00:00आपने कभी चिडिया को सिलाई करते हुए देखा है जे शोटी सी चिडिया अपने गर को ऐसे बना रही है
00:06जैसे कोई कारीगर कपड़ा बुन रहो एक शोटी सी चिडिया थी ना कम जो ना डरी हुई बलकि बेहद मेहन
00:12थी नदी के किनारे एक पत्ते पर उसने अपना घर बना
00:29नहीं रूपती दीरे दीरे तिन के जुड़ते गे और उसी पत्ते से बन गया एक खुबशूरत गोंसला जो शोटी सी
00:37चिरिया हमें सिखाती अगर होंसला बड़ा हो तो सोटे हाथ भी बड़े चमत कर सकते हैं मेहनत कभी शोटी नहीं
00:45होती
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