00:00कई ऐसे वैज्ञानिक और दार्शनिक थे यूरोप में जब वहार एवोलूशन का समय चल रहा था जो क्रांतियों का नित्रत
00:08भी कर रहे था
00:08कहानी इतनी सरल नहीं है कि उसी घ्रांति में फिर यह भी हुआ था कि उसी बीड़े में कई बार
00:14पलट करके उन वैज्ञानिकों कोई पीट दिया था एक आद्धों को तो मार भी दिया पर बता इसलिए रहा हूं
00:20कि विज्ञान भी समाज निर्पेक्ष नहीं हो सकता
00:25साइन्स और सुसाइटी का भी अपना एक तालुक है या आर्ट्स तो जब रोम जल रहा था तो निरो बासुरी
00:35बजा रहा था ये कटाक्ष है ऐसे नहीं करा जा सकता है
00:38पूरा देश जल रहा हो और वैग्यानिक प्रयोक्षाला में मगन है यहां कि एक कलाकार तबला बजा रहा है जब
00:44समाज में भूचालाया हुआ है तो आर्ट्स हो साइंसेज हो सोशल कॉंशिसनेस परवेड़ जॉल अफ दें लेकिन इसका यह नहीं
00:52मतलब है कि जो आर्टिस
00:53है या साइंटिस्ट है वो एक पूर्ण कालिक सामाजिक निता बन जाएगा लेकिन वो यह भी करेगा वो अपने काम
01:02के साथ साथ सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी राय भी रखेगा और जहां हो सके अग्रणी भी होगा वो रास्ता
01:10कि नहीं हम तो मैट्स के हैं तो हमें स
01:23घर्मनी अगर नुक्लियर वेपन नहीं बना पाया तो इसकी एक वज़े यह भी थी कि बहुत सारे वैज्ञानिक कुछ तो
01:31इसलिए छोड़ गए कि यहूदी थे और कुछ इसलिए छोड़ गए कि उनका पैचारिक तलपर मधवेत था लेकिन जो बचे
01:37भी रह गया उन्हों
01:38उने भी मालूम है क्या करा उनमें। इसके कईयों एक जानभूज करके हिट्लर के प्रोजेक्ट्स डिले करे। उनका विजञान के
01:47प्रते हमारी जिम्मेदारी है लेगिन समाज के प्रते भी तो है, और इसमें उन्होंने जान का खत्रा उठाया, क्योंकि हिटलर
01:52को अगर को
01:54कि यह सब हो रहा है तो वो तो दो घंटे के अंदर अंदर गोली मरवाता है
01:59कुछ भी हो पहले तो आप इंसान है ना और आपके आसपास क्या हो रहा है
02:05वो आपकी जिम्मेदारी के दाइरे में आता है
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