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Transcript
00:00भाई होलिका साफ हो गई उसके बाद अंध्री संग आये और फिर अने कशिप को भी साफ कर दिया तो
00:06होली हर साल क्यों आ रही है फिर जिनकी सफाई होनीतियों तो हो गई तो हर साल होली क्यों जला
00:10रहे है उसके पीछे भी कारण है पर वो कारण हम समझते नहीं क्या कारण है ह
00:28तुई साग में मरेगा तो वो उसी खंबे से फिर कहते हैं कि रसिंग प्रकट हुए और द्वैत की जितनी
00:35शर्ते रखी थी सब शर्तों का उलंगन कर दिया
00:38वो ले भीतर बाहर के मध्य की चोखट पर मारूँगा तुझे दिन और रात के बीच की सांज गुधूली बेला
00:45में मारूँगा तुझको
00:46कि दिन के बाद रात आती है यही द्वैत का चक्र चलता है ना अस्त्र चाहिए ना शस्त्र चाहिए ना
00:52खून से फाड़ दूगा न धरती ना आस्मान या जांग पर रखके फाड़ दूगा बीच में मतलब समझ रहे हो
00:57अद्वैत अद्वैत है जो द्वैत को काट देता है
01:29ये होली का संदेश है
01:31कर लेते हैं विदेशी महिलाओं का तो हर साल आता है अच्छा हो इस साल ना आये कि गई थी
01:37उनको पकड़ करके रंग लगाने के बहाने छेड छाड दिया चुमा चाटी भी कर लिए सब क्यों क्यों क्योंकि कथा
01:44जो समझाना चाहती है वो तो हमने समझा ही नहीं कथा के प्रत
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