है, तीरे-दीरे पानी बगारा मूह में
03:47देंगे, वो जैसे भी जो भी
04:04समेस्टर था इसका, और हमारा भागया ऐसा होगा, सेवा लेनी होगी, पूछ पूर्व जन्मों की सावकताब होते हैं, जो कि
04:10देना लेना होता है, कोई फिजीरो तरशेश, कोई डॉक्टर, कोई एच्वी ओटी, डॉक्टरों को नहीं पता है, हाईपर बैरिक ऑक्सीजन
04:18
04:18होती है, तो इसको पैक सेट डला हुआ, जो कि बाला जी एक्सन में डालते हैं, यहां सीमों सहाब ने
04:22मेरे को यह सोदा बेजा, डॉक्टर मॉन जी थे डालने निया, तो ऐसा यह होता है, कि बहुत सारी चीजें
04:27इसमें, तो यह प्रोसेस चल रहा था, गोवर्मेंट ने हमा
04:45अच्किस सक है, उप अच्किस सक है, पिता के तोर पर आप लेकिन पिता के तोर पर निया दिए नहीं
04:51है, जैसे ऐसे लोग पता ने कितने पड़ें, मैं आपको बर्चप पे भेज़ दूगा, मुश्किल तो है, बोला नहीं जा
04:58रहा पर क्या करें अब रात को नीद नहीं आ
05:15सब्सक्राया है, तो लागो इप्लिमेंट है, हो तो हमारे उपर साम को हम डिशाइड करेंगे, आपस में वह तो आफर
05:21उसके बाद अपने ले जाना है, उसको रखेंगे, उसके बाद पाद तो वो आपको बहुत को झाला नहीं पाती है,
05:35वो बोलने पाती है ठीव है, पिला
05:44सालत में चल रहे हैं जहां एक शम्रत्यों की बात की गई है कोई पेशन्ट है जो सालों से बिस्तर
05:50पर है कोई बोल नहीं रहा कोई हरकत नहीं हो रही बहुत ही एक सो प्रतिशत जिसको ब्रेंडेड कहते हैं
05:59उस अवस्था में और शायद उन केसिस के दर्वाजे इस के बाद �
06:04खुल जाएंगे केमरामेन आशिस के साथ सिधार्त परोहित वन इंडिया
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