00:00लड़ना नहीं सिखाई गया था, हमें सौम में रहना सिखाई गया था हमेशा, आज हमको अगर अपनी बाते कहनी होती
00:05है तो उस तरीके से में अपनी बाते किसी से कहनी ही बाते हैं, अंदर ही अंदर उसको हम लिये
00:10रहते कि नहीं, अगर हम भोलेंगे तो सामने वाले को कही न
00:29सब बाते पीछे छोड़ने का वक्त बहुत पहले आ गया था और दुनिया भर
00:33के महिलाओं ने ये बाते बहुत पीछे छोड़ भी दी है भारत में भी जो
00:37समझदार महिलाएं हैं जो सोच समझ सकती हैं जो शिक्षा ले चुकी हैं वो इन बातों
00:55उस पर अडिग रहना, नहीं हटेंगे पीछे, सच्चाई से बेवफाई सुईकार नहीं करी जा सकती न, और किसी को भी
01:03छोड़ा जा सकता है, सच को कैसे छोड़ दें, सच पर अडिग रहना, ये सीखना पड़ेगा सबको, लड़की को भी,
01:10लड़के को भी, और वो सब बाते
01:11कि पुरुष की सेवा में ही, और परिवार की सेवा में ही स्वर्ग है, हटाईए ये सब, इनसान सत्य की
01:17सेवा के लिए पैदा होता है, परमात्मा होता है, न पिता परमात्मा हो सकता है, न पती परमात्मा हो सकता
01:23है, न पुतर परमात्मा हो सकता है, परमात्मा एक होता है, �
01:27उसके प्रते निश्ठा रखिये, उससे वफाने भाईए
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