00:00मैं अपने शरीर को सजाती हूँ, सवारती हूँ, और खूब गहने वहने से उसको लोड करती हूँ, अपने आपको सामने
00:06डॉल की तरह प्रेजन्ट करती हूँ, तो वो जो मेरी बेटी पैदा हुई है क्या मैं उसको भी बेबी डॉल
00:11नहीं बनाऊगी, बस पूछ रहा हूँ,
00:13आप अपनी बेटी को बेबी डॉल बनाओ, ये प्रेम है, बोलो, और जो महिला खुद को डॉल बनाती हो, वो
00:20बेटी को बेबी डॉल कैसे नहीं बनाएगी, जिस महिला, कि भीतर ये अल्गॉरिदम बैठ गया हो, कि अपने आपको सजाओ
00:27सवारो बेबी डॉल बनो, और उस
00:41इसलिए कि आपके शरीर से एक प्राणी का जन्म हो गया है, आप प्रेम पूर्ण हो जाएंगे, ऐसा हो सकता
00:47है क्या, तो ये उमीद भी क्यों करनी कि माबाप और बच्चों में प्रेम का रिष्टा होगा, रिष्टा तो आत्मग्यान
00:54और प्रेम का होता है, सुगंधित बह
01:10और की जिन्दगी में भी लेकर आए,
Comments