00:00आपकी किताब में लगभग 180 चाप्टर सें सारे 300 पन्नों की किताब है
00:04एक जगह ये किताब कहती है कि जो कुछ भी आप हासिल करते हैं दरसल वो शुआफ करते हैं दिखावा
00:11हैं और वो किसी डर से पैदा होती है
00:13मैं पूछा करता हूँ आपके जीवन में अभी तक भी लक्ष रहें और आगे के लिए भी आपके पास लक्ष
00:23हैं
00:23बताए कि कितने प्रतिशत आपके लक्ष जैसे हैं वैसे ही रहते अगर किसी ने आपको कहा नहोता कि फलानी बात
00:34को लक्ष बनाओ
00:35अगर दुनिया जहान में प्रथा परंपरा ने आपको बताया नहीं होता कि जिन्दगी में फलाना काम करना होता है
00:43कि फलानी चीज के पीछे दोड़ने को ही जीवन कहते हैं
00:47यह सब आपको नहीं बताया गया होता तो आप जो कुछ भी कर रहे हो इसमें से कितना प्रतिशत कर
00:51रहे होते
00:51तो जब इमानदारी भरा जवाब आता है अक्सर तो वह मौनका ही होता है
00:55बाकी बोलते हैं कोई बोलता है शूने प्रतिशत कोई बोलता है एक प्रतिशत
00:59सब कुछ ही तो हम वही कर रहे हैं जो किसी दूसरे ने बता दिया कि करो
01:02और हर वो दिशा जो हमको अभी वांचित लग रही है
01:07जिसको हम अपना लक्ष टार्गेट गोल इत्यादी बोलते हैं
01:11वो सब वही है जिधर को भीड़ भी जा रही है
01:14हमारा अपना तो निजी उसमें कुछ है ही नहीं
01:17किसी ने ना बताया होता है ऐसी ऐसी पढ़ाई करनी हम नहीं करते
01:20समाज की और से प्रवाब नहीं है होते कि फलाने तरीके का खेल खेलो
01:24फलाने लोगों को आदर्श मानो फलाने को पूजो
01:27तो हम वो नहीं करते, फलाने तरीके खाना खाओ, ये भी किसी और नहीं बता दिया है, बच्चा पैदा होता
01:32है, उसको धर्म और जाती भी दूसरे ही दे देते हैं, वो खुद तो कहता नहीं कि मैं पैदा हुआ
01:36हूँ, तो मुझे अब ऐसी ऐसी मान में था ही रखनी है, आपक
01:54कि उपलब्धी कैसे हो गई, पहले मुझे तो वजूद में आना चाहिए न, मैं ही वजूद में नहीं हूँ, तो
02:01कौन सी मेरी याक्रा, कौन सा मेरा पत्थ, और कौन सी मेरी मन्जी है।
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