00:00यहां काम लगा हुआ था, मजदूर थे, मैं देखता था, एक लड़की आती थी, बहुत छोटी, चार की होगी, छे
00:06की होगी, और वो गोध में उठाय उठाय घूमती थी अपने छोटे भाई को, बहुत कम लड़के होते हैं, जो
00:12ये काम करते हैं, लड़कियों में ये भावन
00:26को सेवा से बांज दिया जाता है, उससे कहा जाता है, तुम बहुत अच्छी लड़की हो, अगर तुम दूसरों के
00:31लिए जीती हो, इस्त्री को तो ठीक से स्वार्थी होने का हक भी नहीं दिया जाता, उसको गौरवानवित किया जाता
00:38है, उससे कहा जाता है, देखो तुम �
00:40जी रही हो ना, इसी में तो तुवारी महिमा है, यही तो नारी का गौरव है, और उसके भीतर ये
00:46बात घुसेड़ दी है कि जीवन की सार्थक्ता तो इसी में है कि तू रसोई साफ रख, तू बिस्तर बिछा,
00:52तू पोतड़े धो, ये तीनों निप्टा ले फिर टीवी देख
00:55तुमने इस तरी को ठीक से इनसान भी नहीं रहने दिया, बड़ा शोशन किया है, फिर कहता हूं, दूसरों को
01:03कुछ देना, दूसरों की सेवा करना भली बात है, लेकिन प्रथम दायत तो आपका अपने प्रते है, आप कुछ नहीं
01:11है तो आप दूसरों क्या देंगी भाई?
01:13जków जी कि इंगी भाई दूसरो सिंग्रेटियों.
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