00:00नमस्ते अचारुजी, मेरा नाम सुगंदा है, I have recently lost my father,
00:05तो मेरे अंदर एक एक एगो भरा हुआ है कि शायद मैं उस समय कुछ और ऐसा स्टेप्स लेती,
00:11तो मेरे फादर बच गए होते हैं और मैं इससे बाहर नहीं निकल पा रही हूँ, गिल्ड से.
00:15जब आप अपने ही शरीर को नहीं बचा सकती, तो आप अपने पिता के शरीर को कैसे बचा लेती?
00:23मृत्यू को तो आप ऐसा बना करके रखते हो जैसे पराई बात हो,
00:28जैसे किसी और देश, किसी दुनिया, किसी और के घर की बात हो,
00:33तो फिर जब वो आती है तो,
00:38महान आशर है, महान आशर है,
00:41दांत गिर रहे है,
00:44बाल जढ रहे हैं, सफेद हो रहे हैं,
00:47जुरिया आने लग गई है,
00:49शरीर पहले से कमजोर पढ़ने लग गया है,
00:53मृत्य दिखाई नहीं दे रही है, क्या?
00:57पत्ता बोला व्रिक्ष से,
00:58सुनो व्रिक्ष बन रहा है अब के बिछड़े ना मिले दूर पड़ेंगे जाए व्रिक्ष बोला पात से सुन पत्ते मेरी
01:11बात इस घर की ये रीत है एक आवत एक जात जिस घर में बच्चा आया है अब उस घर
01:19में क्या मृत्य नहीं आएगी
01:22तो बच्चा आया है तुम खुशियां मना रहे हो बहुत अच्छी बात पर उस वक्त ये भी याद रखो अब
01:26बच्चा आया है तो कोई अब जाएगा भी इस घर की ये रीत है एक आवत एक जात
01:39जिंदगी की छोटी छोटी घटनाओं में मृत्युका इसमन रखा करो ये कोई मनुहुसियत की बात नहीं है
01:50ये कोई दोश नहीं है लगातार घट रही है मृत्यों
01:55और ज्यानियों ने बार बार कहा मौत याद रखो
01:58आधी बाते ही उन्होंने मौत की करी है
02:00जिसने मौत को याद रख लिया
02:04उसकी जिन्दगी आजाद हो जाती है
02:07जो मौत याद रखता है वो जीना सीख जाता है
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