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सदियों पहले मुल्तान से आए एक ब्राह्मण और एक मुग़ल दरबारी की कहानी…
जिसे सुनकर भगवान श्रीकृष्ण स्वयं नाचते हुए प्रकट हुए!
देखिए यह अद्भुत घटना जिसने इतिहास में “मीर माधव” को जन्म दिया।
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Transcript
00:00सुनसान रास्ता गोरे पर सवार एक मुगल और अचानक पीशे से गुंगरों की आवाज जब उसने पीशे मुटकर देखा तो
00:06सामने खड़ेते सुवे में शाम सुनदर सदियों पहले मुलतान से एक सात्वी ब्रामन उत्तरभात के एक पुराने महले में आकर
00:13रहने लगा हर स
00:15उबे सूरज निकलते ही बे मदूसवर में जैदीब की गित गुवविंद का गान करता था उसी मकान की उपरी मंजिल
00:21पर एक मुगल दरवारी रहता था जब भी बे दरवार जाने के लिए सीरियों से नीचे उतरता ब्रामन की आवाज
00:27सुनकर वहीं रुक जाता उसे संस्क्
00:42पर मेरा दिल कैद हो जाता है ता ब्रामन ने उसे गीट गुविंद गाना सिखाया और कहा जहां जे पद
00:47गाई जाते हैं महां स्वेम शिरी क्रिशन आका सुनते हैं इसलिए गाते समय उनके लिए आसन जरूर रखना मुगल ने
00:54अपने घोड़े की काठी की आगे एक शोटी
01:10आ रही है जब उसने पीछे मुटकर देखा तो स्वेम शामसुंदर उसके पीछे नासते हुए आ रहे थे प्रभु मुस्कराकर
01:16बोले आज तुम मेरे लिए आसन रखना भूल गे तो क्या मैं अपने भक्त के लिए नातना भूल जाओं जे
01:24सुनकर मुगल की आंकों में आंस
01:38सीख इश्वर बाशा जा नियम नहीं देखते वो केवल सच्चे और सरल बाब को देखते हैं
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