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पूरा वीडियो : महिलाएँ अपनी पढ़ाई और नौकरी देखें, या घर-गृहस्थी? || आचार्य प्रशांत (2019)
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Transcript
00:00अचाहर जी, मैं हाउस वाइफ हूँ, परिवार में पामी पापा हैं, बुजूर हैं, बीमार भी हैं, बच्चा छोटा है, हस्बन
00:06भी हैं, तो उनके कामों मेरी पुरी पुरा दिन निकल जाता है, तो मैं अपनी लाइफ में गौर्मेंट जॉब के
00:14लिए तैयारी करना चाहती
00:17हुआ। तो मैं पढ़ाई के लिए बैठती हुँ, पूरे काम सब के मुझे नजर आती हुआ, तो पढ़ाई चोड़के अंगे
00:23कामों में लग जाती हुआ। तो क्या मुझे पढ़ाई पर ही पुरा फोकस करना चाहिए और सब के लिए करना
00:28चाहिए।
00:30सब के लिए जो आप सबसे उचा काम कर सकती हैं वो है आपकी पढ़ाई
00:34ये बिल्कुल मत सोचिएगा कि अगर आप घर के इधर उधर के काम छोड़ करके पढ़ाई कर रही है
00:41तो ये दूसरों के प्रते अप्रेम है या उपेक्छा है
00:46आप घर की बहुत महत्वपूर्ण सदस्या है
00:49आप अगर सीमित रहेंगी, कैद रहेंगी, अज्ञान में और अंधेरे में रहेंगी, बंधन में रहेंगी
00:55तो घर में किसका भला होने वाला है भाई?
00:59आम तोर पर घरों की जो बुरी दशा रहती है
01:03जो कलख, लेश, संताप रहता है, उसका बहुत बड़ा कारण ये है
01:08कि घर के केंद्र पर जो महिला बैठी है, उसको घर में क्याद कर दिया गया है
01:13घर उसी से है
01:15जब वो घर से कभी बाहर निकलेगी नहीं, तो उसे दुनिया का कुछ पता नहीं
01:20वो क्या बच्चे की परवरिश करेगा, वो क्या पती के काम को समझेगा
01:25दूसरों के लिए तो तब जीओगे न, जब पहले तुम खुद हो कुछ
01:30बहुत अच्छी बात है दूसरों के लिए जीना, मैं पूरा समर्थन करता हूँ दूसरों के लिए जीने का
01:35लेकिन अगर हम ही कुछ नहीं है तो हम दूसरों को क्या दे सकते हैं भाई, औरत को कुछ बन
01:40तो जाने दो, फिर वो दूसरों की सेवा करेगी न, तुम उसे बनने ही नहीं दे रहे कुछ
01:45बच्चों को भी आप ज़्यादा कुछ नहीं दे पाएंगी
01:47अगर सबसे पहले आपने अपना निर्माण नहीं किया है
01:52अपना तो निर्माण करिए न, वो आपका प्रथम दाइत है
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