00:00शेख वरीद ने वृद्धावस्था को लेकर और वियोग को लेकर खूब कहा
00:06तो कह रहे हैं कि वियोगी मन, वियोगी इस्त्री रा तकते तकते वृद्धा हो गई
00:13अब मौत सामने खड़ी है और उस मुकाम पर वो कहती है कि अरे कागा, अरे कवे
00:20इस शरीर की मुझे बहुत परवार नहीं, अब मर तो मैं जाओंगी ही, तुझे जहां-जहां से मास नोचना होगा
00:28नोच लेना, चुक-चुक खा लेना, पर आखें छोड़ देना मेरी, नैनो पर चोच मत मारना, क्यों?
00:36उनमें पिया मिलन की आज है, 24 घंटे का दिन है न, बहुत कुछ किया दिन भर, वो सब कचरा
00:44था, उसमें से कीमती क्या था, बस वो जिसकी दिशा प्रीतम की ओर थी, और फरीज साब कहा रहे हैं,
00:55उसको बक्ष देना,
00:57और संत वो जिसका पूरा जिसम ही समझ लो, आँख बन गया, जिसकी धड़कन भी आँख बन गई, वो सांस
01:05ले रहा है किसके लिए, उसका हाथ उठ रहा है किसके लिए, दिल धड़क रहा है किसके लिए, वो आहार
01:12भी ले रहा है तो किसके लिए, वो गति भी कर रहा है तो
01:22रोस से पहले आज कितना प्रतिशत समय उसके ख्याल में उसके जिक्र में उसके तसवर में लगाया कितना जतना लगाया
01:35बस समझ दो उतना ही समय तुम जिए, बागी तो समय बेहोशी थी
01:41झाल झाल
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