00:00सुनसान रास्ता गोरे पर सवार एक मुगल और अचानक पीशे से गुंगरों की आवाज जब उसने पीशे मुटकर देखा तो
00:06सामने खड़ेते सुवे में शाम सुनदर सदियों पहले मुलतान से एक सात्वी ब्रामन उत्तरभात के एक पुराने महले में आकर
00:13रहने लगा हर स
00:15उबे सूरज निकलते ही बे मदूसवर में जैदीब की गित गुवविंद का गान करता था उसी मकान की उपरी मंजिल
00:21पर एक मुगल दरवारी रहता था जब भी बे दरवार जाने के लिए सीरियों से नीचे उतरता ब्रामन की आवाज
00:27सुनकर वहीं रुक जाता उसे संस्क्
00:42पर मेरा दिल कैद हो जाता है ता ब्रामन ने उसे गीट गुविंद गाना सिखाया और कहा जहां जे पद
00:47गाई जाते हैं महां स्वेम शिरी क्रिशन आका सुनते हैं इसलिए गाते समय उनके लिए आसन जरूर रखना मुगल ने
00:54अपने घोड़े की काठी की आगे एक शोटी
01:10आ रही है जब उसने पीछे मुटकर देखा तो स्वेम शामसुंदर उसके पीछे नासते हुए आ रहे थे प्रभु मुस्कराकर
01:16बोले आज तुम मेरे लिए आसन रखना भूल गे तो क्या मैं अपने भक्त के लिए नातना भूल जाओं जे
01:24सुनकर मुगल की आंकों में आंस
01:38सीख इश्वर बाशा जा नियम नहीं देखते वो केवल सच्चे और सरल बाब को देखते हैं
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